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कितनी पीढ़ियों ने इसे खाकर काटे दिन, ये पहाड़ों का सुपरफूड, ऊर्जा से भरपूर, सर्दियों में वरदान – Uttarakhand News

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Tarunkand benefits : तरुणकंद पहाड़ी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक पारंपरिक कंदमूल है, जिसे खासकर सर्दियों में खाया जाता है. यह जमीन के भीतर उगता है और शरीर को ऊर्जा देता है. तरुणकंद में भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट और फाइबर होते हैं, जो पाचन सुधारते हैं और ठंड में शरीर को गर्म रखने में मदद करते हैं. प्राकृतिक रूप से उगने के कारण इसमें रसायनों या कृत्रिम तत्वों की मिलावट नहीं होती. इसका सेवन से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है क्योंकि यह धीरे-धीरे पचता है.

tarad

देश के पहाड़ी इलाकों खासकर उत्तराखंड और हिमालयी क्षेत्रों में प्रकृति ने ऐसे अनेक कंदमूल दिए हैं, जो स्वाद और पोषण दोनों से भरपूर हैं. इन्हीं में से एक है तरुणकंद, जिसे स्थानीय भाषा में पर तारू, तरड़ या तरुड़ भी कहा जाता है. आधुनिक खानपान के दौर में यह कंद भले ही लोगों की थाली से दूर हो गया हो, लेकिन कभी यह पहाड़ों में रहने वाले लोगों का मुख्य ऊर्जा स्रोत हुआ करता था. ठंडे मौसम में उगने वाला यह कंद आज भी स्थानीय लोगों के बीच खास महत्त्व रखता है.

what is tarudkand

तरुणकंद का बाहरी छिलका सख्त और खुरदुरा होता है, जबकि अंदर से यह सफेद या हल्का क्रीमी रंग का होता है. पकने के बाद इसका स्वाद हल्का मीठा और नट्स जैसा लगता है. इसे आमतौर पर उबालकर, भूनकर या सब्जी के रूप में खाया जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दियों के मौसम में इसे आग में भूनकर खाने की परंपरा आज भी देखने को मिलती है.

tarudkand in the mountains lifestyle

पहाड़ों में जब अनाज की उपलब्धता सीमित होती थी, तब तरुणकंद जैसे कंदमूल जीवन का सहारा बनते थ. खेतों और जंगलों के आसपास उगने वाला यह कंद आसानी से मिल जाता था. ग्रामीण लोग इसे जंगल से खोदकर लाते और परिवार के लिए भोजन तैयार करते. त्योहारों और मेलों में भी भुने हुए तरुणकंद की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लेती थी. यह सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि पहाड़ी संस्कृति का हिस्सा रहा है.

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nutritional food

तरुणकंद को ऊर्जा का अच्छा स्रोत माना जाता है. इसमें कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को ताकत देते हैं. इसमें फाइबर भी होता है, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है. यह लंबे समय तक पेट भरा होने का एहसास देता है, इसलिए मेहनत-मजदूरी करने वाले लोगों के लिए यह बेहद उपयोगी रहा है. प्राकृतिक रूप से उगने के कारण इसमें रसायनों या कृत्रिम तत्वों की मिलावट नहीं होती.

benefits of tarudkand

तरुणकंद ऊर्जा प्रदान करने वाला भोजन है, जो ठंडे इलाकों में शरीर को गर्मी और ताकत देने में मदद करता है. यह पाचन के लिए लाभकारी है. इसमें मौजूद फाइबर कब्ज जैसी समस्याओं से राहत देता है. यह कंदमूल सस्ता और सुलभ है, जंगलों और पहाड़ी क्षेत्रों में यह आसानी से मिल जाता है. यह फल बिना किसी प्रोसेसिंग के सीधे प्रकृति से मिलने वाला भोजन है. इसका सेवन करने से लंबे समय तक भूख नहीं लगती है क्योंकि यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे ऊर्जा बनी रहती है.

use of tarudkand

पहाड़ों में तरुणकंद को कई तरीकों से खाया जाता है. सबसे आम तरीका है इसे उबालकर पहाड़ी नमक के साथ खाना. कई जगहों पर इसे आग में भूनकर खाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. कुछ लोग इसकी सब्जी बनाते हैं, जिसमें स्थानीय मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. बुजुर्गों का मानना है कि सर्दियों में तरुणकंद खाने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है.

identity of tarudkand in the modern era

आज के समय में फास्ट फूड और प्रोसेस्ड खाने के चलते तरुणकंद जैसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ पीछे छूटते जा रहे हैं. नई पीढ़ी इसके स्वाद और फायदों से अनजान होती जा रही है. हालांकि, अब फिर से स्थानीय और जैविक भोजन की ओर लोगों का रुझान बढ़ रहा है. ऐसे में तरुणकंद को एक बार फिर पहचान मिलने लगी है. कई लोग इसे सुपरफूड के रूप में देखने लगे हैं.

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कितनी पीढ़ियों ने इसे खाकर काटे दिन, ये पहाड़ों का सुपरफूड, सर्दियों में वरदान


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