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Dishes prepared from Vindhya’s indigenous Kachi water chestnut are a complete treasure of health – Himachal Pradesh News

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Singhare ki kachi Recipe: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में पारंपरिक व्यंजन काची सर्दियों में स्वादिष्ट और सेहतमंद विकल्प माना जाता है. यह सिंघाड़े के आटे से बनाई जाती है और व्रत-उपवास के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी खाई जाती है. आइए जानें इसे बनाने की पूरी रेसिपी

Singhare ki kachi Recipe: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में आज भी कई पारंपरिक व्यंजन अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं. इन्हीं में से एक है काची, जिसे कई इलाकों में लपसी भी कहा जाता है. सर्दी के मौसम में काची न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद मानी जाती है. यही वजह है कि यह व्यंजन व्रत-उपवास के साथ-साथ सामान्य दिनों में भी खाया जाता है. विंध्य क्षेत्र में सिंघाड़े के आटे से बनने वाली काची को आज एक सेहतमंद विकल्प के रूप में अपनाया जाता है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आर.पी. परौहा के अनुसार सिंघाड़ा जल में उगने वाला फल है, जिसे सुखाकर आटे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. सिंघाड़े का आटा पूरी तरह ग्लूटेन-फ्री होता है, इसलिए यह उन लोगों के लिए भी सुरक्षित है, जिन्हें गेहूं या अन्य अनाज से एलर्जी की समस्या होती है. सिंघाड़ा आटे से बनी काची ऊर्जा से भरपूर होती है और शरीर को लंबे समय तक ताकत देती है. इसी कारण उपवास के दौरान इसे विशेष रूप से खाया जाता है.

रसोईया प्रियंका सिंह ने Bharat.one को जानकारी देते हुए बताया कि सिंघाड़ा आटा काची बनाने की विधि भी काफी सरल है. घी में सिंघाड़े का आटा भूनकर उसमें दूध या पानी मिलाया जाता है और फिर स्वादानुसार गुड़ या शक्कर डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकने के बाद इसमें इलायची और सूखे मेवे जैसे काजू, बादाम और किशमिश मिलाई जाती है, जिससे इसका स्वाद और पौष्टिकता दोनों बढ़ जाती हैं. इसका हल्का मीठा और खुशबूदार स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है.

काची में कई सारे पोषण मौजूद
पोषण विशेषज्ञों के मुताबिक सिंघाड़ा आटा काची में आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत करता है, कब्ज से राहत दिलाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होता है. साथ ही यह ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में भी मददगार माना जाता है, जिससे मधुमेह रोगियों के लिए भी यह बेहतर विकल्प बनता जा रहा है. रसोईया प्रियंका ने बताया कि पारंपरिक तरीके से काची बनाने के लिए सूखे सिंघाड़े की कौड़ी खरीदी जाती है, जिसे कूट-पीसकर छाना जाता है. करीब 7 से 8 लीटर पानी में 1 किलो पिसा सिंघाड़ा डालकर आधे से एक घंटे तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसके बाद इसमें 2 से 2.5 किलो गुड़ मिलाया जाता है और गाढ़ा होने तक पकाया जाता है. अंत में चिरौंजी, गरी, सोंठ और दाख जैसे ड्राई फ्रूट्स मिलाकर स्वाद को और बढ़ाया जाता है. आज जब लोग जंक फूड छोड़कर पारंपरिक और पौष्टिक भोजन की ओर लौट रहे हैं, तब सिंघाड़ा आटा काची की मांग तेजी से बढ़ रही है.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining Bharat.one she has worked with Re…और पढ़ें

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