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सीवान में खाना है समोसा… तो चले आइये यहां, रोज 1000 पीस की बिक्री, 35 साल से कायम है ग्राहकों का भरोसा – Bihar News


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Siwan Famous Samosa Shop: सीवान जिले के बड़हरिया बाजार के पास स्थित साधु स्वीट्स इन दिनों चर्चा में है. यह चर्चा किसी नए उत्पाद या बड़े प्रचार की वजह से नहीं, बल्कि उस पारंपरिक स्वाद की वजह से है, जो पिछले तीन दशकों से ग्राहकों का दिल जीत रहा है. दोपहर से शाम तक चलने वाली इस दुकान के सामने रोजाना भारी भीड़ जुटती है. भीड़ गांव-कस्बों के लोगों से लेकर कॉलेज और स्कूल के युवक-युवतियों की होती है, जो कम मसाले वाले, स्वादिष्ट और कुरकुरे समोसे के लिए यहां इंतजार करने में भी पीछे नहीं रहते.

साधु स्वीट्स की पहचान समोसे से हुई है, और यह पहचान लगातार बढ़ रही है. दुकान के संचालक अशोक कुमार बताते हैं कि उनका ध्यान कभी भी मात्रा पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता पर रहा है. वे कहते हैं, “यह दुकान मेरे दादा के समय से चल रही है. उन्होंने इसे शुरू किया, उसके बाद पिता ने इसे संभाला और अब मैं इसे आगे बढ़ा रहा हूं. हमारे परिवार ने स्वाद और भरोसे की एक लकीर खींची है, जिसे हर हाल में कायम रखना है.”

ग्राहकों की राय भी इस दुकान की लोकप्रियता का प्रमाण देती है. नियमित ग्राहक रमेश कहते हैं, “समोसा स्वादिष्ट होने के बावजूद हल्का लगता है. मसाला कम होने के कारण रोज भी खा लिया जाए तो सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता.” रमेश रोजाना दो से तीन बार दुकान तक पहुंचते हैं और इसे न सिर्फ नाश्ते का, बल्कि दिनचर्या का हिस्सा बताते हैं. वे खुद मुस्कुराकर कहते हैं, “10 रुपये में 2 पीस. इस समय बाजार में इससे बेहतर और क्या मिल सकता है.”

इसी कड़ी में कॉलेज छात्रा कोमल बताती हैं कि वे और उनकी सहेलियां लगभग रोज यहां समोसा खाने आती हैं. “हमने कभी गुणवत्ता में कमी नहीं देखी. समोसा गरम मिलता है, मसाला संतुलित रहता है और सबसे बड़ी बात यह कि दुकान साफ-सुथरी है”.

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अशोक बताते हैं कि समोसे में इस्तेमाल होने वाला मसाला बाहर से मंगवाया जाता है और पूरी सावधानी के साथ तैयार किया जाता है. वे कहते हैं, “मैं इस बात का ध्यान रखता हूं कि मेहमान रोज आएं, लेकिन शिकायत एक भी दिन न करें. कम कीमत का मतलब यह नहीं कि गुणवत्ता से समझौता किया जाए.” शायद यही वजह है कि स्वाद में लगातार स्थिरता और ग्राहकों की बदलती पसंद का संतुलन इस दुकान को खास बनाता है.

अशोक बताते हैं कि रोजाना लगभग 1000 से 1500 समोसे बिक जाते हैं. कई बार त्योहारों, बाजार के खास दिनों और शुक्रवार को यह संख्या इससे भी अधिक पहुंच जाती है. दुकान बड़हरिया के मुख्य बाजार के पास होने के कारण आसपास के दर्जनों गांवों से लोग यहां आते हैं. कई परिवार ऐसे हैं, जिन्हें बाहर से लौटने वाले सदस्य साधु स्वीट्स का समोसा ही लेकर जाते हैं.

अशोक कहते हैं कि उनकी दुकान का सबसे बड़ा प्रचार ग्राहक स्वयं हैं. “लोग एक बार स्वाद लेते हैं और फिर अगली बार अपने साथ किसी दोस्त या परिवार वाले को लेकर आते हैं. यही हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी और कमाई दोनों है,” वे हंसते हुए कहते हैं.

35 वर्षों में इस दुकान ने न सिर्फ ग्राहकों की भूख को शांत किया है, बल्कि बड़हरिया बाजार की पहचान भी बन चुकी है. आज जहां महंगाई बढ़ रही है और फास्ट फूड के नाम पर गुणवत्ता कई बार खो जाती है, वहीं एक छोटी गुमटी से चलने वाली यह समोसा दुकान स्वाद, भरोसे और परंपरा की मिसाल बन गई है.

अशोक आगे कहते हैं कि आने वाले समय में वे इस दुकान को और बेहतर सुविधाओं के साथ बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन वही पारंपरिक स्वाद और कम मसाले वाली पहचान हमेशा बरकरार रहेगी. भीड़, स्वाद और भरोसे की यह कहानी सिर्फ समोसे की नहीं, बल्कि मेहनत, लगन और वादे को निभाने की कहानी है. साधु स्वीट्स यह साबित करती है कि सफल होने के लिए कभी-कभी बड़े बोर्ड और चमकदार दुकानों की जरूरत नहीं होती. बस स्वाद, सादगी और ईमानदारी ही काफी होती है.

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सीवान में खाना है समोसा… तो चले आइये यहां, रोज 1000 पीस की बिक्री


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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/recipe-the-samosa-from-this-siwan-shop-are-a-local-favorite-maintaining-their-popularity-for-35-years-local18-ws-l-10130354.html

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