Saturday, March 7, 2026
24 C
Surat
[tds_menu_login inline="yes" guest_tdicon="td-icon-profile" logout_tdicon="td-icon-log-out" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNiIsIm1hcmdpbi1ib3R0b20iOiIwIiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyNSIsImRpc3BsYXkiOiIifSwicG9ydHJhaXQiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiMiIsIm1hcmdpbi1sZWZ0IjoiMTYiLCJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBvcnRyYWl0X21heF93aWR0aCI6MTAxOCwicG9ydHJhaXRfbWluX3dpZHRoIjo3NjgsImxhbmRzY2FwZSI6eyJtYXJnaW4tcmlnaHQiOiI1IiwibWFyZ2luLWxlZnQiOiIyMCIsImRpc3BsYXkiOiIifSwibGFuZHNjYXBlX21heF93aWR0aCI6MTE0MCwibGFuZHNjYXBlX21pbl93aWR0aCI6MTAxOX0=" icon_color="#ffffff" icon_color_h="var(--dark-border)" toggle_txt_color="#ffffff" toggle_txt_color_h="var(--dark-border)" f_toggle_font_family="global-font-2_global" f_toggle_font_transform="uppercase" f_toggle_font_weight="500" f_toggle_font_size="13" f_toggle_font_line_height="1.2" f_toggle_font_spacing="0.2" ia_space="0" menu_offset_top="eyJhbGwiOiIxNCIsInBvcnRyYWl0IjoiMTIiLCJsYW5kc2NhcGUiOiIxMyJ9" menu_shadow_shadow_size="16" menu_shadow_shadow_color="rgba(10,0,0,0.16)" f_uh_font_family="global-font-1_global" f_links_font_family="global-font-1_global" f_uf_font_family="global-font-1_global" f_gh_font_family="global-font-1_global" f_btn1_font_family="global-font-1_global" f_btn2_font_family="global-font-1_global" menu_uh_color="var(--base-color-1)" menu_uh_border_color="var(--dark-border)" menu_ul_link_color="var(--base-color-1)" menu_ul_link_color_h="var(--accent-color-1)" menu_ul_sep_color="#ffffff" menu_uf_txt_color="var(--base-color-1)" menu_uf_txt_color_h="var(--accent-color-1)" menu_uf_border_color="var(--dark-border)" show_version="" icon_size="eyJhbGwiOjIwLCJwb3J0cmFpdCI6IjE4In0=" menu_gh_color="var(--base-color-1)" menu_gh_border_color="var(--dark-border)" menu_gc_btn1_color="#ffffff" menu_gc_btn1_color_h="#ffffff" menu_gc_btn1_bg_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn1_bg_color_h="var(--accent-color-2)" menu_gc_btn2_color="var(--accent-color-1)" menu_gc_btn2_color_h="var(--accent-color-2)" f_btn2_font_size="13" f_btn1_font_size="13" toggle_hide="yes" toggle_horiz_align="content-horiz-center" menu_horiz_align="content-horiz-center" f_uh_font_weight="eyJsYW5kc2NhcGUiOiI3MDAiLCJhbGwiOiI3MDAifQ==" f_gh_font_weight="700" show_menu="yes" avatar_size="eyJhbGwiOiIyMiIsImxhbmRzY2FwZSI6IjIxIiwicG9ydHJhaXQiOiIxOSJ9" page_0_title="My Articles" menu_ul_sep_space="0" page_0_url="#"]

shab e barat 2026 Today Dua and Ibadat know islamic significance of shab e barat and traditions | आज रात मांगी जाएगी गुनाहों की माफी, आखिर क्या है इसका महत्व और किन पंरपराओं का होता है पालन


Last Updated:

Shab e Barat 2026: आज शब-ए-बारात है और इस रात कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की मगफिरत के लिए दुआ करना एक आम परंपरा है. शब-ए-बारात केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन और सुधार का संदेश भी देती है. यह रात इंसान को अपने गुनाहों को स्वीकार कर उनसे तौबा करने, दूसरों को माफ करने और दिल से नफरत निकालने की सीख देती है. आइए जानते हैं शब-ए-बारात के बारे में खास बातें…

ख़बरें फटाफट

शब-ए-बारात को क्यों कहा जाता है माफी की रात? जानिए इस मुकद्दस रात का महत्व

Shab e Barat 2026 Today: आज शब-ए-बारात है और इस्लाम धर्म में शब-ए-बारात को एक बेहद पवित्र और खास रात माना जाता है. यह रात इबादत, तौबा (पश्चाताप), माफी और रहमत की रात कही जाती है. हर रात रात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने शाबान की 14वीं और 15वीं तारीख की दरम्यानी रात को मनाई जाती है. मुस्लिम समुदाय में इसे अल्लाह की रहमत, बरकत और गुनाहों से माफी की रात के रूप में देखा जाता है. इसी वजह से शब-ए-बारात को आमतौर पर माफी की रात भी कहा जाता है. इस रात कब्रिस्तानों में जाकर पूर्वजों की मगफिरत के लिए दुआ करना एक आम परंपरा है. इस रात लोग जागकर नफ़्ल नमाजें पढ़ते हैं, कुरआन की तिलावत करते हैं और अल्लाह की जिक्र में मशगूल रहते हैं.

क्या है शब-ए-बारात का अर्थ?
‘शब’ का अर्थ है रात और ‘बारात’ का मतलब है निजात या मुक्ति यानी शब-ए-बारात का शाब्दिक अर्थ हुआ गुनाहों से माफी की रात. मान्यता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों की दुआएं कुबूल करता है और सच्चे दिल से मांगी गई माफी को स्वीकार करता है. 3 तारीख की रात में मुस्लिम समुदाय के लोग गुनाहों से माफी मांगेगे और 4 तारीख को रोजा रखेंगे.

माफी की रात क्यों कहलाती है शब-ए-बारात
इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, शब-ए-बारात की रात अल्लाह अपनी रहमत के दरवाजे खोल देता है. हदीसों में जानकारी मिलता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों के गुनाह माफ करता है, सिवाय उनके जो शिर्क (अल्लाह के अलावा किसी और को पूजनीय मानना) या दिल में द्वेष और नफरत रखते हैं. इसी कारण मुसलमान इस रात अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं, बीते हुए समय की गलतियों पर तौबा करते हैं और बेहतर इंसान बनने का संकल्प लेते हैं.

namaz-juma

शब-ए-बारात की रात क्या होता है?
शब-ए-बारात की रात आने वाले एक साल का लेखा-जोखा तय किया जाता है. लोगों की रिज़्क (रोज़ी), उम्र, स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी घटनाओं का फैसला इसी रात लिखा जाता है. यही वजह है कि लोग पूरी रात इबादत में बिताते हैं और अपने व परिवार के लिए दुआ करते हैं. शब-ए-बारात की रात मुसलमान नफ्ल नमाज अदा करते हैं, कुरान की तिलावत करते हैं और अल्लाह का जिक्र करते हैं. कई लोग पूरी रात जागकर इबादत करते हैं. इस रात के अगले दिन रोजा रखने की भी परंपरा है, जिसे सवाब का काम माना जाता है.

कब्रिस्तान जाने की परंपरा
शब-ए-बारात पर कब्रिस्तान जाकर अपने मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआ करने की भी परंपरा है. माना जाता है कि इस रात मृत आत्माओं के लिए दुआएं खास तौर पर कुबूल होती हैं. लोग फातिहा पढ़ते हैं और अल्लाह से उनके गुनाहों की माफी की दुआ करते हैं.

क्यों खास है शब-ए-बारात की रात
शब-ए-बारात इंसान को यह एहसास दिलाती है कि जीवन क्षणभंगुर है और हर किसी को अपने कर्मों का हिसाब देना है. यह रात उम्मीद की रात है, जहां गुनाहगार भी अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होता. शब-ए-बारात को माफी की रात इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अल्लाह की रहमत, क्षमा और दया का प्रतीक है. यह रात इंसान को अपने अतीत की गलतियों से सीख लेकर एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ने का अवसर देती है. इसी भावना के साथ मुस्लिम समुदाय इस पवित्र रात को इबादत और दुआ में बिताता है.

About the Author

authorimg

Parag Sharma

पराग शर्मा एक अनुभवी धर्म एवं ज्योतिष पत्रकार हैं, जिन्हें भारतीय धार्मिक परंपराओं, ज्योतिष शास्त्र, मेदनी ज्योतिष, वैदिक शास्त्रों और ज्योतिषीय विज्ञान पर गहन अध्ययन और लेखन का 12+ वर्षों का व्यावहारिक अनुभव ह…और पढ़ें

homedharm

शब-ए-बारात को क्यों कहा जाता है माफी की रात? जानिए इस मुकद्दस रात का महत्व



Hot this week

Kandariya Mahadeva Temple This Khajuraho temple is made of over 800 sculptures and large stones | 800 से ज्यादा मूर्तियां और बड़े पत्थरों को...

होमफोटोधर्म800 से ज्यादा मूर्तियां और पत्थरों को काटकर...

किचन में नया ट्रेंड! राइस पेपर शीट्स से बनाएं हेल्दी और कुरकुरे स्नैक्स, जानें आसान टिप्स

होमफोटोलाइफ़फूडमैदे का हेल्दी विकल्प है राइस पेपर शीट्स,...

Topics

Kandariya Mahadeva Temple This Khajuraho temple is made of over 800 sculptures and large stones | 800 से ज्यादा मूर्तियां और बड़े पत्थरों को...

होमफोटोधर्म800 से ज्यादा मूर्तियां और पत्थरों को काटकर...

किचन में नया ट्रेंड! राइस पेपर शीट्स से बनाएं हेल्दी और कुरकुरे स्नैक्स, जानें आसान टिप्स

होमफोटोलाइफ़फूडमैदे का हेल्दी विकल्प है राइस पेपर शीट्स,...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img