जमुई:- लोक आस्था का महापर्व छठ के दौरान कई लोग पानी में खड़े होकर भगवान भास्कर को कष्टी प्रणाम करते हैं, तो कई लोग ऐसे भी होते हैं जो छठ के दौरान दंडवत देते हुए भगवान भास्कर की आराधना में लीन हो जाते हैं. इस दौरान छठव्रती अपने घर से निकलकर नदी घाट तक दंडवत देते हुए जाते हैं और इस कठिन प्रक्रिया को बार-बार दोहराते हैं. ऐसा कहा जाता है कि जब लोगों की मान्यता पूरी हो जाती है, तब वह ऐसा करते हैं और छठ घाट जाने वाले रास्ते में बड़ी संख्या में आपको दंड प्रणाम करने वाले लोग दिखाई देंगे. आचार्य पंडित शत्रुघ्न झा बताते हैं कि छठ के दौरान दंडवत देने की अपनी एक अलग मान्यता है और ऐसा करने के पीछे एक बहुत ही बड़ा कारण निहित है.
यहां जानिए दंडवत क्यों देते हैं लोग
आचार्य पंडित शत्रुघ्न झा ने Bharat.one को बताया कि पहले के जमाने में जब लोग छठ पूजा किया करते थे, तब वह भगवान भास्कर के 12 नाम की आराधना करते थे. भगवान सूर्य के 12 नाम हैं और लोग उनके 12 नाम का जाप करते हुए जमीन पर लेट जाते थे. फिर अपने शरीर की लंबाई पर एक निशान बनाते थे और यह प्रक्रिया कुल 13 बार दोहराई जाती थी. धीरे-धीरे इसी प्रक्रिया को लोग दंडवत के रूप में देखने लगे और उसे अपने घर से छठ घाट तक किया जाने लगा. आज भी लोग यह प्रक्रिया करते हैं, दंडवत देते हैं और भारी कष्ट से गुजरते हैं. दंडवत के दौरान लोगों को भूखे-प्यासे रहकर दंडवत देते हुए छठ घाट तक जाना होता है. किसी व्यक्ति के घर से यदि छठ घाट की दूरी कम हो, तब तो वह दंडवत देते हुए छठ घाट तक जाता ही है. यदि किसी व्यक्ति के घर से छठ घाट की दूरी बहुत अधिक हो, तब भी वह दंड प्रणाम करते और दंडवत देते हुए ही छठ घाट तक जाता है.
भगवान भास्कर पूरी करते हैं व्रती की हर मनोकामना
आचार्य ने Bharat.one को आगे बताया कि दंडवत का मतलब होता है किसी के सामने श्रद्धापूर्वक खुद को समर्पित कर देना. इस प्रक्रिया में लोग कई सारे नियमों का पालन करते हैं. छठ व्रती दंडवत देने से पूर्व छठ की सारी प्रक्रिया का पालन करते हुए नहाय-खाय और खरना करते हैं और निर्जला उपवास रहते हैं. इसके बाद दंडवत देने के समय व्रती अपने हाथ में आम की लकड़ी का एक टुकड़ा रखते हैं, जिससे वह जमीन पर लेट कर अपनी लंबाई के आकार पर निशान बनाते हैं. फिर उस निशान पर खड़े होकर भगवान भास्कर को दंड प्रणाम करते हैं. यही प्रक्रिया लगातार दोहराते रहते हैं. छठ के दौरान दंडवत के काफी खास और सबसे कठिन विधान में से एक माना जाता है.
FIRST PUBLISHED : November 7, 2024, 08:40 IST
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