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Eye Checkup And Stroke Risk: एक हालिया स्टडी में पता चला है कि आंखों के चेकअप से स्ट्रोक के खतरे का पता लगाया जा सकता है. आंखों की ब्लड वेसल्स की फिंगरप्रिंट से स्ट्रोक के रिस्क का सटीक अनुमान लगाने का दावा ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने…और पढ़ें
New Study on Stroke Risk: अक्सर माना जाता है कि लोगों को साल में एक या दो बार अपनी आंखों का चेकअप करवाना चाहिए. जिन लोगों को चश्मा लगा हुआ होता है, उन्हें हर 6 महीने पर रेगुलर आई चेकअप कराने की सलाह दी जाती है. इससे आंखों की सेहत की मॉनिटरिंग करने में मदद मिलती है. एक हालिया स्टडी में पता चला है कि रेगुलर आई चेकअप से स्ट्रोक के जोखिम का सटीक रूप से अनुमान लगाया जा सकता है. यह शोध ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में स्थित सेंटर फॉर आई रिसर्च (CERA) द्वारा किया गया है और इसमें आंखों व स्ट्रोक के रिस्क को लेकर बड़ा कनेक्शन सामने आया है.
वैज्ञानिकों का दावा है कि आंखों के पीछे रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) की फिंगरप्रिंट की पहचान की गई है. इस फिंगरप्रिंट का उपयोग करके स्ट्रोक के खतरे का सटीक पूर्वानुमान लगाया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने यह पाया कि रेटिना में मौजूद रक्त वाहिकाओं के पैटर्न और उनके स्वास्थ्य के संकेतों का विश्लेषण करके किसी व्यक्ति के स्ट्रोक के जोखिम का मूल्यांकन किया जा सकता है. स्टडी में यह स्पष्ट किया गया कि आंख की रक्त वाहिकाओं में 118 स्वास्थ्य संकेत होते हैं, जो स्ट्रोक के जोखिम को भविष्यवाणी करने में सहायक हो सकते हैं.
इन संकेतों का विश्लेषण फंडस फोटोग्राफी के माध्यम से किया जा सकता है, जो रेगुलर आई टेस्टिंग में उपयोग होने वाला एक सामान्य उपकरण है. यह प्रक्रिया एक मशीन लर्निंग टूल के जरिए की गई थी, जिसे रेटिना-आधारित माइक्रो वैस्कुलर हेल्थ असेसमेंट सिस्टम कहा जाता है. इस प्रणाली का उपयोग करके UK के 45,161 लोगों की आंखों की फंडस फोटो का विश्लेषण किया गया. शोध में पाया गया कि इन लोगों में से 749 को 12.5 वर्षों की औसत निगरानी अवधि के दौरान स्ट्रोक हुआ. शोधकर्ताओं ने 118 संकेतों में से 29 को स्ट्रोक के जोखिम से जुड़ा हुआ पाया.
शोधकर्ताओं ने कहा कि इस शोध से यह सिद्ध होता है कि आयु और लिंग जैसे सामान्य संकेतकों के साथ रेटिना के संकेतों का उपयोग स्ट्रोक के जोखिम का सटीक मूल्यांकन करने के लिए एक सरल और प्रभावी तरीका हो सकता है. स्ट्रोक एक गंभीर समस्या है, जो दुनिया भर में 100 मिलियन यानी 10 करोड़ से अधिक लोगों को प्रभावित करती है और हर साल लगभग 67 लाख (6.7 मिलियन) मौतों का कारण बनती है. स्ट्रोक से संबंधित विकलांगता और मृत्यु दर को कम करने के लिए इस तरह के शोध से स्ट्रोक के जोखिम वाले व्यक्तियों की पहचान करना बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है.
January 15, 2025, 12:43 IST
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-regular-eye-tests-can-accurately-predict-stroke-risk-new-study-finds-know-details-in-hindi-8961481.html

















