मिर्जापुर: गंगोत्री से निकलकर पहाड़ों के बीच से होकर गुजरने वाली गंगा विंध्य पर्वत पर आकर विशेष हो जाती है. मां विंध्यवासिनी की नगरी में आकर स्वयं गंगा आनंदित महसूस करती है. मान्यता है कि गोमुख से चलने के बाद गंगा विंध्य पर्वत के शिखर पर शयन करती है. मां को स्पर्श करके गंगा तृप्त होती है. काशी और प्रयागराज में गंगा स्नान का जितना महत्व है. उतना ही महत्व मिर्जापुर में गंगा स्नान का है. मान्यता है कि यहां पर गंगा स्नान करने के बाद सारे पाप कट जाते हैं.
धर्मगुरु पंडित अनुपम महराज ने Bharat.one से बातचीत में बताया कि मां विंध्यवासिनी के धाम में गंगा इसलिए विशेष होती है. क्योकि यह सबसे उत्तम स्थान है. विंध्य पर्वत का शिखर यहीं पर है. मां विंध्यवासिनी विंध्य पर्वत के शिखर पर विराजमान है. विंध्य पर्वत पर ही मां गंगा शयन करती हैं.
गौमुख से चलने के बाद गंगा यहीं शयनकाल करती हैं. इसका जिक्र पुराणों में है. मां विंध्यवासिनी धाम में स्वयं मां विंध्यवासिनी स्नान करती है. गंगा के मध्य मां का कुंड है. इसके साथ ही अंदर कई दिव्य स्थान भी है. मां भगवती के धाम में आकर गंगा भी आनंदित रहती है, जो भगवती को स्पर्श कर पाती है और भगवती का आशीर्वाद पाकर तृप्त होती है.
उन्होंने बताया कि काशी और प्रयागराज में गंगा स्नान के बाद मिर्जापुर में गंगा स्नान का विशेष महत्व है. आनंद रामायण में जिक्र है कि प्रभु श्रीराम लंका से वापस आने के बाद मिर्जापुर में गंगा नदी में स्नान करने के बाद मां विंध्यवासिनी के दर्शन किए. तत्पश्चात उन्होंने दान भी दिया अर्थात जो व्यक्ति यहां पर आकर स्नान करता है और दान करता है. उसके सारे पास कट जाते है, लेकिन आगे पाप करने पर कोई फल प्राप्त नहीं होगा.
FIRST PUBLISHED : November 21, 2024, 07:10 IST







