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Rishikesh: होलिका दहन के समय 9 लकड़ियों के साथ अग्नि की 9 परिक्रमा करने से जीवन में चल रही बहुत सी परेशानियों से मुक्ति मिलती है. ये कौन सी लकड़ी हैं और किस परिक्रमा से क्या होता है, जानते हैं.
होलिका दहन पर नवग्रह की शांति के लिए करें ये उपाय
हाइलाइट्स
- होलिका दहन पर 9 परिक्रमा से कष्ट दूर होते हैं.
- हर परिक्रमा में विशेष लकड़ी अर्पित करना लाभकारी है.
- नवग्रहों की शांति के लिए 9 परिक्रमा करें.
ऋषिकेश: होलिका दहन हिंदू धर्म में एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जिसे बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाया जाता है. इस साल यह पर्व 13 मार्च को मनाया जाएगा. इस दिन विशेष पूजा-अर्चना और परिक्रमा करने से नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर व्यक्ति नवग्रहों की शांति के लिए 9 परिक्रमा करता है और हर परिक्रमा में विशेष लकड़ियां अर्पित करता है, तो यह कमजोर ग्रहों को मजबूत बनाकर जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करता है.
होलिका दहन की 9 परिक्रमा बेहद लाभकारी
Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान उत्तराखंड के ऋषिकेश में स्थित शिव शक्ति एस्ट्रोलॉजी सेंटर की ज्योतिषी शकुंतला बेलवाल ने कहा कि नवग्रहों की शांति के लिए होलिका दहन के दौरान 9 परिक्रमा करना और हर परिक्रमा में बताई गई लकड़ियां अर्पित करना अत्यंत लाभकारी होता है. इससे कमजोर ग्रह मजबूत होते हैं, जीवन में आने वाली परेशानियां कम होती हैं और हर क्षेत्र में उन्नति मिलती है. यह अनुष्ठान व्यक्ति के स्वास्थ्य, करियर, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित करता है. इसलिए इस होली पर ये 9 परिक्रमा करके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि पाएं.
होली पर 9 परिक्रमा और उनकी महत्ता:
1. पहली परिक्रमा – मदार की लकड़ी:
मदार (आक) की लकड़ी सूर्य ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है. यह आत्मविश्वास, ऊर्जा और स्वास्थ्य को मजबूत करती है. इसे होलिका में अर्पित करने से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान और सफलता मिलती है.
2. दूसरी परिक्रमा – पलाश की लकड़ी:
पलाश का वृक्ष मंगल ग्रह से जुड़ा होता है. इसे जलाने से साहस, पराक्रम और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. साथ ही यह रक्त संबंधी रोगों को दूर करने में भी सहायक होता है.
3. तीसरी परिक्रमा – खैर (खादिर) की लकड़ी:
खैर की लकड़ी शनि ग्रह से संबंधित होती है. इसे होलिका में अर्पित करने से शनि की दशा या महादशा से हो रही परेशानियां कम होती हैं और व्यवसाय में उन्नति होती है.
4. चौथी परिक्रमा – अपामार्ग की लकड़ी:
अपामार्ग की लकड़ी बुध ग्रह से संबंधित होती है. इसे होली में डालने से वाणी में मधुरता आती है, बुद्धि तेज होती है और व्यापारिक क्षेत्र में सफलता मिलती है.
5. पांचवीं परिक्रमा – पीपल की लकड़ी:
पीपल का वृक्ष गुरु (बृहस्पति) ग्रह का प्रतीक है. यह आध्यात्मिक उन्नति, ज्ञान और सौभाग्य को बढ़ाने में मदद करता है. इसे होलिका में अर्पित करने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है.
6. छठी परिक्रमा – आम की लकड़ी:
आम का वृक्ष चंद्रमा ग्रह से जुड़ा होता है. इसे जलाने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मकता बनी रहती है. यह माता से जुड़े संबंधों को भी सुधारता है.
7. सातवीं परिक्रमा – इमली की लकड़ी:
इमली का वृक्ष राहु ग्रह से संबंधित होता है. इसे होली में अर्पित करने से राहु के दोष दूर होते हैं और जीवन में आने वाली अचानक परेशानियों से मुक्ति मिलती है.
8. आठवीं परिक्रमा – बबूल की लकड़ी:
बबूल का वृक्ष केतु ग्रह से जुड़ा होता है. इसे होली में जलाने से आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ती है, अनहोनी घटनाओं से रक्षा होती है और व्यक्ति के अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
9. नौवीं परिक्रमा – नीम की लकड़ी:
नीम का वृक्ष शुक्र ग्रह का प्रतीक है. इसे होलिका में अर्पित करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है. यह स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है.
Rishikesh,Dehradun,Uttarakhand
March 13, 2025, 07:17 IST
होलिका दहन पर नवग्रहों की शांति के लिए करें 9 परिक्रमा, दूर होंगे कष्ट-क्लेश!
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.






