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Noni Ka Saag Recipe: जितिया व्रत पर माताएं नोनी का साग बनाकर खाती हैं. मान्यता है कि संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए यह जरूरी होता है. यह साग हेल्दी होता है और इसे बनाना बेहद आसान है. जानते हैं ईजी रेस…और पढ़ें
साग की तस्वीरव्रत से एक दिन पहले नहाय-खाय की परंपरा होती है, जिसमें विशेष पकवान बनाए जाते हैं. इन्हीं में सबसे प्रमुख और पारंपरिक व्यंजन है नोनी का साग, जिसे इस मौके पर खासतौर पर बनाया और खाया जाता है.
नोनी के साग का महत्व आयुर्वेद में भी बताया गया है. इसमें भरपूर पोषण और औषधीय गुण पाए जाते हैं, जो लंबे समय तक उपवास रखने वाली महिलाओं को ऊर्जा देते हैं. इसके सेवन से पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है और कब्ज जैसी समस्या से राहत मिलती है. यही कारण है कि जितिया के मौके पर हर घर में नोनी साग की तैयारी जरूरी मानी जाती है.
देता है उपवास में ताकत
सीतामढ़ी की रहने वाली मनोरमा देवी बताती हैं कि “जितिया व्रत में नोनी का साग खाने की परंपरा बहुत पुरानी है. यह न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि लंबे उपवास में ताकत भी देता है. हमारे यहां नहाय-खाय के दिन हर घर में इसे जरूर बनाया जाता है. चना दाल और मसालों के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. मांएं मानती हैं कि इसे खाने से संतान की उम्र लंबी होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है.” इस तरह स्थानीय महिलाओं की आस्था नोनी साग से गहराई से जुड़ी हुई है.
नोनी साग बनाना भी आसान है. इसके लिए बारीक कटा हुआ साग, भिगोयी हुई चना दाल, टमाटर, हरी मिर्च और ताजा धनिया की जरूरत होती है. पकाने के लिए सरसों का तेल, सेंधा नमक, हल्दी, काली मिर्च पाउडर, जीरा, मेथी दाना और सूखी लाल मिर्च ली जाती है. सबसे पहले सरसों के तेल में जीरा और मेथी दाना का तड़का लगाया जाता है.
फिर इसमें लाल मिर्च, भिगोयी हुई चना दाल और नोनी का साग डालकर मसालों के साथ पकाया जाता है. चाहें तो इसमें कटे टमाटर भी मिला सकते हैं. ढककर 5-10 मिनट पकाने के बाद यह साग तैयार हो जाता है. यह सादा होने के बावजूद स्वाद में लाजवाब और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है.
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