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न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ ली थी. जोहरान के शपथ लेने के बाद भारत में साधु-संतों ने एक अलग बहस छेड़ दी है. साधु संतों ने कहा कि भारत में भी गीता-रामायण पर हाथ रख शपथ दिलवानी चाहिए. यही हमारी भारतीय संस्कृति है.
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी द्वारा कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने के बाद भारत में शपथ परंपरा को लेकर चर्चा तेज हो गई है. इस मुद्दे पर देश के कई संत-महंतों ने अपनी राय रखते हुए भारत में भगवद्गीता और रामायण पर हाथ रखकर शपथ लेने की मांग की है. साधु-संतों ने कहा है कि हमारे देश में गीता रामायण से बड़ा कोई नहीं है, उन पर हाथ रखकर शपथ दिलाने से नेता भी अच्छा काम करेंगे. बता दें कि जब पूरा विश्व नए साल का स्वागत कर रहा था, उस दिन न्यूयॉर्क में डेमोक्रेट जोहरान ममदानी ने पहले मुस्लिम मेयर के रूप में शपथ ली. शपथ के दौरान उन्होंने कुरान की दो प्रतियों पर हाथ रखकर शपथ ली थी.
मथुरा में शंकराचार्य अधोक्षजानंद देव
मथुरा में शंकराचार्य अधोक्षजानंद देव ने कहा कि भारत में शपथ भगवद्गीता पर ली जानी चाहिए. भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म दुनिया की सबसे प्राचीन व्यवस्था है. जो जिस धर्म को मानता है, उसे उसी धर्मग्रंथ पर निष्ठा होती है और उसी पर शपथ लेना स्वाभाविक है. भारत में धर्मग्रंथों के नाम पर शपथ लेना सत्य, निष्ठा और न्याय का प्रतीक माना जाता है. यहां गीता और वेद पर शपथ लेने की परंपरा शुरू होनी चाहिए.
जगत गुरु परमहंस आचार्य
जगत गुरु परमहंस आचार्य ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि भारत में यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि ग्राम प्रधान से लेकर प्रधानमंत्री तक, सभी जनप्रतिनिधि शपथ लेते समय रामायण और गीता पर हाथ रखें. उन्होंने कहा कि जब महात्मा गांधी का निधन हुआ तो उनके मुख से ‘हे राम’ निकला, जिसे सभी राजनीतिक दल स्वीकार करते हैं. ऐसे में प्रभु श्रीराम को राष्ट्र देवता घोषित किया जाना चाहिए. जगत गुरु परमहंस आचार्य ने आगे कहा कि रामायण और गीता पर शपथ लेने की परंपरा शुरू होने से भारतीय संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में लहराएगा. उन्होंने यह भी कहा कि वैदिक संस्कृति ही भारतीय संस्कृति है, जिसका संपूर्ण दर्शन रामायण और गीता में मिलता है.
मथुरा महंत सीताराम दास
मथुरा के ही महंत सीताराम दास ने भी मांग की कि भारत में जनप्रतिनिधियों को रामायण और गीता पर हाथ रखकर शपथ लेनी चाहिए. वहीं विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के सदस्य शरद शर्मा ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता को संविधान में भी शामिल किया जाना चाहिए और शपथ का आधार गीता को बनाया जाना चाहिए.
जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज
उधर वाराणसी में जगद्गुरु बालक देवाचार्य महाराज ने इस पूरे मुद्दे पर अलग दृष्टिकोण रखा. उन्होंने कहा कि असली सवाल यह नहीं है कि शपथ किस ग्रंथ पर ली जा रही है, बल्कि यह है कि व्यक्ति की आस्था कितनी मजबूत है. अगर कोई गलत काम करना चाहता है तो वह किसी की सहमति के बिना भी करेगा. वहीं जो व्यक्ति ईमानदारी से जीवन जीना चाहता है, वह बिना किसी दबाव के भी सत्य के मार्ग पर चलता है.
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मैं धार्मिक विषय, ग्रह-नक्षत्र, ज्योतिष उपाय पर 8 साल से भी अधिक समय से काम कर रहा हूं। वेद पुराण, वैदिक ज्योतिष, मेदनी ज्योतिष, राशिफल, टैरो और आर्थिक करियर राशिफल पर गहराई से अध्ययन किया है और अपने ज्ञान से प…और पढ़ें







