दरअसल, आज 3 मार्च 2026 को दुनिया भर में एक शानदार खगोलीय घटना हो रही है. इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहा जा रहा है. इसे ‘ब्लड मून’ के नाम से भी जाना जाता है. इसकी वजह है कि इस दौरान चंद्रमा लाल रंग का हो जाता है. यह चंद्रग्रहण अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर क्षेत्र और कुछ हिस्सों में दक्षिण अमेरिका में दिखाई देगा. भारत में भी शाम में यह दिखाई देगा. नासा और अन्य खगोलीय संगठनों की मानें तो यह 2026 का पहला चंद्रग्रहण है और अगला पूर्ण चंद्रग्रहण 2029 तक नहीं होगा. मतलब अब अगले पूर्ण चंद्रग्रहण के लिए 2029 तक का इंतजार करना होगा.
आज चंद्रग्रहण है
अब सवाल है कि आखिर चंद्रग्रहण कब लग रहा? चंद्रग्रहण आज यानी मंगलवार को लग रहा है. चंद्रग्रहण आज दोपहर में 3 बजकर 20 मिनट से लगेगा और यह 3 घंटे 27 मिनट तक रहेगा. चंद्र ग्रहण के समय आसमान में ब्लड मून का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा. भारत में आज का चंद्र ग्रहण के दिखाई देने का समय शाम को 6 बजकर 33 मिनट से 6 बजकर 40 मिनट के बीच है. फिलहाल, सूतक काल चल रहा है. क्योकि चंद्र ग्रहण का सूतक काल 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है. चंद्रग्रहण का सूतक काल सुबह में 6 बजकर 23 मिनट से जारी है. यहां ध्यान देने वाली बात है कि सूतक काल में कोई भी शुभ काम नहीं होता.
कब लगता है चंद्रग्रहण
इस दौरान पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है. लाल रंग पृथ्वी के वायुमंडल से नीली रोशनी के बिखरने के कारण आता है, जो लाल तरंगों को चंद्रमा तक पहुंचने देता है.
सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में अंतर?
अब सवाल है कि आखिर चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण में अंतर क्या है. दरअसल, दोनों ही खगोलीय घटनाएं हैं. हालांकि, इनकी प्रकृति और प्रभाव अलग-अलग हैं. चंद्रग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. सूर्य की रोशनी पृथ्वी की छाया से चंद्रमा पर पड़ती है, जिससे चंद्रमा अंधेरा या लाल दिखता है. यह रात में होता है और पूरी रात की तरफ से देखा जा सकता है, क्योंकि पृथ्वी की छाया बड़ी होती है. चंद्रग्रहण साल में 2-5 बार हो सकता है और यह सुरक्षित रूप से नंगी आंखों से देखा जाता है.
सूर्यग्रहण कब लगता है?
वहीं, सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है. चंद्रमा की छाया पृथ्वी पर पड़ती है, जिससे सूर्य का कुछ हिस्सा या पूरा ढक जाता है. यह दिन में होता है और केवल सीमित क्षेत्र में दिखता है, क्योंकि चंद्रमा की छाया छोटी होती है. सूर्यग्रहण पूर्ण, आंशिक या कुंडलाकार हो सकता है. इसे कभी भी नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, क्योंकि सूर्य की सीधी रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचा सकती है. विशेष चश्मे या फिल्टर्स की जरूरत पड़ती है. साल में 2-5 सूर्यग्रहण हो सकते हैं, लेकिन पूर्ण सूर्यग्रहण दुर्लभ होता है.







