What is Mahayana : जब दुनिया नए साल की उलटी गिनती ग्रेगोरियन कैलेंडर से करती है, तब एशिया के कई हिस्सों में समय की रफ्तार कुछ अलग तरह से चलती है. कहीं चंद्र कैलेंडर, कहीं धार्मिक परंपराएं, तो कहीं आध्यात्मिक चिंतन इसी कड़ी में आता है महायान नव वर्ष. यह सिर्फ तारीख बदलने का मौका नहीं, बल्कि आत्मनिरीक्षण, करुणा और नए संकल्पों का दिन है. बहुत से लोग इसके नाम से परिचित नहीं हैं, लेकिन जिन समुदायों में यह मनाया जाता है, वहां इसका महत्व किसी बड़े पर्व से कम नहीं. सवाल उठता है महायान नव वर्ष आखिर है क्या, कौन इसे मनाता है और क्या भारत में भी इसकी परंपरा मौजूद है?
महायान नव वर्ष क्या होता है?
महायान नव वर्ष बौद्ध धर्म की महायान परंपरा से जुड़ा हुआ नया साल है. महायान बौद्ध धर्म की एक प्रमुख शाखा है, जिसमें करुणा, बोधिसत्व आदर्श और सामूहिक मोक्ष पर ज़ोर दिया जाता है.
यह नव वर्ष आमतौर पर चंद्र कैलेंडर के आधार पर मनाया जाता है, इसलिए इसकी तारीख हर साल बदलती रहती है. कई जगहों पर यह चीनी नव वर्ष या तिब्बती लोसार के आसपास पड़ता है. इस दिन को केवल उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक शुरुआत के तौर पर देखा जाता है.
कौन-से देश और समुदाय मनाते हैं महायान नव वर्ष?
पूर्वी एशिया में गहरी जड़ें
महायान नव वर्ष मुख्य रूप से चीन, जापान, कोरिया, वियतनाम, ताइवान और मंगोलिया जैसे देशों में मनाया जाता है. इन क्षेत्रों में बौद्ध धर्म सदियों से सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रहा है.
जापान में, उदाहरण के लिए, मंदिरों में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं. लोग पुराने साल की गलतियों को छोड़ने और नए साल में सही जीवन पथ पर चलने का संकल्प लेते हैं. वियतनाम में इसे टेट के साथ जोड़ा जाता है, जहां बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ पारिवारिक परंपराएं भी निभाई जाती हैं.
तिब्बती परंपरा और लोसार
तिब्बती बौद्ध धर्म, जो महायान से प्रभावित है, वहां लोसार को नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है. यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक उत्सव भी है जिसमें नृत्य, पारंपरिक भोजन और सामूहिक प्रार्थनाएं शामिल होती हैं.

क्या भारत में मनाया जाता है महायान नव वर्ष?
भारत में यह सवाल अक्सर उठता है, क्योंकि बौद्ध धर्म की जन्मभूमि होने के बावजूद यहां महायान नव वर्ष की चर्चा कम सुनाई देती है.
सीमित लेकिन मौजूद परंपरा
भारत में महायान नव वर्ष मुख्य रूप से लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है. इन क्षेत्रों में तिब्बती बौद्ध समुदाय और महायान परंपरा से जुड़े मठ सक्रिय हैं.
लद्दाख में लोसार के दौरान मठों में विशेष अनुष्ठान होते हैं. स्थानीय लोग नए कपड़े पहनते हैं, घरों की सफाई करते हैं और पारंपरिक भोजन बनाते हैं. हालांकि, यह उत्सव मुख्यधारा मीडिया में ज्यादा जगह नहीं पाता, इसलिए आम भारतीय इसके बारे में कम जानते हैं.
महायान नव वर्ष कैसे मनाया जाता है?
आध्यात्मिकता और सादगी का मेल
महायान नव वर्ष का स्वरूप दिखावे से ज्यादा साधना पर आधारित होता है. दिन की शुरुआत ध्यान और प्रार्थना से होती है. लोग बुद्ध की शिक्षाओं को याद करते हैं और करुणा, अहिंसा तथा संयम का अभ्यास करने का संकल्प लेते हैं.
कई मठों में सामूहिक पूजा, मंत्रोच्चारण और धर्म प्रवचन आयोजित किए जाते हैं. कुछ जगहों पर दीप जलाए जाते हैं, जो अज्ञान से ज्ञान की ओर बढ़ने का प्रतीक माने जाते हैं.

रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा उत्सव
यह उत्सव केवल धार्मिक लोगों तक सीमित नहीं रहता. परिवार एक साथ बैठते हैं, पुराने मतभेद भूलने की कोशिश करते हैं और नए साल की शुरुआत सकारात्मक सोच के साथ करते हैं. यही वजह है कि महायान नव वर्ष को “आंतरिक बदलाव का दिन” भी कहा जाता है.
आज के दौर में महायान नव वर्ष का महत्व
तेज़ रफ्तार जिंदगी और बढ़ते तनाव के बीच महायान नव वर्ष का संदेश आज पहले से कहीं ज्यादा प्रासंगिक लगता है. यह पर्व हमें रुककर सोचने, खुद से सवाल करने और दूसरों के प्रति करुणा रखने की याद दिलाता है.
जहां आधुनिक नव वर्ष अक्सर पार्टियों और शोर-शराबे तक सीमित रह जाता है, वहीं महायान नव वर्ष शांत शुरुआत पर ज़ोर देता है. शायद यही वजह है कि पश्चिमी देशों में भी अब लोग बौद्ध नव वर्ष और माइंडफुलनेस से जुड़े आयोजनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
महायान नव वर्ष केवल कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि सोच और जीवन-दृष्टि को नया रूप देने का अवसर है. एशिया के कई हिस्सों में इसकी गहरी परंपरा है और भारत में भी सीमित लेकिन महत्वपूर्ण रूप से यह मनाया जाता है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)







