Tuesday, March 3, 2026
29 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

Chanakya Niti: सावधान! कंगाली से पहले घर में नजर आने लगते हैं ये 5 संकेत, आचार्य चाणक्‍य ने बताया


Chanakya Niti: अपने पर‍िवार में खुशी, सम्‍पन्नता और समृद्ध‍ि बनी रहे, ये हर कोई चाहता है. लेकिन अक्‍सर हम अपने घर में कुछ ऐसी गलति‍यां करते हैं हमारे पार‍िवार‍िक कलह का कारण बनती हैं. यूं तो घर के बड़े-बुजुर्ग अक्‍सर इन बातों को समझाते हैं. लेकिन फिर भी ऐसे कई संकेत हैं, ज‍िन्‍हें हम बार-बार अनदेखा करते हैं. हमारे देश में कई ऐसे व‍िद्वान हुए हैं, ज‍िन्‍होंने जीवन के हर पहलू पर खुलकर अपने व‍िचार रखे हैं. ऐसे ही व‍िद्वान रहे हैं आचार्य चाणक्‍य ज‍िनकी ‘चाणक्‍य नीति’ आज भी युवाओं के लि‍ए जीवन के कई रहस्‍य उजागर करती है. जीवन का शायद ही कोई ऐसा पहलू हो, जिसपर आचार्य ने अपनी नीतियों के जरिए प्रकाश ना डाला हो. चाणक्‍य ने अपनी नीतियों में बताया है कि आचार्य ने बताया है कि यदि किसी परिवार या व्यक्ति पर आर्थिक संकट आने वाला होता है, तो क्या संकेत देखने को मिलते हैं.

क्‍या है चाणक्‍य नीति
चाणक्य नीति एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है, जिसमें राजनीति, अर्थशास्त्र, और नैतिकता से संबंधित उपदेश और नीतियां हैं. यह ग्रंथ चाणक्य, जिन्हें विष्णुगुप्त के नाम से भी जाना जाता है, ने लिखा गया था. चाणक्य एक महान राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री और विद्वान थे, जिन्होंने चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.

कांच का टूटना
ज्‍योति‍ष व‍िद्या के साथ-साथ चाणक्‍य नीति में भी इस बात का ज‍िक्र क‍िया गया है कि कांच का बार-बार टूटना आने वाली व‍िपत्त‍ि का संकेत होता है. वैसे तो कांच टूट जाता है, ये एक आम घटना है. लेकिन अगर बार-बार कांच टूट रहा है तो यह शुभ संकेत नहीं है. चाणक्य नीति के अनुसार घर में बार-बार कांच का टूटना, आने वाले समय में आर्थिक तंगी का संकेत देता है. आचार्य चाणक्य के मुताबिक घर में कांच का टूटा-फूटा कोई भी समान नहीं रखना चाहिए, ये घर की आर्थिक स्थिति पर नेगेटिव असर डालता है.

घर में कलह बना रहे
हमारे प्राचीन ग्रंथों में कई ऐसे ज्ञान हैं, जो हमें आने वाले खतरे के प्रति सचेत करते हैं. जैसे जिस घर में हमेशा लड़ाई-झगड़े का माहौल होता है, उस घर में लक्ष्मी कभी नहीं टिकती हैं. स‍िर्फ चाणक्‍य नीति में ही नहीं, बल्‍कि हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी इस बात का ज‍िक्र है. अगर किसी घर में अचानक से लड़ाई-झगड़ा अधिक होने लगे, बात-बात पर घर के सदस्य एक दूसरे से नाराज होने लगे, छोटी-छोटी बातों पर घर में क्लेश का माहौल हो जाए तो ये इस बात का संकेत है कि घर पर आर्थिक विपदा आने वाली है. घर में सुख और समृद्धि बनाए रखने के लिए, घर के माहौल को खुशनुमा बनाए रखना बहुत जरूरी है.

बड़ों का हो अपमान
आचार्य चाणक्य के अनुसार जिस घर में बड़े-बुजुर्गों का सम्‍मान न हो, या वो खुश न रहें तो समझ जाएं कि ये आने वाले आर्थ‍िक संकट की न‍िशानी है. बुजुर्गों का आशीर्वाद हमेशा ही घर में उन्नति लाता है. लेकिन जिस घर में बूढ़े, बुजुर्ग या बड़ों का सम्मान नहीं किया जाता है, बात-बात में उन्हें अपमानित किया जाता है, उनका सेवा सत्कार नहीं किया जाता है, उस घर में लक्ष्मी जी कभी भी वास नहीं करती हैं.

न लगे भक्‍ति में मन
जिस घर में नियमित रूप से पूजा-पाठ होता है, उस घर में पॉजिटिव एनर्जी रहती है और घर का माहौल खुशनुमा रहने लगता है. घर में पूजा-पाठ हो तो एक सकारात्‍मक ऊर्जा बनी रहती है. लेकिन इसके उलट अगर आपका मन पूजा पाठ से हट रहा है, या पूजा पाठ करने का मन न हो, तो उस घर में आर्थिक संकट बना ही रहता है.

मुरझा जाए तुलसी का पौधे
तुलसी के पौधे का सनातन धर्म में बहुत ही महत्‍व है. घर के आंगन में तुलसी फले-फूले इससे ज्‍यादा अच्‍छी बात क्‍या है. लेकिन अगर सुख और समृद्धि का प्रतीक तुलसी का पौधा अचानक से सूखने लग जाए, तो ये आने वाले आर्थिक संकट की तरफ इशारा करता है. इसके अलावा अगर तुलसी के पौधे पर सफेद फफूंदी जमने लगे तो ये भी आर्थिक तंगी की तरफ संकेत है.

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img