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सिर्फ पहाड़ों पर उगती है ये जड़ी-बूटी, कीमत ₹8000 kg, खाने में लगा दिया छौंका…तो उड़ जाएंगी कई बीमारियां!


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Faran Benefits: सिर्फ ठंडी जगहों में उगने वाली ये जड़ी-बूटी कमाल है. इसको खाने में मसाले की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. आयुर्वेद में भी इसके कई तरीके बताए गए हैं. ये खाने का स्वाद तो बढ़ाएगी ही, कई बीमारियों का रामबाण इलाज मानी गई है. यही वजह है कि यह महंगी बिकती है. जानें लाभ…

Faran Benefits: रसोई में तड़के के लिए जीरा, प्याज, लहसुन या लाल मिर्च का इस्तेमाल होना आम बात है. लेकिन, क्या आपने कभी ऐसा मसाला सुना है जो न केवल स्वाद बढ़ाए बल्कि दवा की तरह काम करे? आज हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड की ठंडी पहाड़ियों में पाई जाने वाली अनोखी जड़ी-बूटी “फरण” (Faran) की, जिसे वहां के भोटिया जनजाति के लोग सदियों से उगाते आ रहे हैं. इस जड़ी-बूटी की कीमत 8 हजार रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाती है.

फरण एक पहाड़ी जड़ी-बूटी है, जो प्याज के परिवार से संबंध रखती है. यह आकार में छोटी होती है, लेकिन सुगंध और स्वाद में बेहद तीखी और प्रभावशाली. पहाड़ों के सर्द मौसम और ऊंचाई पर यह प्राकृतिक रूप से पनपती है. इसे सुखाकर मसाले की तरह इस्तेमाल किया जाता है. खास बात ये कि जो लोग प्याज और लहसुन नहीं खाते, वे फरण का उपयोग तड़के में एक बेहतरीन विकल्प के रूप में करते हैं.

इतना महंगा क्यों?
फरण की खेती आसान नहीं है. यह सिर्फ ठंडी जलवायु वाले क्षेत्रों में, लगभग 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई पर उगाई जा सकती है. इसकी पैदावार बहुत सीमित होती है और इसे तैयार करने में समय व मेहनत दोनों लगते हैं. इसलिए बाजार में इसकी कीमत 8 हजार रुपये किलो तक पहुंच जाती है. उत्तराखंड, हिमाचल और नेपाल की सीमाओं में इसकी खेती सीमित मात्रा में होती है. बड़े शहरों में रहने वाले संपन्न लोग और हर्बल प्रोडक्ट बनाने वाली कंपनियां इसे खरीदती हैं.

औषधीय गुणों से भरपूर
फरण को “पर्वतीय औषधि” भी कहा जाता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और डिटॉक्सिफाइंग गुण पाए जाते हैं. डॉक्टरों के अनुसार, यह कई गंभीर बीमारियों में लाभदायक है…

डायबिटीज कंट्रोल: फरण ब्लड शुगर लेवल को संतुलित रखता है और इंसुलिन की क्रिया को बेहतर बनाता है.
पीलिया (जॉन्डिस): इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व लिवर को साफ करते हैं और पीलिया में राहत देते हैं.
कोलेस्ट्रॉल कम करता है: इसके नियमित सेवन से खराब कोलेस्ट्रॉल घटता है और दिल मजबूत बनता है.
पाचन तंत्र दुरुस्त: यह पेट की गैस, कब्ज और एसिडिटी जैसी दिक्कतों में कारगर है.
सांस संबंधी बीमारियां: दमा और खांसी जैसी समस्याओं में भी यह राहत देता है.

कैसे किया जाता है इस्तेमाल
फरण को सुखाकर बारीक पीस लिया जाता है और फिर इसे दाल, सब्जी या चटनी में तड़के के रूप में डाला जाता है. इसका स्वाद प्याज और लहसुन से कहीं अधिक सुगंधित होता है. इसके अलावा कई जगहों पर इसे हर्बल चाय में भी मिलाया जाता है, ताकि सर्दी-जुकाम से बचाव हो सके.

थोड़ी मात्रा ही काफी
डॉ. अनिल पटेल बताते हैं कि फरण शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाता है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता में सुधार करता है. हालांकि, इसकी कीमत ऊंची होने के कारण आम लोग इसे नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं कर पाते. लेकिन डॉक्टरों के अनुसार, थोड़ी मात्रा में इसका सेवन भी काफी फायदेमंद होता है.

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Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म… और पढ़ें

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पहाड़ों की जड़ी-बूटी, दाम ₹8000 kg, खाने में लगा दिया छौंका..उड़ जाएंगी कई बीमरी

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Bharat.one किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-mountains-herb-faran-costs-rs-8000-per-kg-add-with-food-cure-many-diseases-know-benefits-local18-9851207.html

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