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किचन टॉवल से हो सकती है फूड पॉइजनिंग! इस पर बैक्टीरिया ना पनपें इसलिए इतने दिन में बदल लेना चाहिए कपड़ा


घर के खाने को पौष्टिक और हाइजेनिक माना जाता है. किचन से परिवार के हर सदस्य की भूख मिटती है और उन्हें अपनी पसंद का खाना खाने को मिलता है. किचन भले ही कितनी साफ-सुथरी दिखे लेकिन यह बीमारी का कारण बन सकती है. किचन में अक्सर गैस स्टोव और काउंटर को साफ करने के लिए कपड़ा इस्तेमाल किया जाता है. यह कपड़ा ही बीमारी का कारण बन सकता है.

टॉयलेट से ज्यादा बैक्टीरिया
अक्सर कहा जाता है कि घर में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया टॉयलेट में पाए जाते हैं लेकिन किचन भी बैक्टीरिया का घर है. तुर्की की जेलिज्म यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार घर में 9% बीमारियां किचन में पनप रहे बैक्टीरिया की वजह से फैल सकती हैं. वहीं किचन में कॉकरोच भी रहते हैं जो अपने साथ कई तरह के बैक्टीरिया फैलाते हैं.

किचन का कपड़ा बैक्टीरिया का घर
यूनिवर्सिटी ऑफ मॉरिशियस ने 100 किचन टॉवल पर 1 महीने तक रिसर्च की. इसमें पाया गया कि इन कपड़ों में 1 महीने में 49% तक बैक्टीरिया की ग्रोथ हुई. वहीं जो कपड़े गीले छोड़े गए, उनमें यह बैक्टीरिया दोगुनी तेजी से बढ़े. इन कपड़ों में 36.7% ई-कोलाई, 36.7% Enterococcus spp और 14.3% Staphylococcus aureus नाम के बैक्टीरिया मिले. ई-कोलाई से पेट से जुड़े इंफेक्शन, Enterococcus spp से यूरिन और खून से जुड़े इंफेक्शन और  Staphylococcus aureus बैक्टीरिया से स्किन से जुड़े संक्रमण रोग हो सकते हैं.  

किचन टॉवल खतरनाक
महिलाएं रसोई में सबसे ज्यादा किचन टॉवल का इस्तेमाल करती हैं. आटा गूंथने, सब्जी काटने या बर्तन धोने के बाद हर बार इसका इस्तेमाल होता है. इस कपड़े में अक्सर सैल्मनेल नाम के बैक्टीरिया पनपने लगते हैं जो धोने के बाद भी आसानी से खत्म नहीं होते. अगर यह शरीर में प्रवेश कर जाए तो सेहत को बिगाड़ सकते हैं. पारस हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन के डॉ.संजय गुप्ता कहते हैं कि किचन में इस्तेमाल होने वाले कपड़े में कई खतरनाक बैक्टीरिया होते हैं जिससे बुखार, सिरदर्द, पेट में दर्द या ऐंठन, डायरिया या टाइफाइड तक हो सकता है. 

किचन के कपड़े को गीला ना छोड़े (Image-Canva)

फूड पॉइजनिंग भी हो सकती है
कुछ रिसर्च में सामने आ चुका है कि किचन के कपड़े में कुछ ऐसे पैथोजन पाए जाते हैं जिससे फूड पॉइजनिंग हो सकती है. अक्सर किचन टॉवल से सब्जी साफ की जाती है या खाने का बर्तन पोछा जाता है. इससे यह कीटाणु खाने में मिल जाते हैं और मुंह के जरिए पेट में चले जाते हैं जो फूड पॉइजनिंग की वजह बन सकते हैं. 

किचन के कपड़े को गर्म पानी से धोएं
किचन टॉवल को धोते वक्त हाथ में ग्लव्स पहनें. ध्यान रखें कि इसे गर्म पानी में ही धोएं. कपड़े को हर रोज या हर 2 दिन में धोना जरूरी है. कपड़े को उबालते हुए पानी में कुछ देर के लिए रखें. इसमें डिटर्जेंट पाउडर के साथ कास्टिंग या बेकिंग सोडा या सिरका मिलाएं. एंटीसेप्टिक सॉल्यूशन भी मिला सकते हैं. धोने के बाद कपड़े को धूप में सुखा दें. गर्म पानी और धूप में सूखने से इसमें मौजूद बैक्टीरिया काफी हद तक खत्म हो जाते हैं. कपड़े का सूखने के बाद ही इस्तेमाल करें. 

हर 15 दिन में बदल दें कपड़ा
किचन का कपड़ा हर 15 दिन में बदल लेना चाहिए और पुराने कपड़े को कूड़े में फेंक देना चाहिए. वहीं कुछ लोग रोटियां कपड़ों में बांधकर रखते हैं. इस कपड़े को भी 15 दिन में हटा देना चाहिए क्योंकि वह भी बैक्टीरिया का घर बन जाते हैं. किचन टॉवल से बेहतर पेपर टॉवल हैं. इसे एक ही बार में इस्तेमाल करने के बाद फेंक दिया जाता है जिससे बैक्टीरिया दूर ही रहते हैं. 

किचन में कपड़े की जगह पेपर टॉवल इस्तेमाल करें (Image-Canva)

किचन में जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किचन में जाने से पहले और खाना बनाने के बाद हमेशा हाथ धोएं. इसी तरह किचन टॉवल को हाथ लगाने के बाद तुरंत हैंडवॉश करें. केवल किचन टॉवल ही नहीं बर्तन साफ करने वाला स्क्रबर भी हर हफ्ते बदल लें. इससे भी किचन में बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. हर महीने पेस्ट कंट्रोल करवाएं ताकि कीटाणु खत्म हो जाएं. कटिंग बोर्ड को अच्छे से धोकर और सुखाकर इस्तेमाल करें. 

साफ किचन से नहीं होता तनाव
ब्रिटिश जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन ने एक शोध किया. इसमें सामने आया कि जो लोग बैक्टीरिया को किचन से दूर रखते हैं, उनके शरीर में हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं जिससे वह खुश रहते हैं. तनाव उन्हें परेशान नहीं करता, वहीं उनकी ब्लड शुगर भी कंट्रोल रहती है. साफ किचन से इम्यूनिटी कम नहीं होती और बुखार या पेट खराब होने की समस्या परेशान नहीं करती. हर इंसान को हफ्ते में एक दिन किचन को अच्छे से साफ करना चाहिए. 


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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-why-kitchen-cloth-is-not-good-for-use-how-to-make-kitchen-bacteria-free-8939115.html

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