Chandra Grahan 2026: आज शाम आसमान में एक अद्भुत दृश्य बनने जा रहा है. कुछ ही देर में भगवान चंद्रदेव राहु की छाया में समा जाएंगे. चंद्र ग्रहण का नाम सुनते ही लोगों के मन में उत्सुकता भी होती है और थोड़ी आशंका भी. घरों में अचानक हलचल बढ़ जाती है कोई मंदिर में दीप जला रहा है, तो कोई रसोई में रखे खाने को ढक रहा है. सवाल वही पुराना है क्या ग्रहण के दौरान कुछ खाने से सचमुच अशुभ होता है? और अगर खा लिया तो क्या असर पड़ता है? आइए समझते हैं इस खगोलीय घटना का ज्योतिषीय पक्ष, उससे जुड़े लोकविश्वास और सावधानियां.
राहु की छाया और चंद्र ग्रहण का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो चंद्र ग्रहण होता है. पौराणिक मान्यता इसे राहु-केतु से जोड़ती है. कथा कहती है कि समुद्र मंथन के समय अमृत पान करने वाले राहु का सिर विष्णु भगवान ने अलग कर दिया था. तब से राहु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसित करता है. चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक माना जाता है. ऐसे में जब वह राहु की छाया में आता है तो लोगों के मन में बेचैनी, अस्थिरता या अनावश्यक तनाव बढ़ सकता है. ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि यह समय आत्मचिंतन और संयम का होता है.
ग्रहण के दौरान भोजन क्यों वर्जित माना जाता है?
धार्मिक मान्यताएं क्या कहती हैं?
ग्रहण काल में भोजन न करने की परंपरा बहुत पुरानी है. माना जाता है कि इस समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है, जिससे भोजन की शुद्धता प्रभावित होती है. यही कारण है कि लोग ग्रहण शुरू होने से पहले पके हुए खाने में तुलसी के पत्ते डाल देते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी बुजुर्ग कहते हैं कि ग्रहण के दौरान बना या खाया गया भोजन स्वास्थ्य पर विपरीत असर डाल सकता है. खासकर गर्भवती महिलाओं को सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है.
अगर खा लिया तो क्या होगा?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल में भोजन करने से मानसिक अशांति, पाचन संबंधी समस्या या आलस्य बढ़ सकता है. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण इसे अंधविश्वास मानता है, लेकिन आस्था रखने वाले लोग आज भी इन नियमों का पालन करते हैं. दिलचस्प बात यह है कि कई परिवारों में ग्रहण खत्म होते ही स्नान कर नए भोजन की शुरुआत की जाती है. इसे शुद्धि का प्रतीक माना जाता है.
किन राशियों पर अधिक प्रभाव?
ज्योतिषियों के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर है या राहु की महादशा चल रही है, उन्हें इस समय विशेष सतर्क रहना चाहिए. मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों को मानसिक उतार-चढ़ाव महसूस हो सकता है. ऐसे में ध्यान, मंत्र जाप और शांत वातावरण में समय बिताना लाभकारी माना जाता है.
क्या करें, क्या न करें?
ग्रहण काल में पूजा-पाठ, मंत्र जाप और ध्यान करना शुभ माना जाता है. कई लोग “ॐ चंद्राय नमः” मंत्र का जाप करते हैं. गर्भवती महिलाओं को नुकीली वस्तुओं से दूर रहने की सलाह दी जाती है, हालांकि इसका वैज्ञानिक आधार स्पष्ट नहीं है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर में गंगाजल का छिड़काव करने की परंपरा भी प्रचलित है. इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार माना जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)







