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Char Dham Darshan: कपाट बंद होने के बाद ऐसे कर सकते हैं चार धाम के दर्शन, गद्दीस्थलों पर विराजमान रहेंगे भगवान


देहरादून: उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के धाम बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट विधिवत बंद हो चुके हैं. लेकिन दर्शन की इच्छा रखने वाले श्रद्धालुओं को निराश होने की जरुरत नहीं है. अब वे कपाट बंद होने के बावजूद अपने आराध्य के दर्शन और पूजन कर पाएंगे. आइये हम आपको बताते है कि कपाट बंद होने के बाद भी आप कैसे भगवान के दर्शन कर सकते हैं.

ऐसे कर सकते हैं दर्शन
चारधाम के सभी मंदिर के कपाट बंद हो गए है, लेकिन आप शीतकाल के दौरान भी सभी धामों के गद्दीस्थलों पर भगवान के दर्शन और पूजा कर सकते हैं. अब श्रद्धालु छह माह के लिए गद्दीस्थलों में जाकर पूजा अर्चना कर सकते हैं. खास बात ये है कि जिन श्रद्धालुों को यात्रा के दौरान ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में स्थित धामों में जाने में कठिनाई होती है वो शीतकालीन गद्दीस्थलों में आकर आराध्य के दर्शन कर सकते हैं. गौरतलब है कि राज्य सरकार द्वारा शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि पूरे वर्षभर राज्य में श्रद्धालुओं की चहलकदमी बनी रहेगी.

केदारनाथ धाम: ऊखीमठ में विराजे बाबा केदार
केदारनाथ धाम के कपाट पिछले वर्ष 10 मई को खुले थे और बीती 3 नवंबर को विधिवत अनुष्ठान के बाद कपाट छह माह के लिए बंद कर दिए गए हैं. बाबा केदार की पंचमुखी डोली ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान है. अगले वर्ष अप्रैल-मई में कपाट खुलने तक बाबा केदार की उनके गद्दीस्थल पर ही पूजा अर्चना होगी. शीतकाल में बाबा केदार के दर्शन करने के इच्छुक श्रद्धालु ऊखीमठ पहुंचकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं.

बदरीनाथ धाम: पांडुकेश्वर में उद्धव व कुबेर
भगवाना बद्री का धाम बद्रीनाथ धाम के कपाट बीते वर्ष 12 मई को खुले थे और इस वर्ष 17 नंवबर को बंद हुए हैं. अब उद्धव और कुबेर की डोली पांडुकेश्वर स्थित योग बदरी में विराजमान हैं. 19 नवंबर को आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर पहुंचेगी. इन गद्दीस्थलों पर भगवान बद्री विशाल की पूजा अर्चना शीतकाल के दौरान छह माह के लिए जारी रहेगी.

गंगोत्री धाम: मुखवा में दर्शन
गंगोत्री धाम के कपाट 2 नवंबर को बंद हुए हैं. शीतकाल में मां गंगा मुखवा गांव के गद्दीस्थल पर विराजमान होती हैं. यहां श्रद्धालु पूजा और दर्शन कर सकते हैं. वहीं यमुनोत्री धाम के कपाट 3 नवंबर को बंद हुए हैं. मां यमुना की डोली अब खरशाली स्थित यमुना मंदिर में विराजमान है. बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने बताया कि शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा देने के लिए गद्दीस्थलों पर बुनियादी सुविधाएं और ढांचागत विकास के प्रयास किए जा रहे हैं.

चारधाम यात्रा के इस वर्ष के आंकड़ों पर नज़र डाले तो केदारनाथ में इस वर्ष 16,52,070 श्रद्धालु पहुंचे. वहीं बद्रीनाथ में 14,35,401, गंगोत्री में 8,18,273 और यमुनोत्री में 7,14,779 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. वहीं अब इस व्यवस्था के तहत अब कपाट बंद होने के बाद भी भक्त जिस धाम के चाहें दर्शन कर सकते हैं.

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