Home Food Kathal Ka Achaar: एक बार झारखंडी स्टाइल में बनाएं कटहल का अचार,...

Kathal Ka Achaar: एक बार झारखंडी स्टाइल में बनाएं कटहल का अचार, सालों नहीं होगा खराब, लाजवाब स्वाद की रेसिपी!

0
0


Last Updated:

Kathal Achar Traditional Recipe: कटहल का अचार यूं तो बहुत से घरों में बनता है पर इसे बनाने की पारंपरिक झारखंडी विधि की बात ही अलग है. इसे तरीके से बनाने से ना सिर्फ इसका स्वाद कमाल होता है बल्कि यह सालों-साल चलता भी है. जानते हैं इसकी डिटेल्ड रेसिपी.

good

झारखंड के गांवों में जब कच्चा कटहल बाजार में आना शुरू होता है, तो घरों में अचार बनाने की रौनक बढ़ जाती है. यहां कटहल का अचार सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि परंपरा और घरेलू कला का हिस्सा है. देसी मसालों और शुद्ध सरसों के तेल में बना यह अचार तीखा, खुशबूदार और लंबे समय तक टिकने वाला होता है. ग्रामीण इलाकों में इसे दाल-भात, रोटी या चूड़ा-दही के साथ बड़े चाव से खाया जाता है.

food

अचार बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे कटहल को छीलकर मध्यम आकार के टुकड़ों में काट लिया जाता है. कटहल काटते समय हाथ और चाकू पर सरसों का तेल लगा लेने से उसका चिपचिपा दूध नहीं चिपकता. कटे हुए टुकड़ों में नमक और हल्दी मिलाकर उन्हें 5–10 मिनट हल्का उबाल लिया जाता है या फिर 1–2 दिन धूप में सुखाया जाता है. इससे कटहल का कच्चापन कम हो जाता है और अचार लंबे समय तक सुरक्षित रहता है.

food

अब बारी आती है मसालों की, जो झारखंडी अचार की असली पहचान हैं. एक कड़ाही में सरसों का तेल धुआं उठने तक गरम करके ठंडा कर लिया जाता है. एक बड़े बर्तन में दरदरी पिसी सरसों, सौंफ, मेथी दाना, कलौंजी, जीरा और थोड़ी सी अजवाइन मिलायी जाती है. इसके साथ लाल मिर्च पाउडर, हल्दी और धनिया पाउडर डाला जाता है. झारखंडी स्वाद के लिए मसाले थोड़े तीखे रखे जाते हैं. चाहें तो हल्की खटास के लिए थोड़ा अमचूर भी मिलाया जा सकता है.

Add Bharat.one as
Preferred Source on Google

food

अब सूखे या उबाले हुए कटहल के टुकड़ों को इन मसालों में डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है, ताकि हर टुकड़े पर मसाला अच्छी तरह चढ़ जाए. तैयार मिश्रण को साफ और सूखे कांच के जार में भर दिया जाता है. ऊपर से इतना सरसों का तेल डाला जाता है कि अचार पूरी तरह तेल में डूबा रहे. जार को 4–5 दिनों तक धूप में रखा जाता है और रोज हल्का हिलाया जाता है, जिससे मसाले अच्छी तरह मिलते रहें और अचार का स्वाद गहराता जाए.

foos

कुकिंग एक्सपर्ट पूनम देवी बताती हैं कि झारखंडी कटहल का अचार सही मसाले, शुद्ध सरसों के तेल और भरपूर धूप की वजह से लंबे समय तक खराब नहीं होता. उनके अनुसार, “अचार बनाने में धैर्य सबसे जरूरी है, जल्दबाजी करेंगे तो स्वाद पूरा नहीं आएगा.” वह कहती हैं कि गांवों में आज भी पारंपरिक तरीके से अचार बनाकर लोग सालभर इसका आनंद लेते हैं, और यही देसी स्वाद लोगों को अपनी मिट्टी से जोड़े रखता है.

homelifestyle

झारखंडी स्टाइल में बनाएं कटहल का अचार, सालों नहीं होगा खराब, लाजवाब स्वाद..!


.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.
.

https://hindi.news18.com/photogallery/lifestyle/recipe-jackfruit-pickle-kathal-ka-achaar-jharkhnadi-way-recipe-last-for-years-local18-ws-kl-10102879.html

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here