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Ballia News: बलिया में स्थित जियुत ब्रह्म बाबा का मंदिर काफी चमत्कारिक है. कहा जाता है कि यहां अगर कोई ट्रेन धीमी गति से नहीं चलती तो उसके साथ दुर्घटना हो जाती है. यहां की कहानी भी काफी चमत्कारी और रहस्यमय है.
बलिया: एक ऐसा चमत्कारिक स्थान, जो आज भी लोगों के लिए न केवल आस्था का प्रतीक बना हुआ है, बल्कि एक अनोखी रहस्यमयी गाथा बन चुका है. जनपद बलिया के रघुनाथपुर पीपरपाती गांव में स्थित इस अद्भुत स्थान के बारे में सुनकर लोग आज भी आश्चर्यचकित रह जाते हैं. हम बात कर रहे हैं जियुत ब्रह्म बाबा की, जिनका स्थान न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का बड़ा केंद्र है, बल्कि रेलवे विभाग ने भी उनके चमत्कार को मान्यता दी है. कथानकों के अनुसार, इस बाबा की कृपा के आगे अंग्रेजों का भी घमंड चकनाचूर हो गया था.
स्थानीय बुजुर्ग और जियुत ब्रह्म बाबा के इतिहास के जानकार दत्तात्रेय तिवारी के अनुसार, अंग्रेजों के जमाने में रेलवे लाइन बनाने के दौरान एक पोखरा रास्ते में पड़ रहा था. जब भी मजदूर उस पोखरे में मिट्टी डालकर उसे पाटने की कोशिश करते, मिट्टी रहस्यमय तरीके से वापस पोखरे में ही आ जाती थी. कई बार प्रयास किए गए, लेकिन हर बार वही नतीजा रहा. तब ग्रामीणों ने कहा कि यह स्थान जियुत ब्रह्म बाबा का है और उनकी इच्छा के बिना यहां कोई काम नहीं हो सकता हैं.
रेलवे विभाग ने बनवाया मंदिर
बताया जाता है कि रेलवे अधिकारियों ने इसे चमत्कार मानते हुए बाबा की भव्य पूजा-अर्चना कराई थी. इसके बाद रेलवे लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो सका. इसके अलावा, लाइन बनने के बाद रेलवे विभाग ने बाबा के स्थान के बगल में एक मंदिर भी बनवाया और तब से हर वर्ष रेलवे कर्मियों की ओर से विशेष पूजा और कीर्तन कराया जाता है. यह इसी गांव के रहने वाले थे, जो किन्हीं परिस्थितियों में अपना प्राण त्यागकर ब्रह्म बन गए थे.
बात अगर ग्रामीणों की करें तो कृष्णकांत पांडेय ने कहा कि मंदिर के सामने से गुजरने वाली हर ट्रेन अपने आप धीमी हो जाती है. चाहे ट्रेन की गति कितनी भी तेज क्यों न हो, बाबा के स्थान के पास आते ही स्पीड तुरंत घट जाती है. ग्रामीणों का दावा है कि जो ट्रेन धीमी नहीं होती, उसके साथ कुछ न कुछ अनहोनी जरूर हो जाती हैं.
मालगाड़ी के साथ हो चुकी है दुर्घटना
ग्रामीण सुनील चतुर्वेदी ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वर्षों पहले लोको पायलट ने गति कम नहीं की, जिसके चलते मालगाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी. रेलवे लाइन के नीचे की मिट्टी धंस गई और कई बार भरने के बावजूद दोबारा गड्ढा बन जाता था. जब दोबारा पूजा-अर्चना की गई तो पटरी स्थिर हो गई और काम आसानी से पूरा हो गया.
लोगों के अनुसार, जियुत ब्रह्म बाबा के दरबार में शीश झुकाने वाले हर श्रद्धालुओं की मुरादें पूरी होती हैं. जिसकी इच्छा पूरी होती है, वह बाबा के दरबार में भव्य पूजा पाठ करवाता है. आज भी यहां दूर-दूर से लोग अपनी आस्था लेकर आते हैं और रेलवे विभाग भी बाबा की कृपा को मानकर आगे बढ़ता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Bharat.one से जुड़ गए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Bharat.one व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.







