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Combust Venus: कुंडली में अस्त शुक्र देता है दरिद्रता, वैवाहिक जीवन में होती दिक्कत, इन उपायों से होगी धनवर्षा!



Combust Venus: सूर्य की शक्तिशाली ऊर्जा किसी भी ग्रह को जला सकती है और ग्रह की शक्ति को भड़का भी सकती है, जिसके सूर्य निकट होता है. शुक्र का अस्त होना अशांत प्रेम जीवन का प्रतीक बन सकता है. अधिकांश मामलों में प्यार का बलिदान करियर या अन्य व्यक्तिगत लक्ष्यों, आदर्शों के कारण होता है. भले ही यह स्थिति रिश्तों के मामले में दर्दनाक हो सकती है. इसमें तलाक या अलगाव की प्रबल संभावना का कारण बनती है. सूर्य का अंतिम उद्देश्य किसी भी ग्रह के प्रभाव को आध्यात्मिक बनाना और शुद्ध करना होता है. ऐसे में शुक्र जो काम यौन प्रेम का प्रतीक है. वह अगर सूर्य के इस असर से प्रभावित होगा तब विरोधाभास अवश्य उत्पन्न होंगे.

जीवन में सुख का कारक है शुक्र : शुक्र जीवन में अधिकांश सुखद चीजों का कारक है, खासकर भौतिक चीजों का. यह प्रेम, रोमांस, सौंदर्य, विवाह, सेक्स, वीर्य, ​​यौवन, ललित कला, रंगमंच, संगीत, इत्र, विलासिता, शानदार वाहन और सुंदर कपड़ों का प्रतीक है. शुक्र वृष और तुला राशि का स्वामी है जो कालपुरुष कुंडली के दूसरे और सातवें घर हैं. शुक्र की मूलत्रिकोण राशि तुला है. शुक्र उन तरीकों को नियंत्रित करता है जिसमें हम रिश्तों में बातचीत करते हैं और साथ ही जिस तरह से हम खुद को व्यक्त करते हैं. शुक्र इच्छा का प्रमुख कारक है. साझेदारी, जीवनसाथी, भागीदारों के रूप में कैसे व्यवहार करते हैं. क्या हमें आकर्षित करता है, इस संबंध में यह शुक्र यौन इच्छाओं, रोमांटिक जोड़ी में हमारी इच्छाओं और हमारे व्यवहारों का वर्णन करता है. यह प्रभावित करता है कि आप कैसे प्यार में पड़ते हैं और जब आप करते हैं तो आप कैसे व्यवहार करते हैं. शुक्र बेडरूम और यौन गतिविधियों को नियंत्रित करता है.

शुक्र ग्रह के अस्त होने का समय : इस युति के बाद अस्त शुक्र का परिवर्तन होता है. वह इवनिंग स्टार से मॉर्निंग स्टार या दूसरी तरफ जाती है. सूर्य/शुक्र की युति हर 18 महीने में दो बार होती है. जन्म कुंडली में या व्यक्तिगत गोचर में इसे देख सकते हैं. पारंपरिक रूप से यह माना जाता है कि अस्त के दौरान सूर्य की अत्यधिक शक्ति शुक्र को जला कर और नष्ट कर देती है. वह अदृश्य सा लगता है, इस खूबसूरती को न तो देखा जाता है और न ही सराहा जाता है. प्रेम जीवन अशांत हो सकता है तलाक की अधिक संभावना रहती है. पैसे, सुरक्षा या सत्ता के लिए प्यार का त्याग करना पड़ सकता है.

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भौतिक और सांसारिक सुखों का कारक शुक्र : ज्योतिष शास्त्र में सभी भौतिक और सांसारिक सुखों का कारक शुक्र को माना जाता है. शुक्र अस्त होने पर कुछ विशेष कामों को रोक भी दिया जाता है. यह मुख्य रुप से सभी शुभ कार्यों और विवाह जैसे कार्यों पर विराम लगाने का समय होगा. जब भी कोई ग्रह परिभ्रमण के दौरान सूर्य के इतने करीब जाता है, तो सूर्य के प्रकाश और उसकी चमक के कारण उस ग्रह का प्रकाश कमजोर पड़ने लगता है. इसके प्रभाव से चमक गायब हो जाती है. इस दौरान ग्रह सूर्य से एक विशेष अंश की दूरी पर होता है, जिसके कारण सूर्य की ऊर्जा उस ग्रह के प्रभाव को कमजोर कर देती है, इस घटना को ज्योतिष में ग्रह के अस्त होने के रूप में जाना जाता है. कोई भी ग्रह जब सूर्य से एक विशेष दूरी पर होता है, जिसके कारण सूर्य की ऊर्जा उस ग्रह के प्रभाव को कमजोर कर सकती है तो ये स्थिति अस्त बन जाती है.

शुक्र के अस्त होने का फल : वैदिक ज्योतिष में शुक्र ग्रह को सभी सुखों का कारक माना गया है. कुंडली में शुक्र ग्रह के अस्त होनी की स्थिति होने पर व्यक्ति को जीवन भर विवाह से संबंधित विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है.

  1. कुण्डली में शुक्र ग्रह अस्त अवस्था में होना, यौन रोगों, गर्भाशय रोग अथवा स्त्री रोग से संबंधित समस्या हो सकती है, क्योंकि शुक्र जननांग या यौन संबंधों का कारक होता है.
  2. शुक्र के अस्त होने के कारण रिश्तों में एक से अधिक साथी की भागीदारी हो सकती है, अनैतिक संबंधों में भी व्यक्ति अधिक लिप्त हो सकता है.
  3. इसके अलावा, इन लोगों को गुर्दे, आंख, मूत्राशय और त्वचा से संबंधित शारीरिक समस्याएं होना भी परेशानी का कारण होता है.
  4. विवाहित रिश्तों में जीवन साथी के स्वास्थ्य पर भी प्रभाव पड़ सकता है.
  5. यदि किसी जातक की कुण्डली के आठवें भाव में शुक्र का गोचर होता है तो जातक को वैवाहिक जीवन में विवाह संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

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शुक्र को मजबूत करने के उपाय 

  1. शुक्रवार को सफेद वस्त्र धारण करें.
  2. दहिनें हाथ की अनामिका में जरकन या हीरा धारण करें.
  3. परफ्युम या इत्र का प्रयोग शुक्र को बलवान बनाता है.
  4. किसी नेत्रहीन व्यक्ति को सफेद वस्त्र एवं सफेद मिठाई का दान करें.
  5. दस वर्ष से कम उम्र की कन्याओं को गाय के दूध की खीर खिलाएं तो आपको जल्दी ही इसके शुभ परिणाम मिलेंगे.
  6. मछलियों को आटे की गोलियां (दाना) डालें.
  7. ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः मन्त्र का 108 बार जाप कर ग्रह प्रतिष्ठा करें. इसके बाद धूप,दीप , श्वेत पुष्प, अक्षत आदि से पूजन कर लें.
  8. चांदी का कड़ा पहनें. श्रीसूक्त का पाठ करें.
  9. शुक्र के दुष्प्रभाव निवारण के लिए किए जा रहे टोटकों हेतु शुक्रवार का दिन, शुक्र के नक्षत्र (भरणी, पूर्वा-फाल्गुनी, पुर्वाषाढ़ा) तथा शुक्र की होरा में अधिक शुभ होते हैं.
  10. शुक्र को मजबूत बनाने के लिए शुक्रवार के दिन नमक के सेवन न करें. मान्यता है कि ऐसा करने से रिश्तों में प्रेम और सुख-सुविधाओं में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं.

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