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Chhath Puja 2024: भोपाल में शुरू हुआ छठ का महापर्व, लोगों ने तैयार किया घाट, कल शाम को सूर्यास्त पर देंगे अर्घ्य


भोपाल: भोपाल में छठ पूजा का महापर्व पूरे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. छठ पर्व के दूसरे दिन, जिसे खरना के नाम से जाना जाता है, शहर के प्रेमपुरा घाट सहित कई घाटों पर भक्तों ने पूरी तैयारी कर ली है. चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व का हर दिन का एक विशेष महत्व है. बुधवार, 6 नवंबर को छठ पूजा के दूसरे दिन खरना का आयोजन किया गया. इस दिन से व्रतधारी निर्जला उपवास की शुरुआत करते हैं और पूरे मन से छठ मैया की उपासना में जुट जाते हैं.

नहाय-खाय से खरना तक का सफर
छठ पूजा का पर्व नहाय-खाय के साथ शुरू होता है, जो कि पहले दिन का महत्वपूर्ण हिस्सा है. भोपाल में रहने वाले भोजपुरी समुदाय के राजू यादव ने Bharat.one से बातचीत में बताया कि नहाय-खाय में व्रती महिलाएं शुद्धता का ध्यान रखते हुए लौकी और चावल का भोजन ग्रहण करती हैं. पहले दिन की इस पूजा से वातावरण में भक्ति का माहौल बनने लगता है और घाटों पर छठ पर्व की तैयारियां जोरों पर होती हैं.

खरना का महत्व और प्रसाद का महत्व
छठ पूजा के दूसरे दिन को खरना कहा जाता है, और इस दिन का महत्व विशेष रूप से पूजा के प्रसाद में है. व्रती महिलाएं इस दिन रोटी, गुड़ की खीर और फल का प्रसाद बनाती हैं, जिसे भगवान को अर्पित कर प्रसाद के रूप में ग्रहण करती हैं. खरना के प्रसाद को शुद्धता और पारंपरिक विधि से तैयार किया जाता है. श्रद्धालु मानते हैं कि इस प्रसाद का सेवन करने से आशीर्वाद प्राप्त होता है और उन्हें शक्ति मिलती है ताकि वह अगले दो दिन का कठिन निर्जला व्रत पूरे धैर्य के साथ कर सकें.

निर्जला व्रत और डूबते सूर्य को अर्घ्य
छठ पूजा के तीसरे दिन का व्रत सबसे कठिन होता है, क्योंकि इस दिन व्रतधारी सुबह से लेकर रात तक बिना पानी के उपवास करते हैं. इस कठिन व्रत के अंत में, भक्त शाम को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं. यह परंपरा विशेष रूप से सूर्य देव की उपासना का हिस्सा है, जो जीवनदायी शक्ति का प्रतीक हैं. प्रेमपुरा घाट पर श्रद्धालुओं ने अर्घ्य के लिए विशेष व्यवस्था की है. भोपाल में घाटों पर पूजा की पूरी तैयारियां हो चुकी हैं और अर्घ्य देने की पूरी तैयारी भक्तों के जोश और आस्था को दर्शाती है.

उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ व्रत का समापन
छठ पूजा के चौथे और अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है. यह दिन छठ पर्व का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण समय होता है, जब भक्त पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ सूर्य देवता की उपासना करते हैं और उनसे परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं. भोपाल के प्रेमपुरा और अन्य घाटों पर सूर्योदय के समय भक्त एकत्र होते हैं और पूरी विधि के साथ अर्घ्य अर्पित करते हैं.

छठ पूजा में सुरक्षा और प्रशासन की तैयारियां
भोपाल में छठ पूजा के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया है, जिससे भक्तगण पूजा को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से कर सकें. प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि घाटों पर साफ-सफाई, पानी और अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए, ताकि भक्त बिना किसी परेशानी के पूजा कर सकें.

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.

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