
कन्नौज: इत्र नगरी कन्नौज में इत्र की खुशबू के साथ-साथ मिठास की भी कोई कमी नहीं है. कन्नौज में एक ऐसी गुड़ वाली पट्टी है, जो सबसे ज्यादा जानी और पहचानी जाती है. यह पट्टी 50 साल से भी ज्यादा समय से बनाई जा रही है. आज भी लोगों की यह पसंद बनी हुई है. इसको दाल गुड़ पट्टी के नाम से जाना जाता है. यह पट्टी स्वास्थ्य के लिए भी कहीं न कहीं से लाभदायक होती है. खाना खाने के बाद लोगों को अक्सर कुछ मीठा खाने की आदत होती है. ऐसे में मिठाई की अपेक्षा इसको खाने से पाचन क्रिया अच्छी रहती है. जहां सर्दियों में गुड़ शरीर में गर्माहट बनाने का काम करता है.
जानें कैसे बनती हैं गुड़ वाली पट्टी
देखने में तो यह साधारण गुड़ वाली पट्टी लगती है, लेकिन इसको बनाने में बहुत मेहनत लगती है. सबसे पहले इसको चाशनी के रूप में तब्दील किया जाता है. फिर इसके बाद इसको फेटा जाता है, जिसके बाद इसके ऊपर बेलाई होती है. फिर इसमें केवड़ा मिलाकर इसके ऊपर चने की दाल के दोनों ओर हाथ से लगाया जाता है. इस पूरे काम में किसी भी तरह की मशीन का प्रयोग नहीं होता है.
यहां की है सबसे पुरानी गुड़ पट्टी
गुड़ वाली पट्टियों में सबसे पुरानी यही पट्टी मानी जाती है. वहीं, इसका नाम भी बहुत साधारण सा है. इसको गुड़-दाल पट्टी के नाम से जाना जाता है.
क्या रहता रेट
गुड वाली पट्टियों में आज भी यह पट्टी सबसे ज्यादा बिकती है. वहीं, इसके रेट की बात की जाए तो 100 रुपए प्रति किलो इसका रेट रहता है.
जानें क्या बोले दुकानदार
दुकानदार सक्षम वैश्य बताते हैं कि करीब 100 साल से उनके यहां मीठा बनाने का काम चल रहा है. सबसे पुराना उनका गट्टे का कारोबार है. उसके बाद अगर सबसे पुरानी पट्टी का काम कहा जाए तो यह गुड़ दाल वाली पट्टी है. 50 साल से ज्यादा समय से यहां पर बनाई जा रही है. इसका टेस्ट भी सबसे ज्यादा लोगों को पसंद आता है.
FIRST PUBLISHED : December 26, 2024, 10:47 IST
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