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कमाल की लकड़ी! इसके फायदे गिनते-गिनते जाएंगे थक, राख तो पेट की बीमारियों के लिए है रामबाण, जानें सेवन का तरीका

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Agency:Bharat.one Uttarakhand

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Bageshwar News: उत्तराखंड के बागेश्वर में चीड़ के पेड़ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में यहां के लोग चीड़ की लकड़ी से बने राख का इस्तेमाल पेट के कीड़े मारने और खेत में खाद के रूप में इस्तेमाल करते हैं. हाला…और पढ़ें

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चीड़ के पेड़ की राख

हाइलाइट्स

  • चीड़ की राख पेट के कीड़े मारने में सहायक है.
  • कृषि में चीड़ की राख मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाती है.
  • धार्मिक कार्यों में चीड़ की राख का विशेष महत्व है.

बागेश्वर: उत्तराखंड में चीड़ का पेड़ प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. चीड़ की लकड़ी को पहाड़ के लोग ईधन के रूप में इस्तेमाल करते हैं. चीड़ के ईधन से बनी राख कई प्रकार से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है. इस राख को पहाड़ में कई बीमारियों का रामबाण इलाज माना जाता है. चीड़ की लकड़ी से बनी राख को पेट के कीड़े मारने के लिए खाया भी जाता है. पहाड़ की मान्यताओं के अनुसार यहां देवी-देवताओं के अवतरित होने के बाद राख से आशीर्वाद दिया जाता है. साथ ही चीड़ की राख को खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. इससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है.

बागेश्वर के स्थानीय जानकार किशन मलड़ा ने Bharat.one को बताया कि उत्तराखंड में पाएं जाने वाले चीड़ के पेड़ की राख अपने अनोखे स्वास्थ्य लाभों के लिए जानी जाती है. यह केवल एक पारंपरिक चिकित्सा उपाय नहीं, बल्कि कृषि और धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यहां के लोग इसे विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल करते हैं.

पेड़ का कीड़ा मारने में है सहायक

पहाड़ी क्षेत्रों में यह एक महत्वपूर्ण पारंपरिक उपचार बन चुकी है. चीड़ की राख पेट के कीड़े मारने में भी सहायक मानी जाती है. पहाड़ी इलाकों के लोग इस राख को नियमित रूप से सेवन करते हैं, जो पेट के अंदर के हानिकारक कीड़ों को नष्ट करने में मदद करता है. यह एक प्राकृतिक उपाय है, जो बिना किसी हानिकारक रसायन के पेट की सफाई करता है, और स्वास्थ्य को सुधारता है.

कृषि कार्यों में भी होता है प्रयोग

कृषि के लिए भी चीड़ की राख का उपयोग किया जाता है. यह खेतों में डाली जाती है, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है. राख में मौजूद खनिज तत्व मिट्टी को समृद्ध बनाते हैं, जिससे फसलों की वृद्धि में मदद मिलती है, और उत्पादन में भी वृद्धि होती है. यह प्राकृतिक उर्वरक के रूप में कार्य करता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है.

धार्मिक रूप से है विशेष महत्व

उत्तराखंड की मान्यताओं के अनुसार चीड़ के पेड़ की राख को धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्व दिया जाता है. जब देवी-देवता पहाड़ों पर अवतरित होते हैं, तो इस राख से आशीर्वाद दिया जाता है. इसे पवित्र माना जाता है और विभिन्न धार्मिक कार्यों में इसका उपयोग किया जाता है. हालांकि चीड़ की राख के स्वास्थ्य लाभ कई हैं, लेकिन इसे सही मात्रा में और सही तरीके से ही उपयोग करना चाहिए. अधिक मात्रा में इसका सेवन कुछ हानिकारक भी हो सकता है.

इसलिए विशेषज्ञों की सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है. इस प्रकार चीड़ के पेड़ की राख न केवल एक प्राकृतिक उपचार है. बल्कि यह कृषि और धार्मिक महत्व में भी समृद्ध है. यह पहाड़ी जीवन का अहम हिस्सा है, जो स्थानीय लोगों के जीवन में कई रूपों में उपयोगी साबित हो रही है.

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कमाल की लकड़ी! राख तो पेट की बीमारियों के लिए है रामबाण, जानें सेवन का तरीका


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