Moryai chhath 2025: भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मोरयाई छठ का व्रत रखा जाता है. इसे मोर छठ या कुछ स्थानों पर सूर्य षष्ठी व्रत भी कहते हैं. भगवान सूर्य को समर्पित यह दिन सूर्य उपासना एवं व्रत रखने के लिए विशेष महत्व रखता है. इस बार यह व्रत 29 अगस्त दिन शुक्रवार को है. भविष्योत्तर पुराण के अनुसार, प्रत्येक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को भगवान सूर्य के निमित्त व्रत करना चाहिए. इनमें भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी का विशेष महत्व है. इस दिन गंगा स्नान, सूर्योपासना, जप एवं व्रत किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य पूजन, गंगा स्नान, दर्शन और पंचगव्य सेवन से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल प्राप्त होता है. इस दिन व्रत में अलोना (नमक रहित) भोजन दिन में एक बार ही ग्रहण करना चाहिए. अब सवाल है कि आखिर कब मोरयाई छठ? मोरयाई छठ सूर्य देव की पूजा कैसे करें? सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय क्या हैं? किन मंत्रों के जाप प्रसन्न होंगे भगवान भाष्कर? मोरयाई छठ पर कैसे करें सूर्य देव की पूजा? आइए जानते हैं इस बारे में-
कैसे करें मोरयाई छठ व्रत
हर व्रतधारी को मोरयाई छठ व्रत पूर्ण श्रद्धा एवं भक्तिपूर्वक रखना चाहिए. भाद्रपद शुक्ल षष्ठी तिथि को जब तक सूर्य देवता प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दें, तब तक सूर्य उपासना नहीं करना चाहिए. इस दिन सूर्यदेव को गुलाल, लाल चंदन, लाल पुष्प, केसर, लाल कपड़ा, लाल फल, लाल रंग की मिठाई अर्पित करें. भाद्रपद शुक्ल षष्ठी के दिन यह व्रत करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ जितना फल प्राप्त होता है.
सूर्यदेवता को प्रसन्न करने के उपाय
– इस दिन सूर्य देव के विभिन्न नाम तथा सूर्य मंत्रों का जप अवश्य करना चाहिए
– श्रद्धापूर्वक व्रत रखें.
– गंगा स्नान का विशेष महत्व है, जो जातक गंगा स्नान करने नहीं जा सकते वो घर पर ही नहाने के पानी में कुछ बूंदे गंगा जल डाल कर स्नान करें.
-सुबह सूर्य देव के उदय होते ही सूर्योपासना करें. ध्यान रखें जब तक सूर्य देव प्रत्यक्ष दिखाई न दें तब तक सूर्योपासना न करें.
– सूर्य मंत्रों का जाप करें.
इन मंत्रों का करें जाप
– ऊं घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
– ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा..
– ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:.
– ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ.
– ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः.
सूर्य को अर्घ्य देते समय पढ़ें यह मंत्र
– एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते. अनुकम्पय मां देवी गृहाणार्घ्यं दिवाकर.