सोमवती अमावस्या का पावन पर्व किसी भी माह की उस अमावस्या तिथि को होता है, जब उस दिन सोमवार होता है. सोमवार की अमावस्या को ही सोमवती अमावस्या या सोमवारी अमावस्या कहते हैं. सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं. उनकी कृपा से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने के बाद दान करते हैं. इससे पुण्य की प्राप्ति होती है. केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय पुरी के ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र से जानते हैं कि साल की अंतिम सोमवती अमावस्या कब है? सोमवती अमावस्या पर पूजा मुहूर्त और स्नान-दान का शुभ समय क्या है?
सोमवती अमावस्या तारीख 2024
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस साल की अंतिम सोमवती अमावस्या पौष माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को है. पौष अमावस्या तिथि का प्रारंभ 30 दिसंबर को प्रात: 4 बजकर 1 मिनट से होगा. इस तिथि का समापन 31 दिसंबर को तड़के 3 बजकर 56 मिनट पर होगा. उदयातिथि के आधार पर साल 2024 की अंतिम सोमवती अमावस्या 30 दिसंबर सोवमार को है.
सोमवती अमावस्या स्नान-दान मुहूर्त 2024
30 दिसंबर को सोमवती अमावस्या का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 05:24 ए एम से 06:19 ए एम है. यह समय स्नान के लिए उत्तम माना जाता है. इसके अलावा आप सूर्योदय के समय भी स्नान कर सकते हैं. स्नान के बाद दान करने का विधान है. सोमवती अमावस्या पर पूरे दिन वृद्धि योग है, ऐसे में अपनी सुविधानुसार भी स्नान-दान कर सकते हैं.
सोमवती अमावस्या पूजा मुहूर्त 2024
सोमवती अमावस्या के अवसर पर सुहागन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं. इस दिन वृद्धि योग बना है, लेकिन शिव पूजा के लिए पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती है. ऐसे में आप स्नान-दान के बाद सोमवती अमावस्या की पूजा कर सकते हैं. इस दिन का शुभ मुहूर्त या अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 03 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक है.
2 शुभ योग में सोमवती अमावस्या 2024
सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग प्रात:काल से लेकर रात 8 बजकर 32 मिनट तक है. उसके बाद से ध्रुव योग है. इस दिन मूल नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 11 बजकर 57 मिनट तक है. उसके बाद से पूर्वाषाढा नक्षत्र है.
सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवती अमावस्या को व्रत रखते हैं और शिव पूजा करते हैं. यह व्रत सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए रखती हैं. सोमवती अमावस्या के अवसर पर आप पितृ दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध, पिंडदान, तर्पण आदि कर सकते हैं. इससे पितर खुश होकर आशीर्वाद देते हैं. इस स्नान और दान से पाप मिटते हैं और अक्षय पुण्य मिलता है.
FIRST PUBLISHED : December 4, 2024, 09:06 IST
