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Shukra Pradosh Vrat: शास्त्रों के अनुसार, जब प्रदोष व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तब यह शुक्र प्रदोष व्रत कहलाया जाता है. यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है. प्रदोष व्रत में पूजा शाम के समय या…और पढ़ें
दरअसल, एक महीने में 2 बार प्रदोष व्रत होते हैं. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही, विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से सितंबर के महीने में अंतिम प्रदोष व्रत कब आ रहा है.
आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 सितंबर को देर रात 11 बजकर 24 मिनट पर शुरू होगी. वहीं, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समापन 19 सितंबर को देर रात 11 बजकर 36 मिनट पर होगा. त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है. इसके लिए 19 सितंबर को आश्विन माह का पहला प्रदोष व्रत मनाया जाएगा.
प्रदोष व्रत पर कई शुभ योग
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर सिद्ध और साध्य संयोग बन रहा है. इसके साथ ही प्रदोष व्रत पर अभिजीत मुहूर्त का भी संयोग है.इन योग में भगवान शिव की पूजा करने से साधक की मनचाही मुराद पूरी होगी. साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि होगा.
शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्रवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके साथ ही जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. वहीं खासतौर पर इस व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखती हैं.

Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 6 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.







