Bundeli Food: विंध्याचल पर्वत की श्रृंखलाओं पर बसे बुंदेलखंड की परंपराएं और यहां के व्यंजन अपने आप में बेहद अनूठे हैं. बुंदेलखंड के घरों में पारंपरिक रूप से बनाए जाने वाला बिजौरा केवल एक स्नैक नहीं, यह स्वाद और संस्कृति का प्रतीक भी है. क्योंकि बिजौरा न केवल खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसके माध्यम से हमारी विरासत, पारंपरिक ज्ञान और ग्रामीण जीवन की मिठास को भी महसूस किया जा सकता है. ऐसा दावा किया जाता है कि बिजौरा खाने से पेट साफ होता है. दांत साफ होने के साथ चमकदार होते हैं. इनको खाने से बाल मजबूत होते हैं. शरीर में पौष्टिकता आती है.
चूड़ी से दीजिए आकार
बिजोरा बनाने के लिए सबसे पहले सफेद कुम्हड़ा, तिली, कुम्हड़ा बीज के साथ हींग, धनिया, मिर्च, नमक, काला नमक को मिलाते हैं. यह छोटे-छोटे से गोल आकार में बनाए जाते हैं. पहले लोग दोनों हाथों की हथेलियां से बनाते थे, लेकिन अब चूड़ी का उपयोग करते हैं. किसी भी कपड़े पर चूड़ी रखकर यह मिक्स मसाला उसमें भर देते हैं. फिर चूड़ी उठा लेते हैं. चार-पांच घंटे जब धूप लग जाती है तो यह सूख जाते हैं. फिर इनको बर्तन में रख लेते हैं, ताकि यह सुरक्षित रहें. जब खाना हो तब आवश्यकता अनुसार निकाल लेते हैं.
ऐसे बनाएं बिजौरा
सागर की 70 वर्षीय बुजुर्ग दादी मां द्रोपती बाई बताती हैं कि जब वह शादी के बाद ससुराल आई थीं, तब उनकी सास ने इसे बनाना सिखाया था. इसे अब बहू और नातिनों को भी सिखा दिया है. इसे बनाना बहुत आसान है. इसकी सामग्री भी आराम से मिल जाती है. सबसे पहले सफेद कुम्हड़ा लीजिए और इसको किसनी से किस लीजिए. इसमें जो बीज निकलेंगे उनको अलग रख लो. फिर 1 किलो उड़द की भीगी पिसी हुई दाल के साथ 200 ग्राम बीजा, 2 किलोग्राम तिली, 100 ग्राम कद्दू की पीठी का मसाला बनाते हैं. फिर इसमें स्वाद के अनुसार नमक, मिर्च, हींग मसाले में मिक्स कर देते हैं. दाल को एक दिन पहले शाम को पानी में भिगोना पड़ता है.
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