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Omlette Without Tava: क्या आप कल्पना भी कर सकते हैं कि बिना तवे और तेल-घी के ऑमलेट बन सकता है? लेकिन यह सच है, रांची में इस तरीके से ऑमलेट बनता है. इसकी रेसिपी जितनी खास है, स्वाद उससे भी ज्यादा स्पेशल है.

ये एक दोने में बनता है जिसमें तेल नहीं लगाया जाता और कोयले की आंच में बस रख दिया जाता है और आसपास आग जला दी जाती है. इस गरमी से ये पक जाता है.

दरअसल, यह एकदम आदिवासी तकनीक है. इसमें सबसे पहले आपको दो अंडे लेने हैं और एक कटोरी में लेकर अच्छे से मिला लेने हैं. इसमें आपको प्याज मिर्ची नमक स्वाद अनुसार डालना है. साथ ही जो भी आपके पसंद वाले मसाले हैं वे आप डाल सकते हैं.

डालने के बाद अच्छे से मिलाते हुए आपको एक दोना लेना है. अब उसमें यह पूरा मिक्सचर डाल देना है. ध्यान रहे, आपको तेल बिलकुल भी नहीं डालना, बस ऐसे ही पूरा का पूरा अंडा दोने में डाल दें.

इसके बाद आपको दोना लेना है और लकड़ी का चूल्हा जिसमें कोयला रहता है उसको गर्म कोयले के बीच में आपको इस दोने को रख देना है. इसको ढकने की जरूरत नहीं है.

इसके बाद आप देखेंगे कोयले की आंच में यह धीरे-धीरे नहीं भी तो कम से कम 20 मिनट लेकर पकेगा. जी हां! वैसे तो आमलेट तवे पर 5 मिनट में ही बन जात जाता है. लेकिन इसमें 20 से 25 मिनट लगता है.

अब 25 मिनट बाद देखेंगे आपका आमलेट बनकर रेडी है. ऐसा स्वाद आपने पहले कभी नहीं चखा होगा. इस तरह बिना तेल और तवे का आमलेट बनता है. जिन्हें तेल मसाला अधिक पसंद बिल्कुल नहीं, उनके लिए यह परफेक्ट माना जाता है.

झारखंड के जितनी भी आदिवासी जनजाति हैं, वे बिल्कुल इसी तरीके से अपने घर में आमलेट बनाकर खाते हैं. सरिता उराव बताती हैं, हम लोग हमेशा इस तरह का आमलेट बनाते हैं. ठंड के दिनों मे खा लें तो पसीने छुड़ा देगा, इतनी गर्माहट होती है इस तरीके से बनाने में और स्वाद भी गजब.
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