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अखिल भारतीय संत समिति ने मां शृंगार गौरी का विधि-विधान के साथ पूजन किया और ज्ञानवापी परिसर में राम कथा का आयोजन भी किया है. ये कथा अब आने वाले 9 दिनों तक चलने वाली है. बताया जाता है कि यह परंपरा करीब 100 साल से भी ज्यादा पुरानी है और आज तक यह परंपरा बिना किसी रोक टोक के कई गई है.
काशी विश्वनाथ धाम में आज धार्मिक आस्था का माहौल देखने को मिलेगा. दरअसल माघ मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठ तिथि से यानी आज नौ दिवसीय नवाह पारायण कथा शुभारंभ हो गया है, इससे 9 दिन तक चलने वाली इस कथा की शुरुआत मां शृंगार गौरी के पूजन के साथ हुआ. इस अवसर पर साधु-संतों की उपस्थिति में हर-हर महादेव के जयकार लगाए गए, जिससे पूरा धाम शिवमय हो गया. हर वर्ष बसंत पंचमी के बाद जब बाबा विश्वनाथ पर तिलक अर्पित किया जाता है, उसके अगले दिन मां शृंगार गौरी का पूजन करके 9 दिनों तक चलने वाली रामकथा का आयोजन किया जाता है. आइए जानते हैं इस मौके पर क्या क्या कार्यक्रम हुए…
100 साल से चली आ रही है परंपरा
ज्ञानवापी में व्यासजी के तहखाने की पश्चिमी दीवार स्थित हिस्से पर अखिल भारतीय संत समिति ने मां शृंगार गौरी का विधि-विधान से पूजन किया गया. मां गौरी के शृंगार पूजन की परंपरा काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में सौ वर्षों से अधिक से की जा रही है. हर साल की तरह इस साल भी पश्चिमी दीवार के पास परिसर में संपन्न कराया गया. संत समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी परिसर की तरफ मुंह किए बड़े नंदी महाराज का पूजन किया और मां गौरी के विग्रह का फूल और मालाओं के साथ पूजन किया. इसके साथ बाबा विश्वनाथ का जलाभिषेक कर मां की आरती उतारी गई.

काशी विश्वनाथ मंदिर को 7 बार तोड़ा गया
महामंत्री अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने बताया कि काशी विश्वनाथ मंदिर को 7 बार तोड़ा गया, लेकिन जब औरंगजेब के आदेश के बाद मंदिर को तोड़ा गया, तो काशी के वैदिक ब्राह्मणों ने तय किया कि भविष्य में क्या प्रमाण रहेगा कि हमारे मंदिर यहां थे? आने वाले समय में प्रमाण भी मिट जाएंगे. इसलिए उन्होंने शृंगार गौरी के मंदिर के अवशेष की पूजा-पाठ करनी शुरू की और काशी विश्वनाथ मंदिर में राम कथा सुनाने का निर्णय लिया.
मां शृंगार गौरी का विधिवत पूजन हुआ
उन्होंने आगे कहा कि 1965 तक हर साल कथा चलती रही और किसी ने रोका नहीं. आज तक इस कथा का निर्वाहन हो रहा है. आज मां शृंगार गौरी का विधिवत पूजन हुआ और बाबा काशी विश्वनाथ से प्रार्थना की गई है कि ज्ञानवापी का परिसर आततायियों से मुक्त हो.

यहां होता है पूजन
बता दें कि ज्ञानवापी परिसर की पश्चिमी दीवार पर लगे सिंदूर के निशान को मां शृंगार गौरी के रूप में पूजा जाता है, जहां दीवार पर एक लाल टीका लगा है. विवादित स्थल को लेकर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है. काशी की 4 महिलाओं ने मां शृंगार गौरी मंदिर में प्रतिदिन दर्शन की मांग करते हुए कोर्ट में याचिका डाली थी. अभी तक नवरात्रि के पहले ही दिन दर्शन करने का मौका मिलता है, वो भी चौखट के. मां शृंगार गौरी का मामला अभी कोर्ट में चल रहा है.
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पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें






