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Pitru Paksha 2024 Date: पितृ पक्ष की 16 तिथियों में कब किसका होता है तर्पण और श्राद्ध? मृत्यु तिथि नहीं पता तो क्या करें


हर साल पितृ पक्ष का प्रारंभ भाद्रपद माह​ के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से होता है. पितृ पक्ष के 15 से 16 दिनों में पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के समय में पितरों का निवास धरती पर होता है. जो पितर तृप्त या अतृप्त होते हैं, सब के लिए ही तर्पण, श्राद्ध आदि किए जाते हैं. जिन लोगों पर ​पितृ दोष होता है, वे भी पितृ पक्ष में उससे मुक्ति ​के उपाय कर सकते हैं. अपने नाराज पितरों को खुश कर सकते हैं. पितृ पक्ष में तर्पण, श्राद्ध आदि के लिए 16 तिथियां होती हैं. हर पितर की अपनी एक निश्चित तिथि होती है, उस तिथि पर उनके लिए तर्पण, श्राद्ध आदि करते हैं. जिनकी तिथि मालूम नहीं होती है, उनके लिए भी व्यवस्था है. वैेसे आप पितृ पक्ष में सभी दिन आप अपने पितर को तर्पण दे सकते हैं. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कि पितृ पक्ष कब से शुरू है? पितृ पक्ष की 16 तिथियां कब-कब हैं?

2024 में पितृ पक्ष कब से कब तक है?
इस साल पितृ पक्ष की शुरूआत 17 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा तिथि से हो रहा है. उस दिन श्राद्ध की पूर्णिमा तिथि होगी. पितृ पक्ष का समापन 2 अक्टूबर को सर्व पितृ अमावस्या यानी आश्विन अमावस्या के दिन होगा.

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पितृ पक्ष में किसका कब होता है श्राद्ध
पितृ पक्ष में भाद्रपद पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक 16 तिथियां होती हैं. जिस व्यक्ति का निधन जिस तिथि को हुआ होता है, उसका तर्पण, श्राद्ध आदि पितृ पक्ष की उसी तिथि पर होता है. जैसे किसी व्यक्ति का निधन सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ है, तो उस व्यक्ति के लिए तर्पण, श्राद्ध आदि पितृ पक्ष में श्राद्ध चतुर्थी तिथि को होगा.

जिसके निधन की तिथि न हो पता तो कैसे करें श्राद्ध?
यदि किसी भी व्यक्ति के निधन की तिथि पता न हो तो उस व्यक्ति के लिए भी पितृ पक्ष में व्यवस्था की गई है. यदि वह पुरुष है तो उसका श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान आदि सर्व पितृ अमावस्या के दिन करना चाहिए. यदि वह महिला है तो उसका श्राद्ध, तर्पण आदि मातृ नवमी यानी पितृ पक्ष में श्राद्ध की नवमी तिथि को करना चाहिए.

पितृ पक्ष 2024 श्राद्ध की 16 ति​थियां

पूर्णिमा श्राद्ध: 17 सितंबर, मंगलवार
भाद्रपद पूर्णिमा तिथि: 17 सितंबर को 11:44 ए एम से 18 सितंबर को 08:04 ए एम तक

प्रतिपदा श्राद्ध: 18 सितंबर, बुधवार
आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि: 18 सितंबर को 08:04 ए एम से 19 सितंबर को 04:19 ए एम तक

द्वितीया श्राद्ध: 19 सितंबर, गुरुवार
आश्विन कृष्ण द्वितीया तिथि: 19 सितंबर को 04:19 ए एम से 20 सितंबर को 12:39 ए एम तक

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तृतीया श्राद्ध: 20 सितंबर, शुक्रवार
आश्विन कृष्ण तृतीया तिथि: 20 सितंबर को 12:39 ए एम से 09:15 पी एम तक

चतुर्थी श्राद्ध, महाभरणी: 21 सितंबर, शनिवार
आश्विन कृष्ण चतुर्थी तिथि: 20 सितंबर को 09:15 पी एम से 21 सितंबर को 6:13 पी एम तक

पंचमी श्राद्ध: 22 सितंबर, रविवार
आश्विन कृष्ण पंचमी तिथि: 21 सितंबर को 6:13 पी एम से 22 सितंबर को 03:43 पी एम तक

षष्ठी श्राद्ध और सप्तमी श्राद्ध: 23 सितंबर, सोमवार
आश्विन कृष्ण षष्ठी तिथि: 22 सितंबर को 03:43 पी एम से 23 सितंबर को 01:50 पी एम तक

अष्टमी श्राद्ध: 24 सितंबर, मंगलवार
आश्विन कृष्ण सप्तमी तिथि: 23 सितंबर को 01:50 से 24 सितंबर को 12:38 पी एम तक
आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि: 24 सितंबर को 12:38 पी एम से 25 सितंबर को 12:10 पी एम तक

नवमी श्राद्ध, मातृ नवमी: 25 सितंबर, बुधवार
आश्विन कृष्ण नवमी तिथि: 25 सितंबर को 12:10 पी एम से 26 सितंबर को 12:25 पी एम तक

दशमी श्राद्ध: 26 सितंबर, गुरुवार
आश्विन कृष्ण दशमी तिथि: 26 सितंबर को 12:25 पी एम से 27 सितंबर को 01:20 पी एम तक

एकादशी श्राद्ध: 27 सितंबर, शुक्रवार
आश्विन कृष्ण एकादशी तिथि: 27 सितंबर को 01:20 पी एम से 28 सितंबर को 02:49 पी एम तक

द्वादशी श्राद्ध, मघा श्राद्ध: 29 सितंबर, रविवार
आश्विन कृष्ण द्वादशी तिथि: 28 सितंबर को 02:49 पी एम से 29 सितंबर को 04:47 पी एम तक

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त्रयोदशी श्राद्ध: 30 सितंबर, सोमवार
आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि: 29 सितंबर को 04:47 पी एम से 30 सितंबर को 07:06 पी एम तक

चतुर्दशी श्राद्ध: 1 अक्टूबर, मंगलवार
आश्विन कृष्ण चतुर्दशी तिथि: 30 सितंबर को 07:06 पी एम से 1 अक्टूबर को 09:39 पी एम तक

सर्व पितृ अमावस्या, अमावस्या श्राद्ध: 2 अक्टूबर, बुधवार
आश्विन कृष्ण अमावस्या तिथि: 1 अक्टूबर को 09:39 पी एम से 3 अक्टूबर को 12:18 ए एम तक

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