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Sundarkand Path: कलयुग में हनुमान जी को जागृत देवता माना जाता है. माना जाता है कि रोजाना सुंदरकांड का पाठ करने से हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. ऐसे में सुंदरकांड की कुछ चौपाई का खास महत्व है. आइए जानते हैं
दरअसल रामचरितमानस के सुंदरकांड में कई ऐसे छंद हैं, जिसका जाप करने से हनुमान जी महाराज की शक्ति और प्रभु राम की भक्ति का एहसास होता है. रामचरितमानस के सुंदरकांड में एक छंद है. कनक कोट बिचित्र मनि कृत सुंदरायतना घना, चउहट्ट हट्ट सुबट्ट बीथीं चारु पुर बहु बिधि बना,
गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथिन्ह को गनै, बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै’. इस छंद में लंका की सुंदरता और राक्षसों की सेना का वर्णन किया गया है, जिसके बारे में शशिकांत दास विस्तार से बताते हैं.
गज बाजि खच्चर निकर पदचर रथ बरूथिन्ह को गनै, बहुरूप निसिचर जूथ अतिबल सेन बरनत नहिं बनै…अर्थात लंका में हाथी घोड़े खच्चर और रथ की सेना बहुत अधिक है. जिसकी गणना करना बहुत मुश्किल होता है. राक्षसों की सेना बहुत ही शक्तिशाली और विविध रूप वाली होती है. जिसका वर्णन करना असंभव था.
शशिकांत दास बताते हैं कि सुंदरकांड का यह छंद बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. जिससे लंका की सुंदरता लंका की सेना की शक्ति के बारे में पता चलता है. अगर आप भी शनिवार और मंगलवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करते हैं, तो ऐसा करने से जीवन की तमाम परेशानियां दूर होती है. जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.






