Daily Momos Side Effects: आजकल मेट्रो सिटीज की लाइफ में मोमोज एक तरह से डेली स्नैक बन चुके हैं. दिल्ली, मुंबई, बैंगलोर, पुणे जैसे शहरों में आप जहां भी जाएंगे, मोमोज का स्टॉल आपको कुछ ही दूरी पर मिल जाएगा. स्टीम्ड मोमोज से लेकर फ्राइड, तंदूरी, अचारी, अफगानी, पेरि पेरि… हर तरह के फ्लेवर लोगों की डाइट में रोज की तरह शामिल हो रहे हैं. खासकर ऑफिस जाने वाले, कॉलेज स्टूडेंट्स और शाम की भूख मिटाने वाले ज्यादातर लोग मोमोज को एक क्विक और टेस्ट वाला ऑप्शन मानकर डेली खा लेते हैं. लेकिन जितने टेस्टी मोमोज होते हैं, उतने ही छुपे हुए हेल्थ रिस्क भी साथ लेकर आते हैं. न्यूट्रिशनिस्ट्स के अनुसार, रोजाना मोमोज खाना शरीर की डाइजेशन, वेट, शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर बुरा असर डाल सकता है. आयुर्वेदिक डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट डॉ. अंजना कालिया ने एक वेबसाइट से बात करते हुए बताया कि रोज मोमोज खाने से शरीर में क्या-क्या बदलाव आ सकते हैं और लोग इसे क्यों हेल्दी समझने की गलती कर बैठते हैं.
रोज मोमोज खाना क्यों नुकसानदायक है?
डॉ. अंजना कालिया के अनुसार, मोमोज देखने में भले ही हल्के लगते हैं, लेकिन इनमें कैलोरी, रिफाइंड कार्ब्स और अनहेल्दी फैट काफी ज्यादा होता है. खासकर अगर मोमोज मैदा से बने हों और उनमें प्रोसेस्ड फिलिंग भरी हो. वह बताती हैं कि मैदा डाइजेस्ट होने में ज्यादा समय लेता है और इसमें फाइबर लगभग न के बराबर होता है.
इससे डाइजेशन स्लो हो जाता है और ब्लोटिंग, गैस और कंसटिपेशन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. रोज मोमोज खाने से न्यूट्रिशनल इम्बैलेंस भी होता है क्योंकि शरीर को प्रोटीन, फाइबर और माइक्रो न्यूट्रिएंट्स बहुत कम मिलते हैं. इसके अलावा मोमोज के साथ मिलने वाले रेड चटनी सॉस में सोडियम, ऑयल और प्रेजर्वेटिव्स की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, जो हार्ट और ब्लड प्रेशर दोनों के लिए नुकसानदायक है.
रोजाना मोमोज खाने के आम साइड इफेक्ट्स
1. ब्लोटिंग और गैस
- मैदा पेट में फूलता है और डाइजेशन स्लो करता है. इससे:
- पेट भारी लगना
- लगातार गैस बनना
- ब्लोटिंग
- एसिडिटी
- जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं.

2. कंसटिपेशन की समस्या
मैदा में फाइबर न होने की वजह से रोज मोमोज खाने वाले लोगों में कब्ज की शिकायत पाई जाती है. शरीर को फाइबर नहीं मिलेगा, तो पेट साफ भी ठीक से नहीं होगा.
3. वजन बढ़ना
- मोमोज हल्के दिखते जरूर हैं, लेकिन:
- मैदा
- ऑयल
- हाई-कैलोरी फिलिंग
- सोडियम युक्त सॉस
- इन सबके कारण रोज खाने से कैलोरी ओवरलोड हो जाता है. इससे धीरे-धीरे वजन बढ़ने लगता है.
4. हार्ट पर असर
डॉ. कालिया बताती हैं कि मोमोज की ज्यादातर फिलिंग्स में ट्रांस फैट, ओवरकुक्ड ऑयल, प्रोसेस्ड मीट या स्नैक मिक्स होते हैं. ये चीजें:
- कोलेस्ट्रॉल बढ़ाती हैं
- ब्लड प्रेशर को प्रभावित करती हैं
- हार्ट डिसीज का रिस्क बढ़ाती हैं

5. ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव
- मोमोज में रिफाइंड कार्ब्स ज्यादा और प्रोटीन कम होता है. ऐसे में:
- शुगर लेवल तेजी से बढ़ता है
- फिर अचानक गिरता है
- इससे कमजोरी, चक्कर, थकान जैसी दिक्कतें होती हैं
- रोज ऐसा होने पर इंसुलिन सेंसेटिविटी पर भी असर पड़ता है.
6. इम्यूनिटी कमजोर होना
डेली मैदा, ऑयली फिलिंग और लो-न्यूट्रिशन फूड खाने से शरीर को जरूरी विटामिन्स और मिनरल्स नहीं मिलते. इससे इम्यून सिस्टम स्लो हो जाता है.
क्या कोई हेल्दी मोमोज ऑप्शन है?
डॉ. अंजना कालिया कहती हैं कि स्टीम्ड मोमोज फ्राइड मोमोज की तुलना में थोड़े बेहतर होते हैं क्योंकि उनमें ऑयल कम होता है. लेकिन मैदा वाले स्टीम्ड मोमोज भी डेली नहीं खाने चाहिए.

तो क्या करें?
- व्हीट मोमोज, मिलेट मोमोज या रागी मोमोज बेहतर विकल्प हैं.
- इनमें फाइबर और न्यूट्रिएंट्स ज्यादा होते हैं.
- वेजिटेबल भरकर बनाए गए मोमोज ज्यादा हेल्दी माने जाते हैं.
- लेकिन ध्यान रहे, रोजाना healthiest मोमोज भी खाना गलत है क्योंकि इससे बाकी जरूरी फूड ग्रुप आपकी डाइट से गायब हो जाते हैं.
- डॉक्टर की सलाह: मोमोज देखें, लेकिन रोज नहीं

डॉ. कालिया कहती हैं कि मोमोज को डेली रूटीन का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए.
- इन्हें हफ्ते में 1–2 बार ही खाएं
- फ्राइड की जगह स्टीम्ड चुनें
- चटनी कम लें
- साथ में सूप या सलाद खाएं
- अगर आप घर पर मोमोज बनाते हैं और:
- आटा/मिलेट से बनाते हैं
- फिलिंग में सब्जियां और प्रोटीन रखते हैं
- कम ऑयल इस्तेमाल करते हैं
- तो ये शरीर पर नुकसान कम करते हैं.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
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