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Peepal Tree Ritual: हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ पर मटका लटकाना मृतक की आत्मा को शांति और तृप्ति देने का अनुष्ठान है. इसमें धार्मिक श्रद्धा और ज्योतिषीय मान्यता दोनों शामिल हैं. यह शनि देव को प्रसन्न करता है और परिवार को पितृ दोष से मुक्ति दिलाता है.
Peepal Tree Ritual: हिंदू धर्म में मृत्यु केवल शरीर की समाप्ति नहीं, बल्कि आत्मा की एक नई यात्रा की शुरुआत मानी जाती है. इस यात्रा में मृतक की आत्मा को शांति और सुख की प्राप्ति हो, इसके लिए परिवार और पंडित जी कई खास अनुष्ठान करते हैं. इनमें से एक अनोखी और अक्सर देखने में आने वाली परंपरा है -पीपल के पेड़ पर पानी से भरा मटका लटकाना. मटका केवल एक प्रतीक नहीं है, बल्कि इसमें गहरी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक मान्यता छिपी है. मृत्यु के समय आत्मा अपने कर्मों के हिसाब से अपने अगले जीवन की ओर बढ़ती है और इस दौरान वह भूख-प्यास से गुजरती है. पानी से भरा मटका आत्मा के लिए जैसे एक तृप्ति का साधन बनता है. वहीं, पीपल का पेड़ शनि ग्रह और त्रिदेवों का वास होने के कारण इसे विशेष पवित्र माना जाता है. इस आर्टिकल में हम जानेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से कि आखिर क्यों और कैसे पीपल के पेड़ पर मटका लटकाना परिवार और आत्मा दोनों के लिए लाभकारी माना जाता है.
धार्मिक और आध्यात्मिक मान्यता
धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो मृत्यु के बाद आत्मा कुछ समय तक भटकती है और उसे भूख-प्यास का अनुभव होता है. इसी स्थिति में पीपल के पेड़ पर टपकता पानी आत्मा को तृप्त करता है और उसकी प्यास मिटाता है. पौराणिक मान्यता है कि पीपल में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है. इसलिए मटका लटकाना एक तरह से मृतक को अंतिम यात्रा में आराम और शांति देने की कोशिश है.
यह मान्यता परिवार के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है. जब यह अनुष्ठान किया जाता है, तो परिवार के सदस्य महसूस करते हैं कि उन्होंने अपने प्रियजन की आत्मा की चिंता की और उसकी आत्मिक शांति के लिए कुछ किया.
ज्योतिषीय मान्यता
ज्योतिष के अनुसार, पीपल का पेड़ शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है. शनि देव कर्मों का हिसाब रखते हैं और मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा में उसका मार्ग तय करते हैं. पीपल पर पानी से भरा मटका लटकाने का अर्थ शनि देव को प्रसन्न करना है. यह संकेत देता है कि परिवार अपनी तरफ से पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मृतक की आत्मा की रक्षा और सुखद यात्रा के लिए समर्पित है. शनि देव की कृपा से आत्मा अपने कर्मों के अनुसार सही गति प्राप्त करती है और परिवार के सदस्य भी पितृ दोष से मुक्ति का लाभ पाते हैं.
केवल पीपल पर मटका क्यों लटकाया जाता है?
पीपल के पेड़ को अत्यंत पवित्र माना जाता है. इसे त्रिदेवों का वास स्थल कहा गया है. मटका लटकाने के पीछे यह विश्वास है कि पानी धीरे-धीरे टपकता है और यह मृतक की आत्मा को तृप्त करता है. परिवार की तरफ से यह एक भेंट है, ताकि आत्मा अपनी यात्रा सुखपूर्वक और बिना किसी कष्ट के पूरी कर सके. पीपल का पेड़ स्थिर और लंबी उम्र वाला होता है. इसे जीवन, स्थिरता और संरक्षण का प्रतीक माना जाता है. यही कारण है कि अन्य पेड़ों पर मटका नहीं लटकाया जाता. यह परंपरा न केवल मृतक की आत्मा के लिए बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक संतुलन और धार्मिक आस्था के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

अनुष्ठान का तरीका
मटका लटकाने के लिए पेड़ की शाखा से मटका बांधा जाता है. इसमें नीचे छोटा सा छेद किया जाता है ताकि पानी धीरे-धीरे टपकता रहे. यह बूंद-बूंद करके आत्मा की प्यास मिटाने का प्रतीक है. इस प्रक्रिया को करने वाले पंडित और परिवार के सदस्य इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ करते हैं.
पीपल पर मटका लटकाने की परंपरा केवल रीति-रिवाज नहीं है, बल्कि इसमें आत्मा की तृप्ति, शनि देव की कृपा और परिवार की श्रद्धा छिपी है. यह अनुष्ठान मृतक की आत्मा को शांति देता है और परिवार को मानसिक संतोष प्रदान करता है.
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मीडिया की दुनिया में मेरा सफर एक रेडियो जॉकी के रूप में शुरू हुआ था, जहां शब्दों की ताकत से श्रोताओं के दिलों तक पहुंच बनाना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि रही. माइक के पीछे की यह जादुई दुनिया ही थी जिसने मुझे इलेक्ट्र…और पढ़ें







