सूरत: सनातन धर्म में 16 प्रमुख संस्कार बताए गए हैं, जो जन्म से लेकर जीवन के अंतिम पड़ाव तक जुड़े होते हैं. इनमें से एक बेहद महत्वपूर्ण संस्कार है विवाह संस्कार, जिसे पवित्र बंधन माना जाता है. विवाह में कई रस्में और पूजा की सामग्री इस्तेमाल होती हैं, जिनका अपना अलग महत्व होता है. इन सभी में एंटरपाट नाम का एक कपड़ा भी बेहद अहम भूमिका निभाता है.
एंटरपाट: सिर्फ कपड़ा नहीं, परंपरा का हिस्सा
विवाह की पाणिग्रहण विधि यानी हाथ मिलाने की रस्म के दौरान एंटरपाट का इस्तेमाल होता है. यह कपड़ा दूल्हा और दुल्हन के बीच रखा जाता है ताकि वे रस्म पूरी होने तक एक-दूसरे का चेहरा न देख सकें. मंत्रोच्चारण के बाद जब यह कपड़ा हटाया जाता है, तब पहली बार दूल्हा-दुल्हन एक-दूसरे को देखते हैं.
एंटरपाट के बदलते ट्रेंड
पहले एंटरपाट के लिए सिर्फ सफेद कपड़े या धोती का उपयोग होता था, लेकिन अब 21वीं सदी में इसका ट्रेंड बदल गया है. अब इसे रचनात्मक और पारंपरिक तरीके से तैयार किया जा रहा है. कपड़े पर दूल्हा-दुल्हन के नाम, शादी की तारीख और समय के साथ उनकी पेंटिंग्स बनाई जाती हैं.
परिवार की छाप भी शामिल
आजकल के युवाओं ने इस रस्म में परिवार को भी शामिल कर लिया है. दूल्हा-दुल्हन के साथ अब माता-पिता, दादा-दादी, चाचा-चाची और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम और हाथों के निशान भी एंटरपाट पर बनाए जाते हैं. यह न केवल परंपरा को जीवित रखता है, बल्कि शादी को यादगार भी बनाता है.
फैशन और परंपरा का संगम
कलाकार परिमल गज्जर, जो एंटरपाट डिज़ाइन करते हैं, बताते हैं कि पहले लोग सिर्फ नाम लिखवाते थे, फिर कपल पेंटिंग का चलन शुरू हुआ. अब परिवार के सदस्य भी इसमें जुड़ गए हैं. यह परंपरा और फैशन का अनोखा उदाहरण है.
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मिरर वर्क वाले एंटरपाट का ट्रेंड
अब एंटरपाट पर दूल्हा-दुल्हन की पेंटिंग के साथ मिरर वर्क भी जोड़ा जा रहा है. मिरर से सजाए गए एंटरपाट की कीमत ₹2500 से ₹3500 के बीच होती है. यह न केवल शादी की रस्मों को खास बनाता है, बल्कि इसे देखने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनाता है.
बता दें कि युवाओं के लिए यह कपड़ा सिर्फ एक रस्म का हिस्सा नहीं, बल्कि परिवार के आशीर्वाद को हमेशा संजोकर रखने का तरीका बन गया है. एंटरपाट की यह रचनात्मकता शादी के पवित्र बंधन में एक नई जान डाल रही है.
FIRST PUBLISHED : November 19, 2024, 10:41 IST







