माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है और यह शुभ तिथि 25 जनवरी दिन रविवार को है. गुप्त नवरात्रि के सातवें दिन के साथ ही इस दिन सूर्य देव की आराधना को समर्पित भानु सप्तमी की विशेष तिथि भी पड़ रही है, जो सूर्य और देवी उपासकों के लिए बेहद खास है. गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन तांत्रिक उपासना की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण दिनों में गिना जाता है. इस दिन यदि भानु सप्तमी का संयोग बन जाए, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से साधक को आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ सांसारिक बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है. आइए जानते हैं भानु सप्तमी और गुप्त नवरात्रि का सातवें दिन का महत्व…
क्यों गुप्त रखी जाती है यह साधना?
गुप्त नवरात्रि की पूजा को गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें की जाने वाली तांत्रिक क्रियाएं अत्यंत सूक्ष्म और शक्तिशाली होती हैं. शास्त्रों के अनुसार साधना का प्रचार करने से उसकी शक्ति क्षीण हो जाती है. इसलिए साधक इसे एकांत और पूर्ण नियम-संयम के साथ करते हैं. इस दिन साधक विशेष मंत्र जप, हवन, यंत्र साधना और रात्रि कालीन पूजा करते हैं. माना जाता है कि सातवें दिन की गई साधना से देवी शीघ्र प्रसन्न होती हैं और साधक को इच्छित फल प्रदान करती हैं. हालांकि यह साधनाएं गुरु मार्गदर्शन में ही करने की परंपरा है.

भानु सप्तमी और गुप्त नवरात्रि का महत्व
भानु सप्तमी का दिन सूर्य देव की विशेष आराधना का है, जब रविवार और शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि का संयोग बनता है तो उसे भानु सप्तमी या रवि सप्तमी भी कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की पूजा-पाठ विशेष तौर पर फलित होती है और सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और करियर में उन्नति मिलती है. साथ ही शारीरिक-मानसिक कष्टों से मुक्ति मिलती है. रविवार को गुप्त नवरात्रि का सातवां दिन भी है. गुप्त नवरात्रि माघ मास में शुक्ल पक्ष में शुरू होती है, जिसमें देवी की गुप्त साधना की जाती है. यह नवरात्रि तंत्र-मंत्र साधकों के लिए विशेष महत्व रखती है. रविवार को भानु सप्तमी पड़ने से यह दिन और भी पुण्यकारी हो गया है.
सूर्य देव की इस तरह करें पूजा
भानु सप्तमी पर सूर्य देव की पूजा का विशेष महत्व है. स्नान कर सूर्य को अर्घ्य देने, लाल चंदन, रोली, लाल फूल, गुड़, चावल और जल से पूजा करने का विधान है. इसके साथ ही साधक को ओम ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः, घृणि सूर्याय नम:, सूर्य देवताभ्याम नम: मंत्र का का कम से कम 108 बार जप करना चाहिए. पूजा के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान जैसे गुड़, गेहूं, लाल वस्त्र या तांबे का दान करना शुभ माना जाता है.
धार्मिक मान्यता है कि भानु सप्तमी पर सूर्य देव की भक्ति से जातक को नया ऊर्जा मिलती है. करियर में प्रगति होती है, रोगों से छुटकारा मिलता है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं. गुप्त नवरात्रि के दिन देवी साधना के साथ सूर्य पूजा करने से दोहरी शक्ति मिलती है.

भानु सप्तमी 2026 पंचांग
दृक पंचांग के अनुसार, रविवार को शुक्ल सप्तमी तिथि रात 11 बजकर 10 मिनट तक रहेगी. रेवती नक्षत्र दोपहर 1 बजकर 35 मिनट तक है, उसके बाद अश्विनी शुरू होगा. चंद्रमा मीन राशि में संचार करेंगे. वहीं सूर्योदय 7 बजकर 13 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 54 मिनट पर होगा. पंचांग के अनुसार, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 26 मिनट से 6 बजकर 19 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 55 मिनट तक है.
किसी भी शुभ या नए कार्य से पहले मुहूर्त का विचार महत्वपूर्ण है. रविवार को राहुकाल दोपहर 4 बजकर 34 मिनट से 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगा, इस दौरान कोई शुभ कार्य ना करें. अन्य अशुभ समय जैसे यमगंड दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से 1 बजकर 54 मिनट तक और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 14 मिनट से 4 बजकर 34 मिनट तक है.






