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अस्पतालों में इस जगह छिपे रहते हैं सैकड़ों बैक्टीरिया ! निमोनिया, सेप्सिस की बन सकते हैं वजह, स्टडी में खुलासा

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Agency:IANS

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Cleaning in Hospitals: नई स्टडी में पता चला है कि अस्पताल की सिंक के पाइप में खतरनाक बैक्टीरिया छिपे रहते हैं. ये बैक्टीरिया कई इंफेक्शंस की वजह बन सकते हैं. इन पाइपों की सफाई करने के बावजूद ये बैक्टीरिया खत्म …और पढ़ें

अस्पतालों में इस जगह छिपे रहते हैं सैकड़ों बैक्टीरिया ! स्टडी में हुआ खुलासा

अस्पताल में कई खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद होते हैं, जिनसे बचना चाहिए.

हाइलाइट्स

  • अस्पताल की सिंक के पाइप में सैकड़ों बैक्टीरिया छिपे रहते हैं.
  • ये बैक्टीरिया सफाई करने के बावजूद पाइप में खत्म नहीं होते हैं.
  • इनकी वजह से हेल्थकेयर एसोसिएटेड इंफेक्शन फैल सकते हैं.

New Study on Hospitals Bacteria: अस्पतालों में साफ-सफाई रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि वहां कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया मौजूद रहते हैं. इस खतरे को देखते हुए अस्पतालों में हर वक्त सफाई होती रहती है. हालांकि अस्पताल में कई ऐसी जगह होती हैं, जहां खूब क्लीनिंग के बावजूद खतरनाक बैक्टीरिया इकट्ठा रहते हैं. एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि अस्पतालों में अच्छी तरह सफाई के बावजूद वहां के सिंक के पाइपों में खतरनाक बैक्टीरिया छिपे रहते हैं. इससे हेल्थकेयर एसोसिएटेड इंफेक्शन फैल रहे हैं. ये इंफेक्शन उन मरीजों में ज्यादा फैलते हैं, जिनकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी कमजोर होती है. इसके अलावा कुछ अस्पतालों में सफाई के नियमों का सही से पालन न करने से भी यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

नई स्टडी के अनुसार इस तरह के संक्रमण दुनियाभर में एक बड़ी परेशानी बन चुके हैं और अस्पतालों के कुल बजट का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा इसी पर खर्च हो जाता है. एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल भी इस समस्या को बढ़ाता है, क्योंकि इससे बैक्टीरिया की कुछ प्रजातियां दवाओं के प्रति रजिस्टेंट हो जाती हैं. जब ये प्रतिरोधक जीन एक बैक्टीरिया से दूसरे में स्थानांतरित हो जाते हैं, तो नए प्रकार के रोग पैदा होने की संभावना बढ़ जाती है. पिछले साल सामने आई एक रिसर्च में पता चला था कि हॉस्पिटल के टॉयलेट में खतरनाक बैक्टीरिया हो सकते हैं, जो लोगों को बीमार कर सकते हैं.

नया अध्ययन “फ्रंटियर्स इन माइक्रोबायोलॉजी” पत्रिका में प्रकाशित हुआ है. इसमें पता चला है कि सिंक के पाइप में बैक्टीरिया को कंट्रोल करना और ऐसी जगहों पर नए बैक्टीरिया को आने से रोकना एक वैश्विक समस्या हो सकती है. ये जगह ऐसी होती हैं, जहां डिसइंफेक्टेंट का असर काफी कम होता है. स्पेन की बैलेरिक आइलैंड्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और इस स्टडी से जुड़ी मार्गरीटा गोमिला का कहना है कि अस्पतालों के सिंक के पाइपों में बैक्टीरिया की आबादी समय के साथ बदलती रहती है, चाहे सफाई के नियम कितने ही सख्त क्यों न हों. ऐसे में यह समस्या गंभीर होती जा रही है.

नई रिसर्च में पता चला कि सिंक और उनके पाइपों या नालियों को नियमित रूप से ब्लीच, केमिकल्स और भाप से साफ किया जाता है. इसके अलावा साल में एक बार पाइपों को कम तापमान पर हाइपरक्लोरीनीकृत किया जाता है. बावजूद इसके वैज्ञानिकों को पाइपों में कुल 67 प्रकार के बैक्टीरिया मिले. सबसे ज्यादा बैक्टीरिया सामान्य चिकित्सा (जनरल मेडिसिन) और आईसीयू में मिले, जबकि सबसे कम माइक्रोबायोलॉजी लैब में पाए गए. आईसीयू के नए खुले वार्ड में भी बैक्टीरिया की विविधता अधिक थी. इसमें मुख्य रूप से स्टेनोट्रोफोमोनास और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा नामक बैक्टीरिया पाए गए, जो निमोनिया और सेप्सिस जैसी बीमारियां फैला सकते हैं.

इसके अलावा शोधकर्ताओं को स्यूडोमोनास प्रजाति के 16 अन्य प्रकार के बैक्टीरिया भी मिले, जिन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इंसानों के लिए सबसे बड़े एंटीबायोटिक प्रतिरोधी खतरों में से एक माना है. ये बैक्टीरिया खासतौर पर अस्पताल के शॉर्ट-स्टे वार्ड में अधिक पाए गए. अन्य खतरनाक बैक्टीरिया भी विभिन्न वार्डों में बार-बार मिले. शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी कि अस्पताल के सिंक के पाइप बैक्टीरिया के छिपने और बढ़ने के लिए सबसे बड़ी जगह बन सकते हैं. इनमें कुछ ऐसे बैक्टीरिया भी शामिल हो सकते हैं जो एंटीबायोटिक से बचने की क्षमता रखते हैं और नए संक्रमण फैला सकते हैं. इसलिए यह जानना जरूरी है कि ये बैक्टीरिया कहां से आते हैं और मरीजों तक कैसे पहुंचते हैं, ताकि इनके प्रसार को रोका जा सके.

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अस्पतालों में इस जगह छिपे रहते हैं सैकड़ों बैक्टीरिया ! स्टडी में हुआ खुलासा


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