Parvati Mata Chalisa: हिंदू धर्म में मां पार्वती को शक्ति, धैर्य, प्रेम और परिवार की देवी माना जाता है. वे भगवान शिव की अर्धांगिनी हैं और गणेश व कार्तिकेय की माता हैं. पार्वती माता का जीवन खुद में एक प्रेरणा है, क्योंकि उन्होंने तप, संयम और विश्वास के बल पर शिव को पति रूप में पाया. यही वजह है कि मां पार्वती को सुहाग, सुखी दांपत्य और पारिवारिक संतुलन की देवी कहा जाता है. एक ऐसी प्रार्थना है, जिसे पढ़ने से मन को शांति मिलती है और घर के माहौल में सकारात्मकता आती है. खासकर महिलाएं इस चालीसा का पाठ विवाह में आ रही रुकावटें दूर करने, वैवाहिक जीवन को मजबूत बनाने और घर की सुख-शांति के लिए करती हैं. माना जाता है कि जो भक्त सच्चे मन से मां पार्वती की चालीसा का पाठ करता है, उस पर मां की कृपा बनी रहती है. आज के समय में जब रिश्तों में तनाव, मन में बेचैनी और जीवन में असंतुलन बढ़ रहा है, तब मां पार्वती की चालीसा एक मानसिक सहारा बनकर सामने आती है. यह सिर्फ एक धार्मिक पाठ नहीं, बल्कि मन को स्थिर करने का एक आसान तरीका भी है.
मां पार्वती की चालीसा का धार्मिक महत्व
मां पार्वती को आदिशक्ति का स्वरूप माना जाता है. चालीसा के हर दोहे में उनके गुणों, शक्ति और करुणा का वर्णन मिलता है. मान्यता है कि इसका नियमित पाठ करने से:
-वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ता है
-पति-पत्नी के बीच समझ बेहतर होती है
-विवाह में देरी की समस्या कम होती है
-घर में शांति और संतुलन बना रहता है
-शिव और शक्ति के संतुलन को समझने के लिए पार्वती चालीसा को बेहद असरदार माना जाता है.
मां पार्वती की चालीसा का पाठ कब और कैसे करें
मां पार्वती की चालीसा का पाठ करने के लिए कोई बहुत कठिन नियम नहीं हैं, फिर भी कुछ बातों का ध्यान रखा जाए तो इसका असर और गहरा होता है.
-सुबह स्नान के बाद या शाम को शांत माहौल में पाठ करें
-शुक्रवार का दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है
-मां पार्वती की तस्वीर या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं
-मन में कोई नकारात्मक सोच न रखें
-पाठ के बाद मां से अपने मन की बात जरूर कहें
-अगर रोज पाठ संभव न हो, तो कम से कम शुक्रवार को इसका पाठ करना अच्छा माना जाता है.
॥ दोहा ॥
जय गिरी तनये दक्षजे,शम्भु प्रिये गुणखानि.
गणपति जननी पार्वती,अम्बे! शक्ति! भवानि॥
॥ चौपाई ॥
ब्रह्मा भेद न तुम्हरो पावे.पंच बदन नित तुमको ध्यावे॥
षड्मुख कहि न सकत यश तेरो.सहसबदन श्रम करत घनेरो॥
तेऊ पार न पावत माता.स्थित रक्षा लय हित सजाता॥
अधर प्रवाल सदृश अरुणारे.अति कमनीय नयन कजरारे॥
ललित ललाट विलेपित केशर.कुंकुम अक्षत शोभा मनहर॥
कनक बसन कंचुकी सजाए.कटी मेखला दिव्य लहराए॥
कण्ठ मदार हार की शोभा.जाहि देखि सहजहि मन लोभा॥
बालारुण अनन्त छबि धारी.आभूषण की शोभा प्यारी॥
नाना रत्न जटित सिंहासन.तापर राजति हरि चतुरानन॥
इन्द्रादिक परिवार पूजित.जग मृग नाग यक्ष रव कूजित॥
गिर कैलास निवासिनी जय जय.कोटिक प्रभा विकासिन जय जय॥
त्रिभुवन सकल कुटुम्ब तिहारी.अणु अणु महं तुम्हारी उजियारी॥
हैं महेश प्राणेश! तुम्हारे.त्रिभुवन के जो नित रखवारे॥
उनसो पति तुम प्राप्त कीन्ह जब.सुकृत पुरातन उदित भए तब॥
बूढ़ा बैल सवारी जिनकी.महिमा का गावे कोउ तिनकी॥
सदा श्मशान बिहारी शंकर.आभूषण हैं भुजंग भयंकर॥
कण्ठ हलाहल को छबि छायी.नीलकण्ठ की पदवी पायी॥
देव मगन के हित अस कीन्हों.विष लै आपु तिनहि अमि दीन्हों॥
ताकी तुम पत्नी छवि धारिणि.दूरित विदारिणी मंगल कारिणि॥
देखि परम सौन्दर्य तिहारो.त्रिभुवन चकित बनावन हारो॥
भय भीता सो माता गंगा.लज्जा मय है सलिल तरंगा॥
सौत समान शम्भु पहआयी.विष्णु पदाब्ज छोड़ि सो धायी॥
तेहिकों कमल बदन मुरझायो.लखि सत्वर शिव शीश चढ़ायो॥
नित्यानन्द करी बरदायिनी.अभय भक्त कर नित अनपायिनी॥
अखिल पाप त्रयताप निकन्दिनि.माहेश्वरी हिमालय नन्दिनि॥
काशी पुरी सदा मन भायी.सिद्ध पीठ तेहि आपु बनायी॥
भगवती प्रतिदिन भिक्षा दात्री.कृपा प्रमोद सनेह विधात्री॥
रिपुक्षय कारिणि जय जय अम्बे.वाचा सिद्ध करि अवलम्बे॥
गौरी उमा शंकरी काली.अन्नपूर्णा जग प्रतिपाली॥
सब जन की ईश्वरी भगवती.पतिप्राणा परमेश्वरी सती॥
तुमने कठिन तपस्या कीनी.नारद सों जब शिक्षा लीनी॥
अन्न न नीर न वायु अहारा.अस्थि मात्रतन भयउ तुम्हारा॥
पत्र घास को खाद्य न भायउ.उमा नाम तब तुमने पायउ॥
तप बिलोकि रिषि सात पधारे.लगे डिगावन डिगी न हारे॥
तब तव जय जय जय उच्चारेउ.सप्तरिषि निज गेह सिधारेउ॥
सुर विधि विष्णु पास तब आए.वर देने के वचन सुनाए॥
मांगे उमा वर पति तुम तिनसों.चाहत जग त्रिभुवन निधि जिनसों॥
एवमस्तु कहि ते दोऊ गए.सुफल मनोरथ तुमने लए॥
करि विवाह शिव सों हे भामा.पुनः कहाई हर की बामा॥
जो पढ़िहै जन यह चालीसा.धन जन सुख देइहै तेहि ईसा॥
॥ दोहा ॥
कूट चन्द्रिका सुभग शिर,जयति जयति सुख खानि.
पार्वती निज भक्त हित,रहहु सदा वरदानि॥
मां पार्वती की चालीसा पढ़ने से मिलने वाले लाभ

मां पार्वती की चालीसा का असर सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक स्तर पर भी महसूस किया जाता है.
-मन में धैर्य और शांति आती है
-रिश्तों में अपनापन बढ़ता है
-नकारात्मक सोच कम होती है
-आत्मविश्वास मजबूत होता है
-घर का माहौल हल्का और खुशहाल लगता है
-कई भक्तों का मानना है कि नियमित पाठ से जीवन की उलझनें धीरे-धीरे सुलझने लगती हैं.
मां पार्वती की चालीसा किन लोगों को जरूर पढ़नी चाहिए
-जिनका विवाह तय नहीं हो पा रहा
-जिनके वैवाहिक जीवन में तनाव है
-जो मानसिक बेचैनी महसूस करते हैं
-जो घर में सुख-शांति चाहते हैं
-जो मां पार्वती की कृपा पाना चाहते हैं
-यह चालीसा पुरुष और महिला दोनों पढ़ सकते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
