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Mohabbat Ka Sherbet: रोजेदार कई तरीकों से अपना रोजा खोलते हैं पर अलग-अलग पेयों में से मोहब्बत का शरबत काफी पसंद किया जाता है. ये स्वाद में इतना अच्छा और ताजगी भरा होता है कि एक ग्लास पीते ही पूरे दिन से सूखा गला और प्यास तृप्त हो जाती है. जमशेदपुर में यहां इसका टेस्ट लिया जा सकता है.
जमशेदपुर. रमजान का महीना शुरू होते ही बाजारों की रौनक बढ़ जाती है. इफ्तार के समय जैसे ही अजान की आवाज गूंजती है, गलियों और चौक-चौराहों पर खाने-पीने की खुशबू माहौल को खास बना देती है. जमशेदपुर में भी इन दिनों ऐसा ही नजारा है. खासकर इफ्तार के वक्त एक खास ड्रिंक लोगों को अपनी ओर खींच रही है, जिसका नाम ही मिठास से भरा है — मोहब्बत का शरबत.
स्वाद ही पहचान है
गर्मी के मौसम में रोजा रखने के बाद जब गला सूख जाता है, तब ठंडा और मीठा पेय बहुत राहत देता है. यही कारण है कि मोहब्बत का शरबत रोजेदारों की पहली पसंद बनता जा रहा है. जमशेदपुर के बाजार में आरिफ अपने हाथों से यह खास शरबत तैयार करते हैं और कहते हैं कि इसका स्वाद ही इसकी पहचान है.
क्रीमी दूध से होता है तैयार
आरिफ बताते हैं कि इस शरबत को बनाने की शुरुआत अच्छी क्वालिटी के गाढ़े क्रीम वाले दूध से होती है. सबसे पहले दूध को अच्छी तरह ठंडा किया जाता है ताकि हर घूंट में ठंडक का एहसास हो. इसके बाद इसमें चीनी की मीठी चाशनी मिलाई जाती है, जो स्वाद को संतुलित करती है. फिर ताजे लाल तरबूज के बारीक कटे टुकड़े दूध में डाले जाते हैं. तरबूज की मिठास और दूध का क्रीमी स्वाद मिलकर इसे बेहद स्वादिष्ट बना देते हैं.
रूहआफ्जा, चिया सीड्स, टूटी-फ्रूटी
इसके बाद इसमें खुशबू और रंग से भरपूर रूहआफ्जा डाला जाता है, जो इस शरबत की खास पहचान है. जैसे ही यह दूध में मिलता है, शरबत का रंग गुलाबी हो जाता है और खुशबू फैल जाती है. फिर इसमें बर्फ के टुकड़े डाले जाते हैं ताकि गर्मी से राहत मिल सके.
गिलास में परोसने से पहले एक चम्मच भीगे हुए चिया सीड्स डाले जाते हैं, जो सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं और शरबत को अलग बनावट देते हैं. ऊपर से टूटी-फ्रूटी डालकर इसे सजाया जाता है. रंग-बिरंगे टुकड़े इसे देखने में और भी आकर्षक बना देते हैं.
इतनी है कीमत
सबसे खास बात यह है कि इतने अच्छे स्वाद के बावजूद मोहब्बत का शरबत मात्र 30 रुपये प्रति गिलास में मिलता है. कम कीमत और बेहतरीन स्वाद की वजह से यहां रोज भीड़ लगी रहती है. रोजेदारों के लिए यह शरबत सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि इफ्तार की मिठास और अपनापन का एहसास बन चुका है. इसे घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है और बहुत से घरों में रोजा तोड़ते समय इसका सेवन किया जाता है.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए Bharat.one Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
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