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वह बिस्कुट जो शहर की पहचान बन गया, इसके बिना सुबह की चाय है अधूरी, जानें कैसे नाम पड़ा उस्मानिया

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उस्मानिया बिस्कुट रेसिपी: हैदराबाद का प्रसिद्ध उस्मानिया बिस्कुट अपनी अनोखी मिठास, मक्खनी स्वाद और सुनहरे रंग के लिए जाना जाता है. इसकी शुरुआत निज़ाम मीर उस्मान अली खान की शाही रसोई से हुई थी, जहां इसे हल्का और आसानी से पचने वाला आहार बनाने के लिए तैयार किया गया था. आज यह बिस्कुट पूरे देश और विदेश में लोकप्रिय है और चाय या कॉफी के साथ सुबह के नाश्ते का अनिवार्य हिस्सा बन गया है.

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हैदराबाद. बिस्कुल तो आपने कई प्रकार के खाए होंगे, लेकिन हैदराबाद में बनने वाली उस्मानिया बिस्कुल का बात ही निराली है. हैदराबाद की सुबह ईरानी चाय और उस्मानिया बिस्कुट के साथ शुरू होती है. यह जोड़ी हैदराबाद की एक पुरानी और प्यारी परंपरा रही है. लेकिन आज यह परंपरा सिर्फ हैदराबाद तक सीमित नहीं बल्कि पूरे देश में तेजी से फैल रही है. बल्कि दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु से लेकर दुबई और अमेरिका तक उस्मानिया बिस्कुट के दीवाने मिल जाएंगे. लोग उस्मानिया बिस्कुट के दीवाने हैं. पर क्या आप जानते हैं कि यह पसंदीदा बिस्कुट शुरूआत में मरीजों के लिए तैयार किया गया था.

उस्मानिया बिस्कुट के पीछे कई रोचक कहानियां है.  माना जाता है कि इसकी शुरुआत हैदराबाद के आखिरी निज़ाम मीर उस्मान अली खान की शाही रसोई से हुई थी. निज़ाम एक ऐसे नाश्ते की चाह रखते थे जो मीठा और नमकीन स्वाद का सही मेल हो. कुछ इतिहासकारों के अनुसार निज़ाम के सैनिकों को एक बीमारी के दौरान हल्के आहार के तौर पर यह बिस्कुट दिया जाने लगा था, क्योंकि यह हल्का और आसानी से पचने वाला था.

कैसे तैयार किया जाता है उस्मानिया बिस्कुट

उस्मानिया बिस्कुट अपने सुनहरे रंग, समृद्ध मक्खनी स्वाद और सन्तुलित मिठास के लिए मशहूर है. यह मुंह में घुल जाने वाला बिस्कुट प्रीमियम आटा, मक्खन और हल्की इलायची के मिश्रण से तैयार किया जाता है, जो इसे एक अनूठा स्वाद देता है. यही स्वाद चाय या कॉफी के साथ बेहतरीन तालमेल बैठाता है. आज भी पुरानी रेसिपी में ज़्यादा बदलाव नहीं हुआ है. बेहतरीन मैदा, शुद्ध मक्खन, सही मात्रा में चीनी और इलायची का हल्का स्पर्श बस यही जादू है जो इसे मुंह में घुलने वाला बनाता है. सुनहरा रंग, ऊपर की हल्की दरारें और अंदर से नरम बनावट इसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है.

कैसे  बिस्कुट का नाम पड़ गया गया उस्मानिया

निज़ाम मीर उस्मान को यह बिस्कुट इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे बड़ी मात्रा में बनवाकर अपने करीबियों में बांटना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे यह लोकप्रिय हो गया. निज़ाम के नाम पर ही इसका नाम उस्मानिया बिस्कुट पड़ा. इस तरह जो बिस्कुट कभी मरीजों के आहार के रूप में शुरू हुआ आज वह हर घर की सुबह चाय का पसंदीदा साथी बन गया है. हैदराबाद से बाहर अब कई बड़े ब्रांड इसे पैक करके बेच रहे हैं, लेकिन असली मज़ा तो आज भी उन पुरानी बेकरी में है, जहां सुबह-सुबह ताज़ा बिस्कुट ओवन से निकलते हैं और उनकी खुशबू पूरे मोहल्ले में फैल जाती है. एक कप दूध वाली ईरानी चाय और तीन-चार उस्मानिया बिस्कुट बस, इससे बेहतरीन सुबह भला और क्या हो सकती है.

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deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से Bharat.one हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

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शहर की पहचान बन चुका बिस्कुट, बिना इसके चाय अधूरी, जानें उस्मानिया का इतिहास


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/recipe-usmania-biscuit-hyderabad-traditional-recipe-butter-cardamom-chai-companion-nizam-shahi-history-local18-9934521.html

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