How to Make Mooli Mirch Achaar Recipe: सर्दियां शुरू होते ही ऐसा लगता है जैसे पूरा किचन अचारों की खुशबू से भर गया हो. हर घर में तरह–तरह के अचार बनने लगते हैं और खाने की थाली एकदम खास हो जाती है. गाजर का अचार, गोभी-शलजम का अचार, नींबू का अचार…सबकी अपनी जगह है, लेकिन सर्दियों में एक अचार ऐसा है जो सच में खाने का मजा लेवल अप कर देता है, मूली–मिर्च का अचार. इसका खट्टा–तीखा कॉम्बिनेशन, मूली की क्रंच और मिर्च की हल्की गर्माहट पूरे मौसम में हर डिश को स्पेशल बना देती है. खास बात यह है कि यह अचार बहुत जल्दी बन जाता है और लंबा चलता है. अगर इसे सही तरीके से बनाया जाए तो यह फ्रिज में कई हफ्ते अच्छे से टिक जाता है. आजकल लोग इंस्टेंट रेसिपीज पर ज्यादा भरोसा करते हैं और मूली–मिर्च का यह अचार उसी ट्रेंड को परफेक्ट तरीके से मैच करता है. इस रेसिपी को एक बार सीख लिया तो हर सर्दी में आपके किचन का स्टार यही बनेगा.
ताजी मूली और सही मिर्च से शुरू होती है परफेक्ट अचार की तैयारी
अचार का स्वाद और उसकी शेल्फ लाइफ दोनों सब्जियों की क्वालिटी पर निर्भर करते हैं. मूली हमेशा ताजी और सख्त लेनी चाहिए ताकि काटने पर उसका क्रंच बना रहे. बासी या नरम मूली अचार को जल्दी खराब कर देती है. मूली को उंगलियों जैसे लंबाई वाले स्ट्रिप्स में काटना सबसे सही तरीका है क्योंकि इस शेप में मसाला अच्छे से पकड़ता है. अब बात करते हैं मिर्च की. मोटी और कम तीखी हरी मिर्चें इस अचार के लिए बिल्कुल परफेक्ट रहती हैं. इन्हें बस हल्का सा लंबाई में चीरा लगाना होता है ताकि मसाला भीतर तक जा सके लेकिन मिर्च का आकार टूटे नहीं. अदरक को भी पतले–पतले लच्छों में काट लें. यह अचार को एक गर्म, रिच फ्लेवर देता है और मूली की हल्की स्टीवनेस के साथ बहुत अच्छा बैलेंस बनाता है. यह पूरी तैयारी अचार के बेसिक फ्लेवर के लिए बेहद जरूरी है.

नमक लगाकर निकालें एक्स्ट्रा पानी, यहीं होती है सबसे ज्यादा गलती
अचार लंबे समय तक चले, इसके लिए एक जरूरी स्टेप है, सब्जियों का पानी निकालना. मूली और मिर्च में पानी की मात्रा ज्यादा होती है, और अगर यह पानी अचार में रह जाए तो वह जल्दी खराब हो सकता है. इसलिए मूली, अदरक और मिर्च को नमक लगाकर करीब एक घंटे के लिए छोड़ दें. नमक इनके अंदर से अतिरिक्त पानी बाहर खींच लेता है. एक घंटे बाद मूली की स्ट्रिप्स को हाथ से हल्का दबाकर पानी निथार लें और चाहें तो इन्हें कुछ मिनट के लिए कपड़े पर फैलाकर सुखा सकते हैं. इस स्टेप की वजह से अचार न ज्यादा गीला बनता है और न ही जल्दी फंगस लगता है. बहुत लोग यह प्रक्रिया छोड़ देते हैं और यही से अचार की क्वालिटी खराब हो जाती है. इसलिए इस स्टेप को बिल्कुल स्किप न करें.

सरसों दाना, हल्दी और लाल मिर्च-मसालों का सही बैलेंस ही दिलाएगा देसी स्वाद
अब बारी आती है अचार के असली तड़के की. मूली–मिर्च के इस अचार में सरसों दाना सबसे बड़ा हीरो होता है. सरसों दाने को हल्का सा कूट लें, पाउडर न बनाएं. बस इतना कि दाने क्रैक हो जाएं. इससे इसका फ्लेवर बेहद बढ़िया निकलकर आता है. इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालें. अगर आपको बाजार वाला फ्लेवर चाहिए तो एक चम्मच अचार मसाला भी डाल सकते हैं. मसाले जितने फ्रेश होंगे, अचार उतना ही सुगंधित और स्वादिष्ट बनेगा. मसालों का सही बैलेंस अचार को परफेक्ट बनाता है. अधिक मसाला अचार को कड़वा कर सकता है जबकि कम मसाला अचार को फीका बना देता है. इसलिए मात्रा संतुलित रखें.

गर्म किया हुआ सरसों का तेल-अचार में जान डालने वाला सबसे खास स्टेप
इस अचार की सबसे अनोखी बात है इसका तेल. सरसों का तेल हमेशा पहले गर्म किया जाता है ताकि उसका कच्चा स्वाद खत्म हो जाए और वह अचार को एकदम देसी फ्लेवर दे सके. तेल को बस इतना गर्म करें कि उसमें धुआं उठ जाए, फिर गैस बंद कर दें और इसे गुनगुना होने दें. गुनगुना तेल मसालों को एक्टिव कर देता है और अचार का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. जब आप यह तेल मूली और मिर्च पर डालते हैं, तो अचार का रंग और खुशबू दोनों ही एकदम शानदार हो जाते हैं. इसके बाद सिरका या नींबू का रस डालकर हल्की खटास जोड़ें जो इस अचार की पहचान है.
कांच के जार में सही तरह स्टोर करें ताकि अचार बना रहे क्रंची और ताजा
स्टोरेज अचार के लिए उतना ही जरूरी है जितना उसका मसाला. अचार हमेशा पूरी तरह सूखे कांच के जार में ही रखें. जार को धूप में या हल्के गर्म तवे पर उलटाकर सुखा सकते हैं. जार में थोड़ी भी नमी रहेगी तो अचार खराब होने का खतरा बढ़ जाता है. अचार भरने के बाद ऊपर थोड़ा तेल डाल दें ताकि यह सील जैसा काम करे. पहला दिन अचार को कमरे के तापमान पर रखें, यह समय मूली और मिर्च को मसाला सोखने का होता है. अगले दिन से इसे फ्रिज में रखें ताकि इसका क्रंच लंबे समय तक बना रहे.

हर खाने का स्वाद बढ़ा देता है यह खट्टा–तीखा देसी अचार
मूली–मिर्च का अचार हर डिश के साथ कमाल का लगता है. चाहे गरम परांठे हों, दाल–चावल हो, मिस्सी रोटी हो, खिचड़ी हो या पूड़ी–सब्जी…इसकी तीखेपन और खटास का बैलेंस खाने का मजा बढ़ा देता है. सर्दियों में जब अक्सर कुछ चटपटा खाने का मन करता है, तब यह अचार बिल्कुल परफेक्ट साथी बन जाता है. एक बार इसे ट्राई कर लिया तो आप हर साल इसे बनाना नहीं भूलेंगे.
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