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Chaman Lal ras kadam purity made sweets famous in Samastipur and globally

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Samastipur Famous Chaman Lal Ras Kadam: समस्तीपुर के दलसिंहसराय में चमन लाल द्वारा शुरू किया गया रस-कदम आज तीसरी पीढ़ी तक अपनी पहचान बनाए हुए हैं. पोते किशन कुमार की देखरेख में अपनी शुद्धता और स्वाद के लिए आज भी प्रसिद्ध है. लोगों का भरोसा वैसा ही कायम है जैसे उनके दादा के समय था. आइए जानते हैं उसकी खूबी.

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समस्तीपुर: समस्तीपुर के दलसिंहसराय में चमन लाल द्वारा बनाया जाने वाला रस कदम वर्षों से लोगों की पसंद रहा है. स्वाद और गुणवत्ता के कारण इस मिठाई ने स्थानीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई. 32 नंबर गुमटी के पास स्थित उनकी दुकान पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग रस–कदम खरीदने आते थे. चमन लाल का मानना था कि मिठाई की पहचान उसकी ताजगी और शुद्धता से होती है. यही कारण था कि उनके रस-कदम को लोग खास भरोसे के साथ खरीदते थे. भले ही चमन लाल अब लोगो के बीच नहीं हैं, लेकिन उनके जीवनभर की मेहनत से जुड़ी इस मिठाई ने समस्तीपुर में एक सादगी भरी, पर मजबूत पहचान बनाई.

दादा के बाद पोते किशन बढ़ा रहे हैं परंपरा
चमन लाल के निधन के बाद अब उनके पोते किशन कुमार इस परंपरा को संभाल रहे हैं. किसन उसी तरीके से मिठाई तैयार करते हैं. जिस तरीके से दादाजी तैयार करते थे. यही कारण है कि दुकान पर आज भी नियमित ग्राहक आते हैं. प्रतिदिन एक कुंतल से अधिक रस–कदम की बिक्री इस बात का संकेत है कि लोगों का भरोसा अब भी कायम है. 21 रुपये प्रति पीस और 500 रुपये किलो की कीमत पर मिलने वाली यह मिठाई आसपास के जिलों से लोग खरीदने आते हैं. पुराने कारीगर, जो चमन लाल के साथ काम करते थे, आज भी दुकान में जुड़े हुए हैं. उसी विधि से मिठाई बनाने में सहयोग दे रहे हैं. इससे स्वाद और गुणवत्ता दोनों संतुलित बने हुए हैं.

पहचान आज भी बरकरार
स्थानीय लोगों का कहना है कि रस–कदम की यह दुकान वर्षों से हर परिवार की पसंद में शामिल है. विशेष अवसरों, त्योहारों या घर के कार्यक्रमों में लोग यहाँ से मिठाई लेना पसंद करते हैं, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि स्वाद हमेशा समान मिलेगा. किसन कुमार दुकान और मिठाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देते हैं ताकि उनके दादाजी द्वारा बनाई गई प्रतिष्ठा प्रभावित न हो. इसी वजह से चमन लाल की अनुपस्थिति के बावजूद यह मिठाई अपनी पहचान बनाए रखे हुए है और
समस्तीपुर में एक भरोसेमंद नाम के रूप में जानी जाती है. यह दुकान आज भी उसी शांत और सादगीपूर्ण तरीके से चल रही है, जैसे पहले चमन लाल चलाते थे, और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता मानी जाती है.

क्या कहते स्वर्गीय चमन लाल का पोता 
किशन कुमार अपने स्व.दादा चमन लाल की बातों को याद कर बतलाते हैं कि उनके रस–कदम की सबसे बड़ी पहचान उसकी शुद्धता थी. वह कहते हैं कि मिठाई बनाने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जाती है. हमेशा बिना मिलावट वाला दूध ही इस्तेमाल होता है. किशन बताते हैं कि उनके दादा ने जिस मेहनत और ईमानदारी से यह पहचान बनाई थी. वह उसी परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. उनके अनुसार, दूध और चीनी जैसे सामान्य सामग्री से मिठाई बनती है, लेकिन इसमें हाथ की कारीगरी का अलग ही महत्व है. खासकर दूध को उबालते समय उसे सही तरीके से पकाना मिठाई के स्वाद का मुख्य हिस्सा है. किशन कहते हैं कि यही वजह है कि लोग यहां से बड़ी मात्रा में मिठाई खरीदते हैं. कभी-कभी एक व्यक्ति चार-पांच किलो तक ले जाता है. उन्होंने कहा कि जो भी एक बार खाता है, वह स्वाद खुद समझ जाता है.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और Bharat.one तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें

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