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आपने देखा होगा कि घर के मंदिर में सभी देवी देवताओं की पूजा की जाती है लेकिन शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर नहीं होती है. बताया जाता है कि इसके पीछे एक श्राप है. आइए जानते हैं घर में शनिदेव की मूर्तियां या तस्वीरें क्यों नहीं होती हैं. पौराणिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, घर में शनिदेव की मूर्ति रखने से अपशकुन, कलह, आर्थिक नुकसान और परिवार में मानसिक तनाव बढ़ सकता है.

हिंदू परंपरा में, घर में भगवान का कमरा स्थापित करना और प्रतिदिन पूजा-अर्चना करना बहुत शुभ माना जाता है. माना जाता है कि घर के मंदिर में विष्णु, शिव, लक्ष्मी और गणेश जैसे देवताओं की मूर्तियां या चित्र रखने से मानसिक शांति मिलती है. हालांकि, इस परंपरा में भगवान शनि के मामले में एक विशेष नियम है. शास्त्रों और पुराणों में बताया गया है कि शनिदेवी की मूर्ति, तस्वीर या यंत्र नहीं रखना चाहिए, ऐसा करना अशुभ माना जाता है. बताया जाता है कि शनिदेव की मूर्ति, तस्वरी या यंत्र का घर में होने के पीछे एक श्राप है. हालांकि आप घर में शनिदेव की आरती, मंत्र जप कर सकते हैं लेकिन घर में उनकी मूर्ति रखना पूरी तरह वर्जित है, आइए जानते हैं इसके पीछे के कारण…

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शनि, भगवान कृष्ण के परम भक्त थे. एक बार उनकी पत्नी ध्यान और भक्ति में लीन भगवान शनि के पास आईं. कहा जाता है कि जब भगवान शनि ने उनके सभी प्रयासों के बावजूद उन्हें अनदेखा किया, तो वह क्रोधित हो गईं और उन्हें कठोर श्राप दिया. पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने श्राप दिया कि जो भी उन्हें देखेगा, उसे जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा. कहा जाता है कि तब से भगवान शनि के दर्शन भय का स्रोत माने जाते हैं और शनिदेव की दृष्टि सीधे तौर पर हम पर ना पड़े, घर में उनकी तस्वीर या मूर्ति को रखना सही नहीं माना जाता.

माना जाता है कि इस श्राप के कारण, जिस व्यक्ति या स्थान पर शनिदेव की दृष्टि पड़ती है, उसके जीवन में विपत्तियां आने लगती हैं. अगर घर में शनिदेव की मूर्ति या चित्र रखा हो तो उनकी दृष्टि परिवार के सदस्यों पर पड़ सकती है. ज्योतिषीय और धार्मिक मान्यताएं कहती हैं कि इससे अप्रत्याशित समस्याएं, बीमारियां और अपशकुन आ सकते हैं. शनि की सीधी दृष्टि अगर किसी घर पर पड़े तो बचत का अपव्यय, कर्ज में वृद्धि और व्यापार में हानि जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं. इसी कारण यह आशंका रहती है कि उस घर में लक्ष्मी स्थिर नहीं रहेंगी. इसीलिए जो लोग धन और शांति चाहते हैं, वे घर में शनि की मूर्ति रखने से बचते हैं.
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वैसे कुछ लोग घर में शनि यंत्र रखते हैं. शनि यंत्र को घर में रहने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है और परेशानियों से भी राहत मिलती है. लेकिन इस ज्योतिषाचार्यों और पंडितों की पूजा और विधिपूर्वक प्राण-प्रतिष्ठा के बाद ही घर में रखा जा सकता है. शनि यंत्र को हमेशा शनिवार के दिन उत्तर या फिर पश्चिम दिशा में रखा जाता है.

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में रखी जाने वाली मूर्तियां शांति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतिबिंब होनी चाहिए. चूंकि भगवान शनि को भयानक रूप और कठोर शक्ति वाला माना जाता है, इसलिए कहा जाता है कि घर का वातावरण उस ऊर्जा को संतुलित नहीं करता है, माना जाता है कि इससे वास्तु दोष बढ़ता है. इसलिए, मंदिरों में भगवान शनि के दर्शन करना शुभ होता है, लेकिन उनकी मूर्ति घर में ना रखना बेहतर है.







