ऋषिकेश: हर महीने होने वाले पीरियड्स क्रैम्प्स महिलाओं के लिए एक आम लेकिन तकलीफदेह समस्या है. इसमें पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, कमर में जकड़न, थकान, चिड़चिड़ापन और कभी-कभी मतली तक महसूस होती है. कई महिलाएं इस दर्द को सहना ही अपनी मजबूरी मान लेती हैं, जबकि आयुर्वेद में इसे जड़ से ठीक करने के उपाय बताए गए हैं. आयुर्वेद न केवल दर्द को कम करता है, बल्कि शरीर के भीतर असंतुलन को सुधारकर पीरियड्स को नियमित और सहज बनाने में भी मदद करता है.
आयुर्वेद के अनुसार पीरियड्स क्रैम्प्स का कारण
Bharat.one के साथ बातचीत के दौरान डॉ राजकुमार (आयुष) ने कहा कि आयुर्वेद के अनुसार पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द मुख्य रूप से वात दोष के असंतुलन के कारण होता है. वात दोष शरीर में गति और प्रवाह को नियंत्रित करता है. जब वात असंतुलित होता है, तो गर्भाशय की मांसपेशियों में संकुचन बढ़ जाता है, जिससे तेज दर्द होता है. ठंडा भोजन, अनियमित दिनचर्या, अधिक तनाव, नींद की कमी और ज्यादा कैफीन का सेवन वात दोष को बढ़ाता है. यही कारण है कि आज की लाइफस्टाइल में पीरियड्स क्रैम्प्स की समस्या अधिक देखने को मिलती है.
अजवाइन और गुड़ का घरेलू उपाय
अजवाइन और गुड़ का सेवन आयुर्वेद में पीरियड्स दर्द के लिए बेहद असरदार माना गया है. अजवाइन वात और कफ को संतुलित करती है, जबकि गुड़ शरीर को गर्माहट देता है और ब्लड फ्लो बेहतर करता है. पीरियड्स से एक या दो दिन पहले आधा चम्मच अजवाइन को गुड़ के साथ लेने से पेट की ऐंठन कम होती है. यह उपाय गैस और सूजन की समस्या को भी दूर करता है.
गर्म पानी और तिल के तेल से मालिश
पीरियड्स के दौरान गर्म पानी पीना एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय है. यह शरीर के भीतर जमा ठंडक को कम करता है और मांसपेशियों को रिलैक्स करता है. इसके साथ ही तिल के तेल से पेट के निचले हिस्से और कमर की हल्की मालिश करने से दर्द में काफी राहत मिलती है. तिल का तेल वात दोष को शांत करता है और गर्भाशय में रक्त संचार को बेहतर बनाता है. रात में सोने से पहले मालिश करना अधिक लाभकारी माना जाता है.
अशोक की छाल और शतावरी के फायदे
आयुर्वेद में अशोक की छाल को महिलाओं के लिए अमृत समान माना गया है. अशोक की छाल का काढ़ा पीने से पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द, अत्यधिक ब्लीडिंग और कमजोरी कम होती है. वहीं शतावरी हार्मोन संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. यह न केवल पीरियड्स दर्द को कम करती है, बल्कि पीरियड्स को नियमित करने और प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती है. इन दोनों का सेवन आयुर्वेदिक चिकित्सक की सलाह से करना बेहतर रहता है.
योग और प्राणायाम से प्राकृतिक राहत
हल्के योगासन और प्राणायाम पीरियड्स क्रैम्प्स में बहुत मददगार होते हैं. भुजंगासन, बालासन और सुप्त बद्ध कोणासन जैसे आसन पेट के निचले हिस्से की जकड़न को कम करते हैं. अनुलोम विलोम और भ्रामरी प्राणायाम तनाव को घटाते हैं, जिससे दर्द की तीव्रता भी कम होती है. नियमित योग अभ्यास से शरीर मजबूत होता है और हर महीने होने वाली तकलीफ धीरे-धीरे कम होने लगती है.
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