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Health Tips And Tricks : जालोर में मौसम बदलते ही लोग पारंपरिक सर्दी वाले आहार की ओर लौट रहे हैं और कच्ची हल्दी की सब्जी सबसे पसंदीदा बन गई है. यह सब्जी शरीर को गर्म रखती है, इम्युनिटी बढ़ाती है और सर्दी–जुकाम से बचाव करती है. होटलों से लेकर घरों तक इसकी मांग तेजी से बढ़ी है क्योंकि इसे सर्दियों का सुपरफूड माना जाता है. डॉक्टर भी इसके एंटी–इंफ्लेमेटरी और एंटी–ऑक्सिडेंट गुणों के कारण इसे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी बताते हैं.
जालोर. जालोर में मौसम तेजी से बदल रहा है और सुबह–शाम ठंडक का असर अब साफ महसूस होने लगा है. दिन में हल्की गर्मी अभी भी बनी हुई है, लेकिन लोगों के खानपान में सर्दियों वाला बदलाव दिखाई देने लगा है. इसी मौसम में शरीर को गर्म रखने और इम्युनिटी बढ़ाने के लिए लोग एक बार फिर देसी और पारंपरिक चीजों की ओर लौट रहे हैं. जालोर के अधिकतर होटलों और रेस्टोरेंट्स में इस समय हल्दी की खास सब्जी की शुरुआत हो चुकी है, जिसे सर्दियों का सुपरफूड कहा जाता है.
सिर्फ बाहर ही नहीं, बल्कि घरों में भी महिलाएं कच्ची हल्दी की सब्जी बनाकर परिवार को परोस रही हैं. माना जाता है कि हल्दी शरीर को अंदर से गर्म रखती है, संक्रमण से बचाव करती है और खाने के स्वाद को भी बढ़ाती है. ठंड बढ़ने के साथ ही यह सब्जी जालोर के खाने के मेन्यू में अपनी खास जगह बना चुकी है.
हल्दी की सब्जी बनाने की विधि
सबसे पहले ताजी कच्ची हल्दी को अच्छी तरह धोकर छील लें. इसके बाद इसे छोटे टुकड़ों में काटकर कद्दूकस कर लें. एक कढ़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें लहसुन, प्याज, अदरक और खड़े मसाले डालकर भूनें. फिर कद्दूकस की हुई हल्दी डालकर हल्की आंच पर अच्छे से भूनें.
इसके बाद दही की प्यूरी बनाकर उसमें हल्दी पाउडर, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक मिलाकर मसाला तैयार करें और इसे सब्जी में डालकर पकने दें. कुछ देर बाद मसाला हल्दी में अच्छे से समा जाएगा और सब्जी तैयार हो जाएगी. यह सब्जी गरमा–गरम खोबा रोटी या बाजरे की रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है.
हल्दी के औषधीय लाभ
जालोर के सुश्रुत आयुर्वेदिक चिकित्सालय के डॉक्टर अश्विन रोहिल्ला बताते हैं कि हल्दी में प्राकृतिक रूप से एंटी–इंफ्लेमेटरी और एंटी–ऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं. हल्दी की एंटी कैंसर प्रॉपर्टीज पर अमेरिका में रिसर्च भी की जा चुकी है और वहां इसका पेटेंट कराया गया है. सर्दियों में हल्दी की सब्जी खाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर ठंड से लड़ने में सक्षम होता है.
पुराने समय में हड्डी टूटने पर हल्दी वाला दूध पिलाया जाता था क्योंकि यह हड्डियों को जोड़ने में सहायक माना जाता है. हल्दी अपने इन गुणों के कारण प्राचीन काल से भारतीय रसोई और चिकित्सा दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती आई है.
बढ़ती मांग और बदलती पसंद
आज जब मौसम तेजी से बदल रहा है और बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है, ऐसे समय में हल्दी की यह पारंपरिक सब्जी लोगों को सेहत और स्वाद दोनों प्रदान कर रही है. यही वजह है कि जालोर के होटलों, रेस्टोरेंट्स और घरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है और लोग सर्दियों में इसे अपनी नियमित डाइट का हिस्सा बना रहे हैं.

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें
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https://hindi.news18.com/news/lifestyle/health-demand-for-haldi-sabzi-rises-in-jalore-during-winter-boosts-immunity-local18-ws-kl-9904282.html

















