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Hartalika Teej 2024 Niyam: क्या है हरतालिका तीज? कैसे पड़ा इसका नाम? पंडित जी से जानें व्रत के नियम और महत्व


हरतालिका तीज का पावन पर्व इस साल 6 सितंबर शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन उत्तर भारत के कई हिस्सों में सुहागन महिलाएं और विवाह योग्य युवतियां हरतालिका तीज मनाएंगी. हरतालिका तीज का व्रत कठिन होता है. इसके कुछ विशेष नियम होते हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है. यदि आप उन नियमों का पालन नहीं करती हैं तो आपका व्रत निष्फल हो सकता है. इस व्रत में तीज माता यानी माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करते हैं. उनके आशीर्वाद से अखंड सौभाग्य और मनचाहे जीवनसाथी जैसी मनो​कामनाएं पूरी होती हैं. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं हरतालिका तीज क्या है? इस व्रत का नाम हरतालिका तीज कैसे पड़ा? हरतालिका तीज के व्रत नियम क्या हैं?

हरतालिका तीज क्या है?
पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए हरतालिक तीज का व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि को रखते हैं. हरतालिक दो शब्दों से मिलकर बना है हरत और आलिका. हरत का अर्थ हरण और आलिका का अर्थ सखी है यानी सखियों द्वारा हरण. तीज का अर्थ तृतीया ति​थि से है.

यह भी पढ़ें: किस दिन है हरतालिक तीज? रवि योग में होगी शिव-पार्वती पूजा, व्रती को मिलेगा मनचाहा वरदान! जानें शुभ मुहूर्त

कैसे पड़ा हरतालिका तीज का नाम
माता पार्वती के पिता उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे और माता पार्वती भगवान शिव को पति स्वरूप में चाहती थीं. तब उनकी सखियों ने माता पार्वती को महल से ले जाकर जंगल में छिपा ​दीं. वहां सैकड़ों वर्षों तक कठोर जप, तप करते हुए माता पार्वती ने भगवान शिव को प्रसन्न किया और उनको पति स्वरुप में प्राप्त किया.

हरतालिका तीज के नियम

1. हरतालिका तीज का व्रत रखने के एक दिन पूर्व से ही सात्विक भोजन करना चाहिए और तीज पूजा सामग्री और सरगी की व्यवस्था कर लेनी चाहिए.

2. हरतालिका तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है, इसमें अन्न, जल, फल आदि खाना वर्जित है. यहि व्रत तीज के सूर्योदय से चतुर्थी के सूर्योदय तक रखा जाता है. 24 घंटे तक कुछ नहीं खाते हैं.

3. तीज के दिन व्रती को ब्रह्म मुहूर्त 04:30 ए एम से 05:16 ए एम के बीच नित्य कर्म से मुक्त होकर सरगी खाना चाहिए. सरगी में आप फल, मिठाई आदि का सेवन कर सकती हैं. सूर्योदय 06:02 ए एम से आपका व्रत प्रारंभ हो जाएगा.

4. तीज पूजा में माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की मिट्टी की मूर्ति या तस्वीर का उपयोग करें. पूजा प्रदोष काल में यानी सूर्यास्त 06:36 पी एम के बाद करें. पूजा के लिए मूर्ति की स्थापना दोपहर में करते हैं.

5. इस दिन व्रती को सोलह श्रृंगार के साथ नए वस्त्र पहनना चाहिए. माता पार्वती की पूजा में पीले सिंदूर का इस्तेमाल करते हैं. पूजा के समय आप भी पीला सिंदूर लगाएं. य​ह सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.

6. तीज पूजा में माता पार्वती को भी सुहाग सामग्री, लाल साड़ी, चुनरी आदि चढ़ाते हैं. हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनते हैं. माता पार्वती और शिव जी की आरती करते हैं.

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7. पूजा समापन के बाद अपनी सास को उपहार, प्रसाद और सुहाग सामग्री भेंट करें. फिर उनसे आशीर्वाद लें. जो मनचाहे जीवनसाथी के लिए व्रत कर रही हैं, वे शिव जी और माता पार्वती से मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद लें.

8. रात के समय में जागरण करें. फिर 7 सितंबर को सुबह में स्नान करके दैनिक पूजा करें. ब्रह्माणों को दान और दक्षिणा दें. उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा करें.

9. व्रती को दोपहर के समय में सोना नहीं चाहिए. दूसरी बात यह है कि यदि आपकी सेहत खराब है तो निर्जला व्रत न करें. अपने स्थान पर पति से व्रत करा सकती हैं.

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