Vastu for Lung Health : फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां अक्सर मौसम, खान-पान, कमजोर प्रतिरोध क्षमता या संक्रमण की वजह से होती हैं, लेकिन प्राचीन भारतीय वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की दिशाओं में बनी ऊर्जा भी हमारे श्वसन तंत्र पर गहरा असर डालती है. कई मामलों में देखा गया है कि घर का सही संतुलन बिगड़ने पर व्यक्ति बार-बार छाती के इंफेक्शन, सांस फूलना, एलर्जी या TB जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बनने लगता है. वास्तु के अनुसार हर दिशा शरीर के अलग-अलग हिस्सों और ऊर्जा प्रवाह को प्रभावित करती है. जब किसी खास दिशा में गंदगी, बंद हवा, भारी सामान या गलत निर्माण होता है, तब वहां की ऊर्जा रुकने लगती है और इसका सीधा असर फेफड़ों की क्षमता पर पड़ता है.
इस आर्टकल में हम समझेंगे भोपाल निवासी ज्योतिषी, वास्तु विशेषज्ञ एवं न्यूमेरोलॉजिस्ट हिमाचल सिंह कि कौन-सी दिशा में बने दोष TB के प्रमुख कारण माने जाते हैं, क्यों उत्तर-पूर्व यानी ईशान दिशा फेफड़ों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है, और कैसे रोशनी, हवा और जगह का सही उपयोग हमारे श्वसन तंत्र को मजबूत बना सकता है. साथ ही, यहां कुछ बेहद सरल और प्रभावी उपाय दिए गए हैं जो घर की ऊर्जा को संतुलित कर फेफड़ों के स्वास्थ्य में सुधार ला सकते हैं. अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से खांसी, कमजोरी या सांस से जुड़ी परेशानी झेल रहा है तो वास्तु के इन बिंदुओं की जांच करना काफी लाभदायक होता है.
North-East (Ishan) दोष – TB का सबसे बड़ा कारण
ईशान कोण को ऊर्जा, साफ हवा और सकारात्मक जल तत्व का क्षेत्र माना जाता है. यहां का संतुलन बिगड़ते ही शरीर की प्राण शक्ति कमजोर होने लगती है. अगर इस दिशा में टॉयलेट, बाथरूम, स्टोर रूम, कचरा, कब्ज़ा या भारी सामान रखा हो तो घर की ऊर्जा नीचे गिरती है.
ऐसी स्थिति में:
-शरीर की ऊर्जा कम होती है
-श्वसन तंत्र कमजोर पड़ता है
-TB, अस्थमा, एलर्जी और लंबे समय तक चलने वाले छाती इंफेक्शन का जोखिम बढ़ जाता है
TB के वास्तु में सबसे बड़ा कारण : North-East का ब्लॉक होना या टॉयलेट का होना
North (Uttar) दोष – immune system को कमज़ोर करता है
उत्तर दिशा शरीर के रक्त संचार और इम्यून पावर से जुड़ी मानी जाती है. यहां की हवा और हल्कापन शरीर को मजबूत बनाए रखते हैं. अगर यह दिशा बंद हो, यहां रोशनी न आती हो, खिड़कियां हमेशा बंद रहती हों या कचरा जमा हो, तो शरीर की रोग से लड़ने की क्षमता घटने लगती है.
इसके परिणाम:
-इम्यून सिस्टम कमजोर होता है
-TB जैसे संक्रमण तेजी से हमला करते हैं
East (Purab) रोशनी की कमी – vitamin D की कमी का बड़ा कारण
पूर्व दिशा सूर्य का प्रवेश द्वार मानी जाती है. सुबह की रोशनी शरीर को ऊर्जा देती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है. अगर इस दिशा में अंधेरा हो, बालकनी या खिड़कियां बंद हों, स्टोर रूम बना हो या भारी सामान रखा हो, तो प्राकृतिक रोशनी अंदर नहीं पहुँचती.
इसका प्रभाव:
-शरीर में विटामिन D कम होता है
-सांस की समस्याएं बढ़ती हैं
-फेफड़ों की क्षमता कमजोर होती है
South-West me bedroom ठीक हो लेकिन ventilation कम हो
दक्षिण-पश्चिम bedroom के लिए अच्छा माना जाता है, लेकिन अगर इस कमरे में हवा का निकास कम हो या बिल्कुल न हो तो संक्रमण जल्दी जम जाता है. बंद कमरा TB को फैलने का मौका देता है और फेफड़ों में इंफेक्शन लंबे समय तक बना रहता है.
टीबी का वास्तु और ज्योतिष उपाय
ज्योतिष में TB के योग इन स्थितियों से बनते हैं:
-कमजोर सूर्य
-कमजोर मंगल
-राहु का प्रभाव
-कर्क, कन्या या मीन राशि में रोग संकेत
-चौथे भाव (lungs) में अशुभ ग्रह
अगर वास्तु दोष पहले से मौजूद हो, और ज्योतिष में यह योग भी हों, तो रोग तेजी से पकड़ लेता है.
फेफड़े और टीबी के वास्तु उपाय
1. नॉर्थ-ईस्ट को हमेशा साफ रखें
-यहां से भारी सामान हटाओ
-हल्का पीला बल्ब या दीपक जलाओ
-सुबह तुलसी का पौधा रखो
2. ईस्ट डायरेक्शन में हवा की अच्छी व्यवस्था बनाएं
-पूर्व की खिड़कियां बंद न रखो
-यहां भारी दीवार या भारी सामान न रखो
3. घर में बढ़ाएं वेंटीलेशन
फेफड़ों से जुड़ी 80% समस्याएं खुली हवा से कम हो जाती हैं.
खिड़कियां, जाली और एग्ज़ॉस्ट का सही उपयोग बहुत फायदेमंद है.
4. Main gate par metal wind chime (5 rods)
यह घर में आने वाली नकारात्मक हवा के प्रभाव को घटाती है.
5. राहु और मंगल के उपाय
-गोमूत्र से घर का शुद्धिकरण
-मंगलवार को मसूर दाल दान
-राहु के लिए दक्षिण-पश्चिम हिस्सा साफ और हल्का रखो







