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Myth or Truth in Hindu Beliefs। क्या सच में सांप गर्भवती महिलाओं को नहीं काटते?


Snake Bite & Pregnancy: भारतीय समाज में कुछ मान्यताएं ऐसी हैं, जो पीढ़ियों से बिना सवाल किए स्वीकार कर ली जाती हैं. गांव की चौपाल हो या दादी-नानी की कहानियां, एक बात अक्सर सुनने को मिलती है “सांप गर्भवती औरत को नहीं काटता.” सुनने में यह बात जितनी रहस्यमयी लगती है, उतनी ही गहराई से यह हमारी धार्मिक आस्था, लोक विश्वास और सांस्कृतिक सोच से जुड़ी हुई है. गर्भावस्था को सनातन परंपरा में केवल एक जैविक अवस्था नहीं, बल्कि सृष्टि की निरंतरता का प्रतीक माना गया है. वहीं सांप, जिसे आमतौर पर डर और विष से जोड़ा जाता है, हिंदू शास्त्रों में ‘नाग देवता’ के रूप में पूजनीय है. ऐसे में जब मातृत्व और नाग दोनों पवित्र माने जाएं, तो यह धारणा और मजबूत हो जाती है कि प्रकृति स्वयं गर्भवती स्त्री की रक्षा करती है. लेकिन क्या यह केवल विश्वास है या इसके पीछे कोई शास्त्रीय, ज्योतिषीय या व्यवहारिक आधार भी है? आइए, इस मान्यता को हर पहलू से समझने की कोशिश करते हैं.

धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं की जड़ें
हिंदू धर्मग्रंथों में नागों का विशेष स्थान है. भगवान विष्णु शेषनाग पर शयन करते हैं और भगवान शिव के गले में वासुकी नाग विराजमान हैं.

गर्भवती स्त्री: शक्ति का स्वरूप
देवी भागवत और अन्य पुराणों में गर्भवती स्त्री को साक्षात ‘शक्ति’ का रूप माना गया है. मान्यता है कि जिस स्त्री के भीतर सृजन की प्रक्रिया चल रही हो, उसे नुकसान पहुंचाना धर्म के विरुद्ध है. लोक विश्वास के अनुसार, नाग देवता उस गर्भस्थ आत्मा का सम्मान करते हैं और इसलिए हानि नहीं पहुंचाते.

ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?
ज्योतिष में सांपों का संबंध राहु और केतु से जोड़ा जाता है. कुंडली में कालसर्प दोष या सर्प दोष होने पर नाग पूजा का विधान इसी कारण बताया गया है.

सकारात्मक आभामंडल का सिद्धांत
कुछ ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि गर्भवती महिला के चारों ओर एक विशेष सकारात्मक ऊर्जा या ‘आभामंडल’ बन जाता है. यह ऊर्जा नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती है. यहां तक कहा जाता है कि शनि, राहु जैसे कठोर ग्रह भी मातृत्व की ऊर्जा के सामने प्रभावहीन हो जाते हैं.

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लोक कथाएं और ग्रामीण अनुभव
भारत के ग्रामीण इलाकों में इस विश्वास की जड़ें बेहद गहरी हैं. कई किसान और बुजुर्ग बताते हैं कि उन्होंने सांप को गर्भवती महिला के पास से बिना नुकसान पहुंचाए जाते देखा है.

“प्रकृति खुद रास्ता बदल लेती है”
कुछ समुदायों में यह कहा जाता है कि सांप गर्भस्थ शिशु की ‘जीवन ऊर्जा’ महसूस कर लेता है और खुद ही रास्ता बदल लेता है. यह पूरी तरह अनुभव और आस्था पर आधारित है, जिसे लोग प्रकृति का मौन नियम मानते हैं.

क्या सच में सांप गर्भवती महिलाओं को नहीं काटते?

विज्ञान की नजर से सच क्या है?
आस्था अपनी जगह है, लेकिन विज्ञान इस मान्यता की पुष्टि नहीं करता. सांप एक जंगली जीव है, जो खतरा महसूस होने पर किसी को भी काट सकता है चाहे वह गर्भवती हो या नहीं.

व्यवहार और प्रतिक्रिया का मामला
सांप की प्रतिक्रिया इंसान की अवस्था पर नहीं, बल्कि उसके व्यवहार, हलचल और खतरे की आशंका पर निर्भर करती है. इसलिए यह मान लेना कि गर्भवती महिला को सांप नहीं काटेगा, व्यावहारिक रूप से जोखिम भरा हो सकता है.

आस्था और सावधानी दोनों जरूरी
धार्मिक विश्वास हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए. लेकिन सुरक्षा को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है. अगर घर या आसपास सांप दिखे, तो दूरी बनाए रखें और विशेषज्ञों की मदद लें. मातृत्व की रक्षा आस्था से भी होती है और सतर्कता से भी.

(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

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