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Shani Gochar: 2026 का साल ज्योतिष की दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है. वजह है न्याय के देवता शनि का अपनी नीच राशि मेष में गोचर. शनि का नाम सुनते ही लोग थोड़ा ठहर जाते हैं, क्योंकि यह ग्रह मेहनत, धैर्य और कर्म का सीधा हिसाब देता है. ऐसे में जब शनि मेष जैसी उग्र और जल्दबाजी वाली राशि में प्रवेश करते हैं, तो असर भी गहरा और सीधा होता है. इस गोचर का प्रभाव हर राशि पर किसी न किसी रूप में पड़ेगा, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार चार राशियों को इस दौरान खास सतर्कता बरतने की जरूरत होगी. आइए विस्तार से जानते हैं कि शनि गोचर 2026 किन राशियों के लिए चेतावनी लेकर आ रहा है और क्यों जरूरी है “फूंक-फूंककर कदम रखना”.

शनि गोचर 2026 का ज्योतिषीय महत्व शनि को कर्मफल दाता कहा जाता है. यह ग्रह तुरंत परिणाम नहीं देता, लेकिन जो देता है, स्थायी होता है. मेष राशि मंगल की है, और मंगल-शनि का स्वभाव एक-दूसरे से बिल्कुल उलट माना जाता है. यही कारण है कि मेष में शनि का गोचर असहज परिस्थितियां पैदा कर सकता है. इस दौरान जल्दबाजी, गुस्सा और गलत फैसले नुकसान पहुंचा सकते हैं.

मेष राशि: आत्मविश्वास नहीं, धैर्य होगा असली ताकत शनि इसी राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए सबसे सीधा असर मेष जातकों पर पड़ेगा. व्यक्तित्व और स्वास्थ्य पर असर प्रथम भाव में स्थित शनि आत्मविश्वास को कम कर सकता है. कई मेष राशि वाले खुद को लेकर असमंजस में रह सकते हैं. रियल लाइफ उदाहरण की बात करें तो जो लोग बिना सोचे-समझे फैसले लेने के आदी हैं, उन्हें यहां रुककर सोचना सीखना होगा. सेहत को लेकर लापरवाही भारी पड़ सकती है, खासकर नींद और तनाव से जुड़ी समस्याएं.

कर्क राशि: कामकाज में शांति सबसे बड़ा हथियार कर्क राशि के लिए यह गोचर थोड़ा भावनात्मक उतार-चढ़ाव लेकर आ सकता है. करियर और मानसिक दबाव शनि की दृष्टि आपके कर्म स्थान पर पड़ रही है. ऑफिस की राजनीति, बॉस से मतभेद या जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ सकता है. यह समय प्रतिक्रिया देने का नहीं, बल्कि स्थिति को समझकर शांत रहने का है. जो लोग विवाद से दूर रहेंगे, वही लंबे समय में फायदे में रहेंगे.
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तुला राशि: व्यापार और रिश्तों में संतुलन जरूरी तुला राशि वालों के लिए शनि सप्तम भाव को प्रभावित करेंगे. साझेदारी और वैवाहिक जीवन व्यापार में पार्टनरशिप कर रहे लोगों को कागजी काम और लेन-देन में खास सावधानी रखनी होगी. घर की बात करें तो जीवनसाथी के साथ छोटी बातें भी बड़ा मुद्दा बन सकती हैं. यहां “सुनना” बोलने से ज्यादा फायदेमंद साबित होगा.

मकर राशि: अपनों से दूरी न बनने दें मकर राशि के स्वामी स्वयं शनि हैं, लेकिन नीच राशि में होने के कारण असर महसूस होगा. मानसिक शांति और पारिवारिक माहौल चौथे भाव पर प्रभाव के कारण घर का माहौल थोड़ा भारी रह सकता है. मां के स्वास्थ्य या पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर चिंता बढ़ सकती है. पुराने विवादों को कुरेदने के बजाय, उन्हें सुलझाने का यही सही समय है.

क्या करें और क्या न करें -जल्दबाजी में फैसले न लें -स्वास्थ्य और दिनचर्या पर ध्यान दें -विवादों से दूरी बनाकर रखें -अनुभवी लोगों की सलाह को नजरअंदाज न करें







