Thursday, February 5, 2026
31 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

Rahu Ketu Story। राहु केतु का प्रभाव


Rahu Ketu Effect: ज्योतिष का नाम सुनते ही कई लोगों के दिमाग में सबसे पहले जो दो नाम आते हैं, वो हैं राहु और केतु. इनका जिक्र होते ही कुछ लोग घबरा जाते हैं, तो कुछ इन्हें रहस्यमय ताकत मानते हैं. असल में राहु और केतु आम ग्रहों जैसे नहीं हैं, इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है. ये दिखते नहीं, लेकिन असर गहरा छोड़ते हैं. जिंदगी में अचानक बड़े बदलाव, तेज उछाल, गिरावट, मानसिक उलझन, आध्यात्मिक जागृति -इन सबके पीछे इन दोनों का रोल माना जाता है. कई बार इंसान को बिना उम्मीद के ऊंचाई पर पहुंचा देना और फिर अहंकार तोड़कर जमीन दिखा देना, ये राहु का तरीका माना जाता है. वहीं केतु दुनिया की चमक से दूर करके अंदर की दुनिया से मिलाता है. डरने की जगह इन्हें समझना ज्यादा जरूरी है, क्योंकि सही स्थिति में ये जिंदगी की दिशा ही बदल देते हैं. इस विषय में अधिक जानकारी दे रहे हैं भोपाल निवासी ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा.

राहु: अचानक ऊंचाई पर पहुंचाने वाला ग्रह
राहु को भौतिक सुख, नाम, शोहरत, राजनीति, मीडिया, विदेश, टेक्नोलॉजी और चालाक दिमाग से जोड़ा जाता है. जब राहु कुंडली में मजबूत होता है, तो इंसान भीड़ से अलग दिखता है. उसमें रिस्क लेने की हिम्मत होती है. ऐसे लोग सिस्टम को समझते भी हैं और जरूरत पड़े तो तोड़ना भी जानते हैं. कमजोर राहु उलझन, डर, भ्रम, लत, तनाव और घर के झगड़े बढ़ा सकता है, लेकिन मजबूत राहु इंसान को फर्श से अर्श तक ले जा सकता है. कई बड़े नेता, फिल्म स्टार और बिजनेस टाइकून की कुंडली में ताकतवर राहु देखा गया है. जब राहु सूर्य या चंद्रमा के साथ आता है, तो ग्रहण योग बनता है. इससे जीवन में उतार-चढ़ाव तेज हो जाते हैं. कभी अचानक फायदा, कभी बिना वजह रुकावट -यही राहु की चाल है.

केतु: दुनिया से हटाकर आत्मा से मिलाने वाला
केतु को मोक्ष का कारक कहा जाता है. ये भौतिक चीजों से मन हटाता है और इंसान को भीतर की सच्चाई से मिलाता है. जिनकी कुंडली में केतु मजबूत होता है, उनमें गजब की समझ, गहरी सोच और अंदर की आवाज सुनने की ताकत होती है. केतु तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में अच्छा असर देता है. ऐसे लोग दुश्मनों पर भारी पड़ते हैं. अचानक सम्मान और ऊंचा पद भी मिल सकता है. पर केतु की राह आसान नहीं होती. ये पहले छीनता है, फिर असली रास्ता दिखाता है. केतु भी सूर्य या चंद्रमा के साथ ग्रहण योग बनाता है, लेकिन इसका मकसद गिराना नहीं, जगाना होता है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

राहु-केतु की पौराणिक कहानी
कहानी समुद्र मंथन के समय की है. देव और असुर अमृत के लिए लड़ रहे थे. असुरों में एक चतुर दैत्य था -स्वरभानु. वो देवता बनकर चुपके से अमृत पीने बैठ गया. सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को बताया. विष्णु ने तुरंत सुदर्शन चक्र से उसका सिर काट दिया. मगर अमृत गले तक पहुंच चुका था, इसलिए वो मरा नहीं. उसका सिर राहु बना और धड़ केतु. सूर्य और चंद्रमा की चुगली से नाराज राहु-केतु उन्हें अपना दुश्मन मानते हैं. जब भी मौका मिलता है, वे उन्हें निगलने की कोशिश करते हैं -यही ग्रहण कहलाता है.

राहु-केतु के असर से क्या बदलता है?
-अचानक करियर में उछाल
-विदेश जाने के मौके
-राजनीति या मीडिया में पहचान
-मानसिक उलझन या गहरी आध्यात्मिक सोच
-पुरानी चीजों से मोह खत्म होना
-जिंदगी की दिशा बदल जाना

राहु-केतु को शांत करने के आसान उपाय
राहु के लिए
“ॐ रां राहवे नमः” मंत्र जपें.
शनिवार को काले तिल दान करें.

केतु के लिए
“ॐ कें केतवे नमः” मंत्र जपें.
कुत्तों को रोटी खिलाएं.

शिव पूजा
भगवान शिव की उपासना दोनों के नकारात्मक असर कम करने में मदद करती है.

Hot this week

साबूदाना खिचड़ी बनाने का आसान तरीका और परफेक्ट टिप्स व्रत के लिए.

साबूदाने की खिचड़ी व्रत के दिनों की सबसे...

Topics

उज्जैन-काशी में अलग-अलग तारीख! आखिर कब मनाई जाएगी होली? – Bharat.one हिंदी

homevideosHoli 2026: उज्जैन-काशी में अलग-अलग तारीख! आखिर कब...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img