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Bathua Kadhi Recipe: भरतपुर के गांवों में सर्दियों के मौसम में बथुआ कढ़ी की देसी खुशबू आज भी वही पुरानी परंपरा जिंदा रखे हुए है. ग्रामीण रसोई में तैयार होने वाली यह पारंपरिक डिश न सिर्फ स्वादिष्ट है, बल्कि सर्दी में सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. स्थानीय लोग इसे अपनी विरासत और सर्दियों का खास स्वाद बताते हैं.

सर्दी का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों में कई पारंपरिक व्यंजन लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं, इन्हीं में से एक है. बथुए के साग से बनने वाली पारंपरिक कढ़ी जो न केवल स्वाद में लाजवाब होती है. बल्कि सेहत के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है. भरतपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में यह कढ़ी सर्दियों में खास तौर पर बनाई जाती है क्योंकि इस मौसम में बथुआ अच्छी मात्रा में मिलता है.

और अपने श्रेष्ठ गुणों के साथ शरीर को गर्माहट भी प्रदान करता है. ग्रामीण परिवारों में बथुआ की कढ़ी पीढ़ियों से सर्दियों का अहम हिस्सा रही है. इस कढ़ी को छाछ, बेसन और बथुए के पत्तों से तैयार किया जाता है. खास बात यह है कि इसमें घर पर पीसे हुए मसाले डाले जाते हैं. जो न केवल इसके स्वाद को दोगुना कर देते हैं. बल्कि इसे पूरी तरह देसी और पौष्टिक भी बनाते हैं.

गर्म गर्म बथुआ कढ़ी का स्वाद सर्द हवाओं में एक अलग ही आनंद देता है. जो हर किसी को पसंद आता है. बथुआ की कढ़ी खाने के कई फायदे हैं. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को सर्दी से बचाने में मदद करते हैं. बथुआ आयरन, फाइबर, विटामिन A और C से भरपूर होता है. जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इसके नियमित सेवन से जुखाम, खांसी और गले की खराश में आराम मिलता है.
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यही कारण है कि ग्रामीण बुजुर्ग आज भी इसे सर्दियों में शरीर को अंदर से गर्म रखने का बेहतरीन देसी उपाय मानते हैं. इतना ही नहीं यह पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाती है और गैस बदहजमी जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है. भरतपुर के कई गांवों में आज भी लोग सर्दियों का इंतजार इसलिए करते हैं.

ताकि वे बथुआ उपलब्ध होते ही इसकी कढ़ी बना सकें कई परिवारों में तो सप्ताह में एक या दो बार इसे ज़रूर बनाया जाता है. लोग इसे चावल मिस्सी रोटी या बाजरे की रोटी के साथ बड़े चाव से खाते हैं. यह व्यंजन जितना सरल है, उतना ही पौष्टिक और लाभदायक भी माना जाता है. जिसको लोग काफी अधिक मात्रा में पसंद करते हैं और यह लोगों की पहली पसंद बन जाती हैं.

बदलते समय में जहां लोग फास्ट फूड की ओर झुक रहे हैं. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों की यह पारंपरिक बथुआ कढ़ी आज भी अपनी पहचान बनाए हुए है. सर्दियों का स्वाद बढ़ाने के साथ-साथ सेहत को संवारने वाली यह देसी कढ़ी भरतपुर की ग्रामीण संस्कृति का एक अहम हिस्सा है और आने वाली पीढ़ियों को भी इसके लाभ और स्वाद से रूबरू कराना बेहद जरूरी है.
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https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/recipe-bharatpur-winter-bathua-kadhi-recipe-desi-village-tradition-rajasthan-food-culture-local18-9885088.html







